बच्चा स्तनपान से इनकार करे: कारण, संकेत और आसान समाधान

बच्चा स्तनपान से इनकार करे - कारण, लक्षण व उपाय

जब बच्चा अचानक रोने लगे, स्तन से हट जाए, पीठ मोड़ ले या स्तनपान से साफ इनकार कर दे, तो माँ को चिंता और दुख होना स्वाभाविक है। मन में सवाल आता है, “कल तक तो बच्चा ठीक से पी रहा था, आज क्या हो गया?” पहले गहरी साँस लें। स्तन अस्वीकृति या ब्रेस्ट रिफ़्यूज़ल काफी आम है और अधिकतर मामलों में यह कुछ समय की बात होती है। इसका यह मतलब नहीं कि आपका बच्चा हमेशा के लिए स्तनपान छोड़ चुका है या आपसे कोई गलती हुई है।

बच्चा फीडिंग के समय चिड़चिड़ा क्यों होता है, इसके कई कारण हो सकते हैं। दूध बहुत तेज आ रहा हो, बहुत धीरे उतर रहा हो, बोतल की आदत पड़ गई हो या कान में दर्द हो रहा हो। पैटर्न पर ध्यान देना मददगार रहता है। क्या बच्चा फीड की शुरुआत में रोता है? सिर्फ एक स्तन पर परेशानी होती है? बोतल देने के बाद स्तन नहीं लेता? घर में शोर-शराबे या मेहमानों के बीच ऐसा करता है? इन संकेतों से सही कारण और समाधान तक पहुँचना आसान होता है।

स्तन अस्वीकृति कैसी दिख सकती है

हर बच्चे का स्वभाव अलग होता है, इसलिए बच्चा स्तन से इनकार कर रहा है तो उसके तरीके भी अलग हो सकते हैं। आप देख सकती हैं कि बच्चा:

  • फीडिंग की पोजीशन में लाते ही रोने लगता है या शरीर अकड़ा लेता है
  • थोड़ी देर लैच करता है, फिर बार-बार स्तन छोड़ देता है
  • चेहरा दूसरी ओर घुमा लेता है
  • कुछ सेकंड चूसने के बाद गुस्सा करने लगता है
  • दूध आते ही खाँसता, अटकता या हड़बड़ाता है
  • नींद में या उनींदेपन में अच्छी तरह पीता है, लेकिन जागते समय विरोध करता है
  • बोतल तो ले लेता है, पर स्तन पर लैच नहीं करता

एक-दो मुश्किल फीड का अर्थ हमेशा समस्या नहीं होता। बच्चों के भी कुछ दिन असहज हो सकते हैं। लेकिन यदि बच्चा दूध नहीं पीता या बार-बार स्तनपान से मना करता है, तो संभावित कारणों पर ध्यान देना जरूरी है।

बोतल शुरू होने के बाद फ्लो की पसंद

बोतल शुरू करने के बाद होने वाली आम स्तनपान समस्याएँ और समाधान में से एक है फ्लो प्रेफरेंस, यानी दूध के बहाव की आदत। बोतल से दूध कम मेहनत में मिल सकता है, खासकर जब निप्पल का फ्लो तेज हो या बोतल को सीधा खड़ा करके पिलाया जाए। स्तन पर दूध का बहाव पूरे फीड में एक जैसा नहीं रहता। बच्चे को पहले चूसना, कुछ पल इंतजार करना और फिर दूध उतरने पर पीना होता है।

इसे ऐसे समझें जैसे कोई नल से सीधे तेज पानी पीने का आदी हो और अचानक उसे स्ट्रॉ से पानी पीने को दिया जाए। उसे थोड़ा विरोध तो हो सकता है।

बोतल का तेज फ्लो पसंद करने वाला बच्चा शुरुआत में उत्साह से स्तन पकड़ेगा, लेकिन दूध आने में देर लगे तो नाराज हो सकता है। कभी-कभी शुरुआत का तेज बहाव कम होने पर भी वह स्तन छोड़कर रोने लगता है।

बोतल के बाद स्तनपान कैसे कराएं

बोतल पूरी तरह बंद करना हमेशा जरूरी नहीं होता। कोशिश यह होनी चाहिए कि बोतल से पीने का अनुभव स्तनपान से बहुत अलग न लगे।

ये तरीके अपनाकर देखें:

