दो महीने के शिशु के लिए आसान और सुरक्षित खेल: टमी टाइम, पकड़ने का अभ्यास, इंद्रिय और सामाजिक विकास के सुझाव
दो महीने की उम्र में आपका शिशु किसी बड़े बच्चे की तरह मनोरंजन नहीं ढूंढता। वह अपने आसपास के छोटे-छोटे अनुभवों को महसूस कर रहा होता है - आपकी छाती से लगकर आवाज की कंपन, झुनझुने की हल्की खनक, सामने से गुजरता कोई मुस्कुराता चेहरा। उसके लिए कुछ मिनट का खेल भी बहुत बड़ी बात हो सकता है।
इस उम्र में बच्चे के खेल का मतलब हर जागने वाले समय को भर देना या विकास के पड़ाव जल्दी पूरे करवाना नहीं है। ये बस देखने, सुनने, शरीर हिलाने और आपसे जुड़ने के छोटे अवसर हैं। कुछ दिन आपका नन्हा बच्चा आंखें खोलकर आपको देखेगा, कूं-कूं करेगा और बातचीत के लिए तैयार लगेगा। किसी दिन दूध पीना, गोद में रहना और लोरी सुनना ही काफी होगा। दोनों ही उसके विकास का हिस्सा हैं।
दो महीने में खेल कैसा दिखता है
करीब दो महीने की उम्र में बच्चे अपने आसपास की दुनिया को थोड़ा ज्यादा गौर से देखने लगते हैं। वे आपके चेहरे को ध्यान से देख सकते हैं, परिचित आवाज की ओर सिर घुमा सकते हैं, कूं-कूं जैसी आवाजें निकाल सकते हैं और पेट के बल लेटने पर कुछ क्षण के लिए सिर उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
2 महीने के लिए गतिविधियाँ बहुत सीधी और आसान होती हैं। इनका उद्देश्य है:
- सहारे के साथ हरकत और टमी टाइम से गर्दन, कंधों और ऊपरी शरीर को मजबूत बनाना
- चेहरे, तेज रंगों के अंतर, हलचल और सरल वस्तुओं से बच्चे की दृष्टि विकास में मदद करना
- बात करने, गाने, झुनझुने और घर की सामान्य आवाजों से सुनने की क्षमता को जगाना
- बारी-बारी से प्रतिक्रिया देने वाली बातचीत के जरिए शुरुआती सामाजिक जुड़ाव बढ़ाना
- हाथ, पैर, पेट और अपनी हरकतों को महसूस करके शरीर की पहचान विकसित करना
इस उम्र में एक साथ बहुत देर तक खेलना जरूरी नहीं है। दिन में अलग-अलग समय पर 2 से 5 मिनट काफी रहते हैं। डायपर बदलते समय हाथों से खेल हो सकता है, नहाने का समय स्पर्श वाला खेल बन सकता है, और दूध पिलाने के बाद की गोद में छोटी-सी बातचीत हो सकती है।
महंगे खिलौनों या किसी तय पाठ्यक्रम की जरूरत नहीं है। सच तो यह है कि इस समय आपका चेहरा ही बच्चे का सबसे पसंदीदा खिलौना होता है।
दो महीने के बच्चे के लिए शरीर की हरकत वाले खेल
टमी टाइम के अलग तरीके
इस उम्र में टमी टाइम सबसे उपयोगी बच्चे की गतिविधियों में से एक है। इससे वे मांसपेशियां मजबूत होती हैं जिनकी जरूरत बच्चे को सिर संभालने, पलटने, बैठने, रेंगने और आगे चलकर खड़े होने में पड़ेगी। फिलहाल लक्ष्य बस इतना है कि बच्चा कुछ देर पेट के बल लेटने में सहज महसूस करे।
