7 सप्ताह के बच्चे के साथ खेलने के सरल, सुरक्षित और विकासोन्मुख तरीके

7 सप्ताह के नवजात के लिए सरल खेल और गतिविधियाँ

7 सप्ताह के बच्चे के साथ खेल और गतिविधियाँ

सात सप्ताह की उम्र तक आपका नवजात शिशु केवल दूध पीने, सोने और छत की ओर देखने तक सीमित नहीं रहता। अब वह अपने छोटे-छोटे तरीकों से आपसे जुड़ने लगता है। कुछ देर तक आपकी आंखों में देखना, हल्की-सी “ऊऊ” जैसी आवाज निकालना, या आपकी उंगली को पहले से थोड़ा ज्यादा देर पकड़कर रखना। ये नन्हे पल बच्चे के साथ प्यार भरा खेल शुरू करने के लिए बहुत अच्छे हैं।

सबसे अच्छी 7 हफ्ते का बच्चा गतिविधियाँ छोटी, आसान और बच्चे के मूड के अनुसार होती हैं। इसके लिए महंगे खिलौनों, बड़ी प्ले-मैट या तय टाइमटेबल की जरूरत नहीं है। आपका चेहरा, आपकी आवाज, एक रंगीन गेंद और मुलायम कपड़ा ही काफी है।

इस उम्र में खेल का मतलब है बच्चे का ध्यान किसी चीज पर टिकने देना और उसे यह महसूस कराना कि मां-पापा या देखभाल करने वाले के पास रहना सुरक्षित, सुकून भरा और मजेदार है।

सातवें सप्ताह में क्या नया दिख सकता है?

हर बच्चे की बढ़ने की रफ्तार अलग होती है। इसलिए अगर आपका बच्चा यहां लिखी हर बात एक ही समय पर नहीं कर रहा है, तो चिंता न करें। फिर भी, नवजात विकास 7 सप्ताह के दौरान कुछ बदलाव अक्सर नजर आने लगते हैं।

आपका बच्चा शायद:

  • शांत और जागे हुए समय में ज्यादा सतर्क व प्रतिक्रिया देने वाला लगे
  • चेहरे या खिलौने को आंखों से पहले से बेहतर तरीके से फॉलो करे
  • हर समय मुट्ठी बंद रखने के बजाय हाथ खोलने लगे
  • कूइंग, गुर्राने, चीं-चीं या स्वर जैसी कई छोटी आवाजें निकाले
  • चेहरे और काले-सफेद या चमकीले रंगों वाली चीजों को ध्यान से देखे
  • झपकी के बीच कुछ ज्यादा देर जागे
  • पेट के बल लेटने पर सिर थोड़ा ऊंचा उठाने की कोशिश करे

7 सप्ताह के बच्चे का जागने का समय आमतौर पर बहुत लंबा नहीं होता, अक्सर जागने से फिर सोने तक करीब 45 से 60 मिनट। इसमें दूध पिलाना, डायपर बदलना, गोद में लेना और खेलना, सब शामिल है। इसलिए कुछ मिनट की नवजात जागने के समय गतिविधियाँ ही पर्याप्त हैं।

बच्चे के बहुत थकने से पहले खेल रोक देना बेहतर रहता है। खाली नजरों से देखना, चेहरा दूसरी तरफ कर लेना, मुंह या आंखें मलना, चिड़चिड़ाना या अचानक खिलौने में रुचि खत्म कर देना, नींद के शुरुआती संकेत हो सकते हैं।

1. चमकीले और साफ रंगों से परिचय कराएं

रंगों को पहचानने की क्षमता अभी विकसित हो रही होती है, लेकिन इस समय कई बच्चों को चमकीले, एक जैसे रंग वाली चीजें आकर्षित करने लगती हैं। शिशु के लिए रंग परिचय कराने का यह बहुत सहज तरीका है, जिसमें बच्चा जरूरत से ज्यादा उत्तेजित भी नहीं होता।

कैसे खेलें

एक समय में केवल एक चमकीली वस्तु चुनें, जैसे:

  • लाल रंग की हल्की गेंद
  • पीले रंग का रबर डक
  • नीला मुलायम ब्लॉक
  • हरे रंग का कपड़े का छोटा टुकड़ा

वस्तु को सफेद या हल्के रंग की सादी पृष्ठभूमि के सामने रखें। उसे बच्चे के चेहरे से लगभग 20 से 30 सेंटीमीटर की दूरी पर पकड़ें। यह लगभग वही दूरी है, जितनी दूध पिलाते समय आपका चेहरा बच्चे से होता है।