  • बच्चे की उम्र के अनुसार धीमी फ्लो निप्पल चुनें। अलग-अलग कंपनियों के नंबर अलग हो सकते हैं, इसलिए सिर्फ पैक पर लिखे नंबर के बजाय बच्चे के पीने के तरीके को देखें।
  • पेस्ड बॉटल फीडिंग कैसे करें, यह सीखें। बच्चे को थोड़ा सीधा सहारा देकर रखें, बोतल को लगभग क्षैतिज रखें और हर कुछ चुस्कियों के बाद छोटा विराम दें। निप्पल लगातार दूध से भरा नहीं रहना चाहिए।
  • बच्चे को अपनी गति से बोतल खत्म करने दें। जल्दी-जल्दी पूरी बोतल पिलाने का दबाव न डालें।
  • बच्चा बहुत ज्यादा भूखा होकर रोने लगे, उससे पहले स्तन ऑफर करें। बहुत भूखा और गुस्से में बच्चा दूध उतरने का इंतजार नहीं कर पाएगा।
  • बच्चा शांत हो, नींद आने वाली हो या झपकी से अभी उठा हो, तब फीड कराएं। कई बच्चे दिन में स्तन से मना करते हैं, लेकिन उनींदेपन में आराम से पी लेते हैं।

यदि आप स्तनपान के साथ बोतल भी दे रही हैं, काम पर लौट रही हैं या नियमित रूप से दूध निकालती हैं, तो पेस्ड बॉटल फीडिंग विशेष रूप से उपयोगी है। इससे बच्चे को स्तन और बोतल, दोनों पर अपनी भूख के हिसाब से पीने की आदत बनी रहती है।

निप्पल कन्फ्यूजन और चूसने का अलग तरीका

कई लोग इसे निप्पल कन्फ्यूजन कहते हैं, जबकि कुछ स्तनपान सलाहकार इसे फ्लो प्रेफरेंस या ब्रेस्ट-बॉटल प्रेफरेंस कहना बेहतर मानते हैं। नाम कुछ भी हो, कुछ बच्चों के लिए यह वास्तव में परेशानी बन सकता है।

स्तन और बोतल से दूध पीने में मुँह की हरकत अलग होती है। स्तन पर बच्चे को मुँह अच्छी तरह खोलना, गहरा लैच बनाना और जीभ को लय में चलाना पड़ता है। कुछ बोतल निप्पल पर उथला चूसना भी पर्याप्त होता है। जो छोटा बच्चा अभी स्तनपान सीख रहा हो, उसे दोनों तरीकों के बीच बदलना मुश्किल लग सकता है।

अगर आप सोच रही हैं कि निप्पल कन्फ्यूजन कैसे ठीक करें, तो स्तन को बच्चे के लिए शांत, आरामदायक और आसान जगह बनाने पर ध्यान दें।

बच्चे को फिर से स्तन पर लाने के कोमल तरीके

  • शुरुआती हफ्तों में, जब स्तनपान स्थापित हो रहा हो, जरूरत न हो तो बोतल का उपयोग सीमित रखें। यदि डॉक्टर ने ऊपर से दूध देने की सलाह दी है, तो बाल रोग विशेषज्ञ, एएनएम, आशा कार्यकर्ता या स्तनपान सलाहकार से सही तरीका पूछें।
  • जब भी बोतल देनी पड़े, धीमी फ्लो निप्पल और पेस्ड बॉटल फीडिंग अपनाएं।
  • बच्चे को खूब स्किन-टू-स्किन समय दें। केवल डायपर पहने बच्चे को अपनी खुली छाती से लगाकर आराम से बैठें या लेटें। जरूरत हो तो हल्की चादर ओढ़ा सकती हैं। हर बार फीड कराने का दबाव न रखें।
  • भूख के शुरुआती संकेतों पर स्तन दें, जैसे बच्चा करवट ले, मुँह खोजे, हाथ चूसे या होंठ चलाए। रोना भूख का देर से आने वाला संकेत है।
  • विशेषज्ञ की सलाह से कुछ समय के लिए निप्पल शील्ड कैसे इस्तेमाल करें, यह सीख सकती हैं। कुछ बच्चों को इसका थोड़ा ठोस एहसास बोतल से स्तन की ओर आने में मदद करता है। शील्ड सही आकार की होनी चाहिए और समय-समय पर इसकी जरूरत की समीक्षा भी होनी चाहिए, वरना दूध का ट्रांसफर कम हो सकता है।
  • लैच कराने से पहले निप्पल या निप्पल शील्ड पर अपने दूध की कुछ बूंदें लगा दें। दूध का स्वाद हिचकते बच्चे को स्तन लेने के लिए प्रेरित कर सकता है।