जागते समय और आपकी निगरानी में, दिनभर में कुल 30 मिनट या उससे अधिक टमी टाइम का लक्ष्य रखा जा सकता है। यह पूरा समय एक बार में नहीं करना है। डायपर बदलने के बाद 3 मिनट, आपकी छाती पर 5 मिनट, फर्श पर कुछ मिनट - ऐसे छोटे सत्र जुड़ते जाते हैं।
टमी टाइम कैसे कराएं, इसके लिए ये तरीके आजमा सकती हैं:
- आपकी छाती पर टमी टाइम: सोफे या बिस्तर पर थोड़ा पीछे टिककर बैठें और बच्चे को अपनी छाती पर पेट के बल लिटाएं। उससे बात करें या धीरे-धीरे गुनगुनाएं। आपको देखने के लिए वह सिर उठाने की कोशिश करेगा। जो बच्चे फर्श पर टमी टाइम पसंद नहीं करते, उनके लिए यह शुरुआत का अच्छा तरीका है।
- फर्श पर टमी टाइम: फर्श पर मोटी चटाई या तह किया हुआ कंबल बिछाएं। बच्चे के पास लेट जाएं और अपना चेहरा उसके चेहरे के करीब रखें। सामने काले-सफेद रंग का कार्ड भी रख सकती हैं। बहुत कुछ एक साथ दिखाने की जरूरत नहीं है।
- फीडिंग पिलो पर टमी टाइम: बच्चे को मजबूत फीडिंग पिलो पर पेट के बल इस तरह रखें कि उसकी बांहें आराम से आगे रहें। हल्की ऊंचाई मिलने से सिर उठाना आसान हो सकता है। इस दौरान बच्चे के बिल्कुल पास रहें।
- एक्सरसाइज बॉल पर टमी टाइम: बच्चे की कमर और पेट को दोनों हाथों से अच्छी तरह थामकर उसे बड़ी एक्सरसाइज बॉल पर पेट के बल टिकाएं। बॉल को बस बहुत हल्का आगे-पीछे करें। यह गतिविधि तभी करें जब पकड़ पूरी तरह मजबूत हो और आपका ध्यान सिर्फ बच्चे पर हो।
यदि बच्चा रोने लगे या बहुत परेशान दिखे तो उसे उठा लें। थोड़ा आराम करके बाद में फिर कोशिश करें। आज जो बच्चा 30 सेकंड भी नहीं टिकता, वह अगले सप्ताह 2 मिनट तक आराम से रह सकता है। शिशु गर्दन मजबूत कैसे करें, इसका जवाब अक्सर यही छोटे-छोटे, नियमित प्रयास होते हैं।
बच्चे को खिलौने तक हाथ बढ़ाने का अभ्यास
दो महीने की उम्र में अधिकतर बच्चे जानबूझकर खिलौना पकड़ नहीं पाते। उनके हाथ-पैर की हरकतें अभी झटकेदार और अनजाने में होती हैं। लेकिन वे यह समझना शुरू कर रहे होते हैं कि बांहों के आखिर में हिलने वाली ये चीजें शायद उनके अपने हाथ हैं।
खिलौना पकड़ने का अभ्यास कराने के लिए बच्चे को पीठ के बल लिटाएं और उसके हाथ की पहुंच के पास हल्का खिलौना रखें। मुलायम झुनझुना, खड़खड़ाहट वाला कपड़े का खिलौना या तेज रंगों के अंतर वाला लटकता खिलौना ठीक रहता है। खिलौना इतना पास हो कि हाथ लहराने पर वह उससे छू जाए।
शुरू में वह संयोग से खिलौने को थपथपा सकता है। फिर दोबारा ऐसा होगा। यही वह छोटा-सा अनुभव है जिसमें बच्चा समझने लगता है, “मैं हाथ हिलाता हूं तो कुछ होता है।”
खिलौने को बच्चे की कलाई, टखने या पालने से न बांधें। उसे अपने हाथ में रखें या सुरक्षित तरीके से लगे खिलौनों वाला आयु के अनुकूल प्ले जिम इस्तेमाल करें।