बच्चे को लगभग 20 से 30 सेकंड तक उसे देखने दें। फिर वस्तु को बहुत धीरे-धीरे दाएं-बाएं ले जाएं। जब बच्चा आंखों से उसका पीछा करे, तो कुछ क्षण रुकें। आप कह सकती हैं, “देखो, लाल गेंद। कितनी सुंदर लाल गेंद है।”

यह आंखों की फोकसिंग और वस्तु को ट्रैक करने का आसान अभ्यास है। धीमी गति से बच्चा आराम से वस्तु को देख पाता है और सादी पृष्ठभूमि में रंग साफ उभरकर आता है।

एक साथ बहुत सारे खिलौने न दिखाएं। सात सप्ताह की उम्र में रंग-बिरंगी चीजों का ढेर मनोरंजन से ज्यादा उलझन पैदा कर सकता है।

2. नन्ही पकड़ का अभ्यास कराएं

अब बच्चे की छोटी हथेलियां कभी-कभी खुलने लगी होंगी। हालांकि ठोड़ी के नीचे दबी हुई प्यारी-सी बंद मुट्ठी अभी भी अक्सर दिखेगी। जब हथेली खुली हो, तब हल्का-सा शिशु पकड़ अभ्यास कराया जा सकता है।

कैसे खेलें

बच्चे की हथेली में बहुत हल्की खड़खड़ाहट वाली रैटल, मुलायम कपड़े की रिंग या साफ, चिकनी टीथिंग रिंग रखें। पकड़ने वाली प्राकृतिक रिफ्लेक्स के कारण बच्चा उसे तुरंत थाम सकता है और कुछ सेकंड तक पकड़े रख सकता है।

इतना भी काफी है।

उसे वस्तु को हाथ से महसूस करने और मुंह के पास ले जाने दें, बशर्ते वस्तु उम्र के अनुसार सुरक्षित और साफ हो। इस उम्र में चीजों को मुंह से छूना कोई बुरी आदत नहीं है। बच्चा इसी तरह बनावट, आकार और वजन को समझता है।

खेलते समय आप कह सकती हैं:

  • “अरे, तुमने रैटल पकड़ ली।”
  • “यह थोड़ा उभरा-उभरा महसूस हो रहा है।”
  • “सुनो, कितनी हल्की आवाज आई।”
  • “वाह, कितनी मजबूती से पकड़ा है!”

शुरू में बच्चे से ऐसे बातें करना थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन करते रहें। आपकी आवाज, चेहरे के भाव और बार-बार सुनाई देने वाले शब्द, सभी बच्चे के सीखने का हिस्सा हैं।

3. आवाज ढूंढने का छोटा खेल खेलें

बच्चे अब आवाजों की दिशा को लेकर ज्यादा सजग होने लगते हैं, भले ही हर बार आवाज का स्रोत ढूंढ न पाएं। यह खेल सुनने की क्षमता और ध्यान लगाने की आदत को हल्के-फुल्के ढंग से बढ़ाता है।

कैसे खेलें

हल्की आवाज करने वाली रैटल, धीमी धुन वाला म्यूजिक टॉय या छोटी घंटी वाला सुरक्षित खिलौना लें। उसे बच्चे के पास, लेकिन कान से दूर और एक तरफ रखें। चाहें तो उसे पतले मलमल के कपड़े से ढक दें।

अब रैटल को धीरे से हिलाएं या खिलौने से हल्की आवाज आने दें।

ध्यान दें कि बच्चा आंखें उस ओर घुमाता है, पल भर को शांत होता है, आंखें बड़ी करता है या सिर मोड़ने की कोशिश करता है। हर बार ऐसा होना जरूरी नहीं है। यह बिल्कुल सामान्य है।

आप कह सकती हैं, “यह आवाज कहां से आ रही है?” या “सुनो, तुम्हें घंटी सुनाई दे रही है?” फिर कपड़ा हटाकर बच्चे को खिलौना दिखाएं।

यह संवेदी खेल नवजात के लिए अच्छा विकल्प है, क्योंकि इसमें आवाज, देखने और इंतजार करने का अनुभव एक साथ मिलता है। बस ध्यान रखें कि आवाज बहुत तेज, कर्कश या बच्चे के कान के बिल्कुल पास न हो।