बोतल से स्तन पर वापसी कैसे करें, इसमें कुछ दिन या कभी-कभी अधिक समय लग सकता है। माहौल हल्का और बिना दबाव वाला रखें। रोते हुए बच्चे को जबरदस्ती स्तन पर लगाने से उसका विरोध बढ़ सकता है।

दर्द या असहजता फीडिंग को मुश्किल बना सकती है

कभी-कभी बच्चा स्तनपान से मना करके यही संकेत देता है कि उसे दर्द हो रहा है।

कान का संक्रमण

कान में संक्रमण होने पर चूसने और निगलने से कान के अंदर दबाव बढ़ सकता है, जिससे दर्द होता है। बच्चा एक स्तन पर ज्यादा रो सकता है क्योंकि उस करवट लेटने में तकलीफ होती है। वह कान छूता रहे, असामान्य रूप से बेचैन दिखे या बुखार हो सकता है। दांत निकलते समय भी बच्चे कान खींचते हैं, इसलिए हर बार इसका मतलब संक्रमण नहीं होता। फिर भी, बीमारी के लक्षणों के साथ अचानक फीडिंग बदल जाए तो डॉक्टर को दिखाएं।

डॉक्टर को दिखाने तक बच्चे को थोड़ा सीधा रखकर फीड कराने की कोशिश करें। चिंता हो तो बाल रोग विशेषज्ञ, नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल से संपर्क करें।

दांत निकलना

दांत निकलने का समय हर बच्चे में अलग होता है, हालांकि अक्सर यह कुछ महीनों बाद शुरू होता है। मसूड़ों में दर्द हो तो लैच करना असहज लग सकता है और बच्चा काटने या स्तन छोड़ने लगेगा। फीड से पहले ठंडी टीथिंग रिंग देने से आराम मिल सकता है। दर्द की दवा देने से पहले बच्चे की उम्र और वजन के अनुसार बाल रोग विशेषज्ञ या फार्मासिस्ट की सलाह लें।

मुंह में थ्रश

थ्रश, यानी फंगल संक्रमण, से बच्चे के मुंह में दर्द हो सकता है। जीभ, गालों के अंदर या मसूड़ों पर मलाई जैसे सफेद धब्बे दिखें, जो आसानी से न हटें, तो यह थ्रश हो सकता है। माँ के निप्पल भी चमकीले, खुजली वाले, दर्दनाक या फीड के बाद जलन वाले लग सकते हैं।

संक्रमण बार-बार एक-दूसरे को न लगे, इसके लिए माँ और बच्चे दोनों का इलाज जरूरी हो सकता है। खुद से दवा शुरू करने के बजाय डॉक्टर या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लें।

रिफ्लक्स

रिफ्लक्स वाले बच्चे शुरू में उत्साह से दूध पीते हैं, फिर पीठ मोड़ते हैं, चेहरा बनाते हैं, खाँसते हैं, स्तन छोड़ देते हैं या रोने लगते हैं। बार-बार दूध मुंह में आना, हिचकी और सीधा न लेट पाने की बेचैनी भी संकेत हो सकते हैं। छोटे बच्चों में थोड़ा रिफ्लक्स सामान्य है, लेकिन दर्द, वजन न बढ़ना, हरे रंग की उल्टी, उल्टी या मल में खून, या लगातार बहुत ज्यादा रोना हो तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

ऐसी स्थिति में बच्चे को जोर देकर फीड कराना समाधान नहीं है। पहले असली कारण का इलाज कराएं। दर्द कम होने पर कई बच्चे जल्दी ही फिर से स्तनपान करने लगते हैं।

बहुत ज्यादा दूध और तेज लेट-डाउन

हर बार स्तन अस्वीकृति का कारण दूध की कमी नहीं होता। कभी दूध बहुत ज्यादा और बहुत तेजी से आने लगता है।

यदि लेट-डाउन तेज है, तो दूध की धार निकल सकती है, बच्चा तेजी से निगलने लगेगा, खाँसेगा या मुंह से दूध बहाते हुए स्तन छोड़ देगा। धीरे-धीरे उसे फीडिंग की शुरुआत का यह तेज बहाव डरावना लग सकता है।

दूध का बहाव थोड़ा धीमा करें

फीडिंग पोजीशन बदलने से काफी फर्क पड़ सकता है:

  • लेड-बैक नर्सिंग आजमाएं। आराम से पीछे टिककर बैठें या लेटें और बच्चे को अपने सीने पर पेट के बल रखें। इस स्थिति में गुरुत्वाकर्षण दूध के बहाव को कुछ धीमा करता है।
  • यदि स्तन बहुत भरे हुए लगें, तो लैच कराने से पहले हाथ से थोड़ा दूध निकाल लें। उसे साफ कटोरी या मलमल के कपड़े में ले सकती हैं।
  • बच्चा तेजी से निगलने लगे तो बीच में रोककर डकार दिलाएं।
  • यदि आप सहज हों और बच्चे का वजन ठीक बढ़ रहा हो, तो एक फीड में एक ही स्तन दें।

कुछ मामलों में दूध की अधिकता कम करने के लिए एक तय समय तक केवल एक स्तन से फीड कराने, जिसे ब्लॉक फीडिंग कहते हैं, की सलाह दी जाती है। यह मदद कर सकता है, लेकिन स्तनपान सलाहकार या डॉक्टर की निगरानी में ही करें। ज्यादा करने पर दूध कम हो सकता है या दूध की नलियां ब्लॉक होने की समस्या हो सकती है।

दूध कम होना या लेट-डाउन धीमा होना

दूसरी ओर, बच्चा दूध आने का इंतजार करते-करते अधीर हो सकता है। वह लैच करता है, कुछ बार चूसता है और फिर रोने लगता है। यह व्यक्तिगत अस्वीकृति नहीं है।

थकान, तनाव, दर्द या घर में बड़े बच्चे की आवाजाही के बीच फीड कराना, ये सब लेट-डाउन धीमा कर सकते हैं। दूध उतरने से जुड़े हार्मोन माहौल और मनोदशा से प्रभावित होते हैं।

दूध जल्दी उतरने में मदद करें

  • फीड के दौरान ब्रेस्ट कंप्रेशन करें। बच्चा चूस रहा हो लेकिन निगलने की आवाज कम हो, तो स्तन को हल्के से दबाएं ताकि दूध का बहाव बढ़े।
  • फीड से पहले और दौरान स्तन की हल्की मालिश करें।
  • यदि बच्चा बहुत अधीर है, तो स्तन देने से पहले एक-दो मिनट हाथ से दूध निकाल लें या पंप कर लें।
  • लैच की जांच करें। उथला लैच होने पर दूध पर्याप्त होने के बावजूद बच्चा ठीक से दूध नहीं निकाल पाता।
  • बच्चे के संकेतों के अनुसार बार-बार स्तनपान कराएं। जितनी बार दूध निकलता है, शरीर को उतना ही दूध बनाने का संदेश मिलता है।

दूध कम होने की चिंता में सिर्फ स्तन का मुलायम लगना पर्याप्त संकेत नहीं है। गीले डायपर, बच्चे का वजन बढ़ना और फीड के दौरान निगलने की आवाज पर ध्यान दें। स्वास्थ्य केंद्र में वजन जांच कराई जा सकती है और स्तनपान विशेषज्ञ एक पूरी फीड देखकर समस्या समझने में मदद कर सकते हैं।

लगभग 6 से 8 सप्ताह में ध्यान भटकना

करीब 6 से 8 सप्ताह की उम्र में कई बच्चों को अचानक अपने आसपास की दुनिया बहुत रोचक लगने लगती है। दरवाजे की आवाज, पंखे की हलचल, टीवी की ध्वनि या खिड़की से आती रोशनी, सबका ध्यान खींचने लगता है।

विकास के इस दौर में बच्चा दिन के समय फीडिंग में चिड़चिड़ा हो सकता है। वह हर आवाज पर सिर घुमाता है, बार-बार स्तन पकड़ता और छोड़ता है, मानो उसे पीने की फुर्सत ही नहीं। लेकिन रात में शांत माहौल में वह अच्छी तरह स्तनपान कर सकता है।

ये उपाय मदद कर सकते हैं:

  • हल्की रोशनी वाले शांत कमरे में फीड कराएं
  • टीवी बंद रखें और फोन एक ओर रख दें
  • घर में बहुत शोर हो तो हल्की व्हाइट नॉइज़ का उपयोग करें
  • लंबे फीड की जगह थोड़ी-थोड़ी देर में अधिक बार स्तन दें
  • यदि सुरक्षित और आरामदायक हो, तो स्लिंग या कैरियर में स्तनपान कराएं
  • झपकी से पहले, झपकी के बाद और रात में होने वाली उनींदी फीड का लाभ लें