हाथों से खेलना और मुंह से टटोलना
अब बच्चे के अपने हाथ भी उसके लिए दिलचस्प होते जा रहे हैं। जब वह शांत और जाग रहा हो, तो उसकी हथेली में छोटा और हल्का खिलौना रखें। वह उसे पल भर के लिए पकड़ सकता है और फिर अनजाने में छोड़ भी सकता है। यह बिल्कुल सामान्य है।
मुलायम कपड़े का छोटा टुकड़ा, छोटे शिशुओं के लिए बना टेक्सचर वाला टीथर या छेदों वाली हल्की गेंद अच्छे विकल्प हैं। बच्चा इन्हें मुंह तक भी ले जा सकता है। इसे गलत आदत या दांत निकलने का पक्का संकेत न मानें। मुंह से चीजों को छूकर समझना शिशु के सीखने का स्वाभाविक तरीका है।
खिलौने साफ रखें, इतने बड़े हों कि बच्चा उन्हें निगल न सके और उनमें कोई ढीला हिस्सा न हो। लंबे धागे, बटन, मोती या अलग हो सकने वाली सजावट वाले खिलौने न दें।
शिशु के सोचने-समझने के लिए खेल के विचार
कारण और परिणाम का परिचय
कारण और परिणाम की समझ बहुत छोटी खोजों से शुरू होती है। झुनझुना हिलता है तो आवाज आती है। हाथ हिलता है तो घंटी बजती है। पैर मारने से प्ले जिम का खिलौना हिलता है।
एक मुलायम झुनझुना बच्चे की आंखों और कानों के सामने धीरे से हिलाएं। फिर रुकें। दोबारा हिलाएं। उसे देखने, पलक झपकाने या हाथ-पैर चलाने का समय दें। यहां बच्चे की परीक्षा नहीं हो रही, आप बस उसे एक सरल पैटर्न दिखा रही हैं।
जागते समय और पूरी निगरानी में कलाई पर हल्की घंटी वाला बैंड भी इस्तेमाल किया जा सकता है। जब बच्चा हाथ हिलाएगा तो उसे हल्की आवाज सुनाई देगी। खेल छोटा रखें और बाद में बैंड हटा दें। बच्चे के कानों के पास तेज आवाज वाले खिलौनों की जरूरत नहीं होती।
ये 2 महीने के शिशु के खेल नवजात के लिए भी अपनाए जा सकते हैं, हालांकि दो महीने का बच्चा उनमें पहले के मुकाबले अधिक रुचि दिखा सकता है।
चीजों को आंखों से ट्रैक करने का खेल
कई बच्चे इस उम्र तक किसी चेहरे या वस्तु को दाएं-बाएं जाते हुए आंखों से देख पाते हैं, खासकर जब वह चेहरे से लगभग 20 से 30 सेंटीमीटर की दूरी पर हो। शुरुआत धीरे-धीरे करें। काले-सफेद रंग का कार्ड, आपका चेहरा या कोई चमकीला खिलौना, सब काम आ सकते हैं।
जब बच्चा दाएं-बाएं देखने में सहज लगे, तो खेल में थोड़ा बदलाव करें:
- वस्तु को एक ओर से दूसरी ओर हल्के घुमाव में ले जाएं।
- खिलौने को बहुत धीरे से गोलाई में घुमाएं।
- उसे थोड़ा ऊपर-नीचे करें।
- खिलौने को 1 या 2 सेकंड के लिए अपनी पीठ के पीछे छिपाएं और फिर मुस्कुराकर “लो, आ गया!” कहें।
खिलौने का पल भर के लिए गायब होना बच्चे को बहुत रोचक लग सकता है। खेल को छोटा ही रखें। इस उम्र में लंबे समय तक छुपन-छुपाई खेलना मजेदार होने के बजाय बच्चे को उलझा सकता है।
घर में जगह बदलकर दिखाएं