4. पेट के बल खेलने को थोड़ा आसान बनाएं

सात सप्ताह में टमी टाइम हर बच्चे को पसंद आए, यह जरूरी नहीं। कुछ बच्चे पेट के बल लेटकर सिर उठाने की कोशिश करते हैं, जबकि कुछ 20 सेकंड में ही जोरदार विरोध दर्ज करा देते हैं। दोनों बातें सामान्य हैं।

लंबे एक सत्र के बजाय दिन में कई बार छोटे-छोटे सत्र अधिक कारगर रहते हैं।

कैसे खेलें

फर्श पर चादर या प्ले-मैट बिछाएं। बच्चे को पेट के बल लिटाकर उसके सीने के नीचे एक छोटा, सख्त तकिया या कसकर लपेटा हुआ तौलिया सहारे के लिए रख सकते हैं। बच्चे का चेहरा और नाक हमेशा खुली रहनी चाहिए, और आप उसके बिल्कुल पास रहें।

उसकी आंखों के स्तर पर काले-सफेद कार्ड, रंगीन खिलौना या कोई चमकीली वस्तु रखें। खुद भी सामने फर्श पर आ जाएं। इस उम्र में आपके चेहरे से रोचक चीज शायद ही कोई हो।

आप प्यार से कह सकती हैं:

  • “हेलो, मैं यहां हूं।”
  • “जरा सिर उठाकर मुझे देखो।”
  • “वाह, तुमने सिर उठाया!”
  • “चलो, पीली बत्तख को देखते हैं।”

सहारे के साथ किया गया टमी टाइम बच्चे को थोड़ा आरामदायक लग सकता है। ऊपर देखने की कोशिश से गर्दन, कंधों और शरीर के ऊपरी हिस्से की मांसपेशियां धीरे-धीरे मजबूत होती हैं।

दिन में कई बार कुछ मिनट बहुत अच्छे हैं। किसी मुश्किल दिन में एक मिनट भी मायने रखता है।

5. हल्का-फुल्का हवाई जहाज खेल आजमाएं

यह खेल उस बच्चे के लिए है जो जागा हुआ, शांत हो और हल्की हरकत पसंद करता हो। इसमें आंखों का संपर्क भी बना रहता है और घर का माहौल हंसी से भर सकता है।

कैसे खेलें

पीठ के बल लेटें और घुटने मोड़ लें। बच्चे को अपने मुड़े हुए पैरों पर पेट के बल बहुत सुरक्षित तरीके से टिकाएं। दोनों हाथों से उसके धड़ को संभाले रखें और सिर व गर्दन को पूरा सहारा दें।

बहुत हल्की “शूंऽऽ” या “भूंऽऽ” जैसी आवाज निकालें। पैरों को बहुत कम और धीरे-धीरे हिलाएं। झटकेदार या तेज हरकत बिल्कुल न करें।

“हम सोफे के ऊपर उड़ रहे हैं!” “अब मम्मी की गोद में लैंडिंग!” “शूंऽऽ, मेरा नन्हा हवाई जहाज!”

यह खेल बच्चे को शरीर की स्थिति का एहसास देता है और वह अपने बढ़ते हुए कोर मसल्स का इस्तेमाल करता है। दूध पिलाने के तुरंत बाद यह खेल न करें। उल्टी या दूध निकलना मजे का हिस्सा नहीं है।

अगर बच्चा बेचैन हो, अभी-अभी दूध पिया हो या पेट के बल रहना पसंद न करता हो, तो इस खेल को छोड़ दें। कुछ बच्चे इसे बहुत पसंद करते हैं, कुछ बच्चे अपनी नाराजगी बहुत साफ बता देते हैं।

6. अलग-अलग बनावटों को महसूस कराएं

बनावट से खेल कराने के लिए किसी खास किट, सेंसेरी बिन या सजावटी सेटअप की जरूरत नहीं होती। सात सप्ताह के बच्चे के लिए कुछ सुरक्षित कपड़ों का अनुभव ही बहुत रोचक होता है।

कैसे खेलें

जब बच्चा जागा और शांत हो, तो अलग-अलग मुलायम सामग्री को उसके हाथ, पैर या बांह पर बहुत हल्के से छुआएं। यदि बच्चा रुचि दिखाए, तो उसे वस्तु को हाथ से छूने दें।

आप इस्तेमाल कर सकती हैं:

  • चिकना साटन या सिल्क का छोटा टुकड़ा
  • मुलायम टेरी कपड़ा
  • वेलवेट का कपड़ा
  • सूती मलमल का कपड़ा
  • बच्चों के लिए बना सुरक्षित क्रिंकल टॉय

बोलते हुए अनुभव को शब्द दें, “यह बहुत मुलायम है।” “सुनो, इस कपड़े से चर्र-चर्र की आवाज आती है।” “यह वाला कपड़ा चिकना लग रहा है।” फिर रुककर बच्चे की प्रतिक्रिया देखें।

ऐसे संवेदी खेल नवजात को स्पर्श, आवाज और आसपास की चीजों को समझने में मदद करते हैं। इससे आपको भी पता चलता है कि बच्चे को क्या अच्छा लगता है। किसी को क्रिंकल वाला कपड़ा बेहद दिलचस्प लग सकता है, तो किसी को बस मुलायम मलमल का शांत स्पर्श।

कूइंग और बातचीत को कैसे बढ़ावा दें

सोच रही हैं कि शिशु कूइंग 7 सप्ताह में कैसे बढ़े? इसके लिए किसी खास भाषा क्लास की जरूरत नहीं है। बस बच्चे की छोटी-छोटी आवाजों को ध्यान से सुनें और जवाब दें।

जब बच्चा “ऊऊ” या “आआ” जैसी आवाज निकाले, तो ठहरें, मुस्कुराएं और उससे बात करें। कभी-कभी उसी आवाज को दोहराएं, फिर कुछ पल रुकें। यह आगे-पीछे का आदान-प्रदान बातचीत की शुरुआती लय सिखाता है।

आप कह सकती हैं, “अच्छा, तुमने ऊऊ कहा? और बताओ।” पहली बार में आपको यह थोड़ा मजाकिया लग सकता है। लेकिन जब बच्चा फिर से आवाज निकालकर जवाब देगा, तो वह पल बहुत खास लगेगा।

लोरी गाएं, डायपर बदलते समय बताएं कि आप क्या कर रही हैं, और अपनी सामान्य, सुकून भरी आवाज में बात करें। लगातार बोलते रहना जरूरी नहीं। बच्चे को गर्मजोशी भरे ध्यान के छोटे-छोटे पल चाहिए।

हर खेल के दौरान सुरक्षा का ध्यान रखें

नवजात के लिए खेल हमेशा हल्के, उम्र के अनुकूल और किसी बड़े की निगरानी में होने चाहिए। घर पर सुरक्षित खेल नवजात घर पर कराने के लिए ये बातें याद रखें:

  • हर गतिविधि में बच्चे के पास रहें, खासकर टमी टाइम और तकिये के सहारे वाले खेल में।
  • खिलौनों में ढीले हिस्से, उधड़ी सिलाई, टूटा प्लास्टिक या उखड़ा रंग नियमित रूप से जांचें।
  • ऐसी कोई वस्तु न दें जो पूरी की पूरी बच्चे के मुंह में जा सके।
  • रिबन, डोरी, प्लास्टिक बैग और ढीले कंबल खेलने की जगह से दूर रखें।
  • बच्चा रोने लगे, थका दिखे, बहुत उत्तेजित हो जाए या बार-बार चेहरा फेर ले, तो खेल रोक दें।
  • जागते समय टमी टाइम कराया जा सकता है, लेकिन सुलाते समय बच्चे को हमेशा पीठ के बल ही लिटाएं।

नवजात के लिए खिलौने सुझाव चुनते समय महंगे या बहुत अधिक फीचर वाले खिलौनों के पीछे भागने की जरूरत नहीं है। 7 सप्ताह के बच्चे के लिए सबसे प्यारे पल अक्सर बेहद साधारण होते हैं, जैसे लाल गेंद को आंखों से देखना, पहली बार रैटल थामना या आपकी आवाज के जवाब में हल्की कूइंग करना।

यही बच्चे के लिए सरल खेल 7 हफ्ते का असली मतलब है। पास रहें, बच्चे की प्रतिक्रिया देखें और साथ में छोटे-छोटे पल खुशी से जिएं।


यह सामग्री केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और इसका उपयोग आपके डॉक्टर, बाल रोग विशेषज्ञ या अन्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर की सलाह के विकल्प के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। यदि आपके कोई प्रश्न या चिंताएँ हैं, तो आपको स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।
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Erby — नवजात शिशुओं और स्तनपान कराने वाली माँओं के लिए बेबी ट्रैकर

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