ध्यान भटकना परेशान करने वाला हो सकता है, लेकिन आमतौर पर यह एक अस्थायी चरण है, स्तनपान खत्म होने का संकेत नहीं।

नर्सिंग स्ट्राइक और वी닝 में अंतर

अचानक स्तनपान से मना करने को अक्सर नर्सिंग स्ट्राइक कहा जाता है। यह बीमारी, दांत निकलने, दिनचर्या बदलने, फीड के दौरान तेज आवाज से डर जाने, बोतल बदलने, माँ के नए परफ्यूम या बिना किसी स्पष्ट वजह के भी हो सकता है।

नर्सिंग स्ट्राइक और बच्चे का खुद स्तनपान छोड़ना एक जैसी बात नहीं हैं। वी닝 आमतौर पर धीरे-धीरे होती है, जब बड़ा बच्चा या टॉडलर भोजन और दूसरे पेय बढ़ने के साथ स्तनपान कम करता है। छोटा बच्चा जो अचानक स्तन से मना करे, वह लगभग कभी भी वास्तव में स्तनपान छोड़ने के लिए तैयार नहीं होता।

स्ट्राइक के दौरान:

  1. स्तन ऑफर करती रहें, लेकिन जोर न डालें। रोते बच्चे को पहले गोद, थपकी या शांत माहौल की जरूरत हो सकती है।
  2. बच्चे को उनींदे समय में, नहलाते समय, प्यार से गले लगाने के बाद या धीरे-धीरे टहलते हुए स्तन दें।
  3. खूब स्किन-टू-स्किन संपर्क रखें। हर बार गले लगाना फीड में बदले, यह जरूरी नहीं।
  4. दूध की सप्लाई बनाए रखने और स्तनों में भारीपन से बचने के लिए नियमित रूप से हाथ से दूध निकालें या पंप करें।
  5. जरूरत हो तो निकाला हुआ दूध बोतल से दें, लेकिन धीमी फ्लो निप्पल और पेस्ड फीडिंग का ध्यान रखें।
  6. यदि बच्चा एक दिन से अधिक समय तक स्तन नहीं ले रहा है, तो जल्द विशेषज्ञ की मदद लें।

अधिकतर नर्सिंग स्ट्राइक गुजर जाती हैं। कभी-कभी सफलता रात के शांत समय में मिलती है, जब बच्चा आधा सोया हो और किसी पर कोई दबाव न हो।

कब मदद लें

यदि आपका बच्चा लगातार 24 घंटे से अधिक समय तक स्तन नहीं ले रहा, सामान्य से कम गीले डायपर हो रहे हैं, वजन ठीक से नहीं बढ़ रहा है या आपको दूध की सप्लाई की चिंता है, तो बाल रोग विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, एएनएम, आशा कार्यकर्ता, सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या स्तनपान सलाहकार से संपर्क करें।

यदि बहुत छोटे शिशु को बुखार हो, बच्चा असामान्य रूप से सुस्त लगे, सांस लेने में परेशानी हो, शरीर में पानी की कमी के संकेत दिखें, बार-बार उल्टी हो, हरे रंग की उल्टी आए या बच्चे को जगाना मुश्किल हो, तो तुरंत चिकित्सा सलाह लें। भारत में आप नजदीकी अस्पताल जाएं या आपात स्थिति में 112 अथवा स्थानीय एम्बुलेंस सेवा 108 पर संपर्क करें।

ब्रेस्ट रिफ़्यूज़ल बहुत बड़ा झटका लग सकता है, लेकिन अधिकतर बार यह स्तनपान की यात्रा का छोटा-सा पड़ाव होता है, अंत नहीं। बच्चे के संकेत देखें, अपनी दूध की सप्लाई बनाए रखें, दबाव कम करें और समय रहते मदद लें। आपको यह सब अकेले संभालने की जरूरत नहीं है।


यह सामग्री केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और इसका उपयोग आपके डॉक्टर, बाल रोग विशेषज्ञ या अन्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर की सलाह के विकल्प के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। यदि आपके कोई प्रश्न या चिंताएँ हैं, तो आपको स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।
हम, Erby ऐप के डेवलपर्स, इस जानकारी के आधार पर आपके द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं लेते हैं, जो केवल सामान्य सूचना के उद्देश्यों के लिए प्रदान की गई है और व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।

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