बच्चे को व्यस्त रखने के लिए हर समय नई गतिविधियों की सूची नहीं चाहिए। घर के अलग-अलग हिस्से भी उसके लिए नए अनुभव हैं। उसे गोद में लेकर रसोई में जाएं और बताते जाएं, “मैं केतली में पानी भर रही हूं। पानी की आवाज सुनाई दे रही है?” खिड़की के पास बैठकर पत्तों को हिलते देखें। उसे लैंप, किताबों की अलमारी, पर्दों के डिजाइन या परिवार की तस्वीरें देखने दें।
किसी दूसरे कमरे में कुछ मिनट बिताने से उसे नई आकृतियां, रोशनी, छाया और आवाजें मिलती हैं। बच्चे की दृष्टि विकास के लिए इतना ही काफी है। चमकती स्क्रीन की कोई जरूरत नहीं।
शिशु के लिए इंद्रियों से जुड़े खेल
घर पर सरल टेक्सचर बोर्ड बनाएं
घर में बना टेक्सचर बोर्ड एक आसान और कम खर्च वाली गतिविधि है। मजबूत गत्ते के एक टुकड़े पर अलग-अलग कपड़ों के टुकड़े अच्छी तरह चिपकाएं या सिलें। कोई किनारा ढीला न हो और कोई छोटी वस्तु लगी न हो, यह जरूर जांचें।
इन चीजों का इस्तेमाल किया जा सकता है:
- चिकना सूती कपड़ा
- मुलायम फ्लीस
- धारियों वाला कॉरडरॉय कपड़ा
- सपाट तरीके से मजबूती से लगी साटन रिबन
- तौलिये का कपड़ा
- शिशु के खिलौनों में इस्तेमाल होने वाला खड़खड़ाहट वाला कपड़ा
टमी टाइम के दौरान बोर्ड को बच्चे के पास रखें, या पीठ के बल लेटे बच्चे के हाथ को बहुत हल्के से अलग-अलग सतहों पर फिराएं। उसे बताते रहें, “यह बहुत मुलायम है”, “यह थोड़ा उभरा हुआ है।”
इस बोर्ड को पालने में कभी न छोड़ें। हर बार इस्तेमाल से पहले देखें कि कपड़ा या किनारे कहीं से ढीले तो नहीं हो गए हैं।
गुनगुने पानी में पैरों का खेल
पानी से खेलना कई बच्चों को शांत करता है। एक उथले टब या परात में शरीर के तापमान के करीब गुनगुना पानी भरें, लगभग 37°C। बच्चे को मजबूती से पकड़ें ताकि उसके पैर पानी की सतह को छू सकें। उसे हल्के-हल्के पैर चलाने दें।
कुछ बच्चे हैरानी से पानी को देखते रहेंगे, जबकि कुछ का चेहरा ऐसा गंभीर हो सकता है जैसे कोई बहुत बड़ी खोज कर ली हो।
पानी बहुत उथला रखें, बच्चे को एक पल के लिए भी अकेला न छोड़ें और हमेशा हाथ की पहुंच में रहें। बच्चा ठंडा, थका या असहज लगे तो खेल रोक दें। कुछ मिनट पर्याप्त हैं। बाद में उसके पैरों की उंगलियां अच्छी तरह पोंछ दें।
हल्की फूंक वाला खेल
बच्चे के पेट, पैरों या उंगलियों पर बहुत हल्की फूंक मारें। वह हाथ-पैर हिला सकता है, चौंककर देख सकता है या उस एहसास पर प्रतिक्रिया दे सकता है। दो महीने में खिलखिलाहट शायद अभी न आए, लेकिन बच्चा इन नई संवेदनाओं को नोटिस करने लगता है।
खेल के साथ प्यारे शब्द जोड़ें, जैसे “अरे, नन्हे पैर ठंडे हो गए!” या “लो, हवा आई!” आपकी आवाज भी इस खेल का अहम हिस्सा है।
दो महीने के बच्चे के लिए सामाजिक और भाषा के खेल
बातचीत करें, भले ही जवाब अलग तरह से मिले
आमने-सामने की बातचीत 2 महीने का बच्चा के लिए सबसे अच्छे खेलों में से एक है। बच्चे को अपने चेहरे से लगभग 20 से 30 सेंटीमीटर की दूरी पर पकड़ें, जहां वह आपको साफ देख सके। धीरे बोलें, आवाज में अपनापन रखें और चेहरे के भाव थोड़ा स्पष्ट बनाएं।
फिर रुकें।
यह रुकना बहुत जरूरी है। बच्चा कूं-कूं कर सकता है, मुंह खोल सकता है, हाथ हिला सकता है या सिर्फ आपको देखता रह सकता है। उसकी प्रतिक्रिया का जवाब ऐसे दें जैसे उसने बहुत अच्छी बात कही हो, “अच्छा, फिर क्या हुआ?” शुरू में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यहीं से बातचीत में बारी लेने की आदत बनती है।
दूध पीने के बाद, जब बच्चा शांत और चौकन्ना हो, तब यह खेल अच्छा रहता है। अगर वह बार-बार नजर हटाए, जम्हाई ले, रोए या आंखें बंद करे, तो समझें कि फिलहाल उसे आराम चाहिए। यही सामाजिक विकास शिशु की गति के अनुसार होने देता है।
हरकतों के साथ गाने गाएं
गीतों में लय, भाषा, स्पर्श और आंखों का संपर्क, सब एक साथ आते हैं। सुर बिल्कुल सही होना जरूरी नहीं है। आपके बच्चे को आपकी आवाज पसंद है, संगीत प्रतियोगिता नहीं चाहिए।
“मछली जल की रानी है” या कोई सरल लोरी गाते हुए उंगलियों को धीरे-धीरे हिलाएं। उंगलियों को बच्चे की बांह पर बहुत हल्के से चलाएं और हर पंक्ति के बाद थोड़ा ठहरें। कपड़े पहनाते समय या नहलाते समय भी अपनी तरफ से छोटे गीत बना सकती हैं।
बार-बार सुनाई देने वाली धुन बच्चे को अपनापन देती है। कुछ समय बाद वह परिचित गीत सुनते ही शांत होकर ध्यान से सुनने लग सकता है।
बोर्ड बुक्स साथ में देखें
इस उम्र के लिए मोटे पन्नों वाली बोर्ड बुक्स अच्छी रहती हैं। वे लार, मुड़ने और बच्चे के अचानक पकड़ लेने को भी सह लेती हैं। बड़ी और साफ तस्वीरों, स्पष्ट चेहरों, मोटी आउटलाइन और तेज रंगों वाली किताबें चुनें।
एक बार में एक तस्वीर की ओर इशारा करके कहें, “कुत्ता। बड़ा कुत्ता। भौं-भौं।” पन्ने पर लिखा हर शब्द पढ़ना जरूरी नहीं है। दो महीने की उम्र में किताब पढ़ने का मतलब कहानी समझना नहीं, बल्कि आपकी आवाज सुनना और साथ मिलकर तस्वीरें देखना है।
काले-सफेद जानवरों वाली किताब बच्चे को बहुत बारीक चित्रों से भरी किताब की तुलना में अधिक आकर्षित कर सकती है। आगे चलकर आप चमकीले और रंगीन पन्ने शामिल कर सकती हैं।
दो महीने के बच्चे के लिए सबसे अच्छे खिलौने
खिलौनों से भरा कमरा जरूरी नहीं है। कुछ सुरक्षित और काम के खिलौने अधिकांश बच्चे के खेल के लिए पर्याप्त हैं।
पहले तेज रंगों का अंतर, फिर रंगों की विविधता
काले-सफेद कार्ड छोटे बच्चों के लिए बहुत अच्छे होते हैं क्योंकि उन्हें तेज अंतर वाले रंग आसानी से दिखते हैं। टमी टाइम के समय एक कार्ड सामने रख सकती हैं या बात करते समय उसे अपने चेहरे के पास पकड़ सकती हैं। जैसे-जैसे बच्चे की नजर विकसित हो, लाल, पीले, नीले और हरे जैसे गहरे रंगों वाले कार्ड भी दिखाएं।
छेदों वाली हल्की गेंद
छेदों वाली हल्की गेंद, जिसे अक्सर ओ-बॉल कहा जाता है, नन्हे हाथों के लिए पकड़ना आसान बनाती है। बच्चा उसे लंबे समय तक न पकड़ पाए, फिर भी पकड़ने का अभ्यास शुरू हो जाता है। यह हल्की, धोने में आसान और निगरानी में मुंह से टटोलने के लिए ठीक रहती है।
मुलायम झुनझुना
हल्की और मधुर आवाज वाला मुलायम झुनझुना चुनें। यह कारण-परिणाम समझने, सुनने और हाथ बढ़ाने के अभ्यास में मदद करता है। तेज आवाज या चमकती लाइट वाले इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों की जरूरत नहीं है। साधारण झुनझुना ही काफी है।
खड़खड़ाहट वाला कपड़ा
खड़खड़ाहट वाला कपड़ा एक छोटे खिलौने में आवाज, स्पर्श और हलचल तीनों देता है। बच्चा जब उसे अनजाने में मसलता है तो निकलने वाली आवाज उसे पसंद आ सकती है। ऐसा कपड़ा चुनें जिसके किनारे अच्छी तरह सिले हों।
न टूटने वाला बेबी मिरर
बच्चों को चेहरे देखना अच्छा लगता है, अपना प्रतिबिंब भी। शिशुओं के लिए बना न टूटने वाला शीशा टमी टाइम को रोचक बना सकता है। उसे बच्चे के सामने रखें और देखें कि वह सामने दिख रहे उस दिलचस्प बच्चे को कितनी गौर से देखता है।
एक्टिविटी जिम
साधारण एक्टिविटी जिम बच्चे को लेटने, पैर चलाने, हाथ बढ़ाने और लटकते खिलौनों को देखने की सुरक्षित जगह देता है। ऐसे जिम चुनें जिनमें खिलौने हटाए जा सकें, ताकि बच्चा एक साथ बहुत ज्यादा उत्तेजना से न भरे। दो या तीन दिलचस्प खिलौने आमतौर पर काफी होते हैं।
बच्चे की पसंद के अनुसार खेलने की एक प्यारी याद
दो महीने के बच्चे के लिए सबसे अच्छे खेल हमेशा तस्वीरों में शानदार दिखने वाले खेल नहीं होते। कभी-कभी खिड़की के पास शांत गोद में बैठना ही खेल है। कभी बच्चा छत के पंखे को देख रहा होता है और आप पास में कपड़े तह कर रही होती हैं।
उसके संकेतों को देखें। चौकन्नी नजर, शरीर का ढीला और आरामदायक होना, कूं-कूं की आवाजें और हाथ-पैर हिलाना अक्सर बताते हैं कि बच्चा जुड़ने के लिए तैयार है। बार-बार नजर हटाना, रोना, आंखें मलना या शरीर को अकड़ाना यह कह सकता है कि उसे थोड़ी देर का विराम चाहिए।
खेल छोटा, सुरक्षित और बच्चे की प्रतिक्रिया के अनुसार रखें। टमी टाइम, गाना, हाथ बढ़ाना, पानी में पैर चलाना और आपसे बातें करना जैसे साधारण पल ही उसके बढ़ते शरीर और दिमाग की नींव बनते हैं। आपके लिए भी ये पल उस छोटे इंसान को जानने का सुंदर मौका हैं, जो हर दिन थोड़ा बदल रहा है।
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