पहले कुछ नैपी बदलते समय ज़्यादातर माता-पिता घबरा ही जाते हैं। रंग अजीब, चिपचिपाहट अलग, कभी तेज़ तो कभी बिलकुल न के बराबर गंध - कुछ भी हमें «नॉर्मल» पखाने जैसा नहीं लगता। कई बार तो लगता है कि यह सही है भी या तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए।
यह गाइड नवजात शिशु का पखाना एक-एक स्टेज में समझाता है - बेबी का पहला पखाना (मेकोनियम) से लेकर बाद के वो पोट्टे तक जो नियमित स्तनपान या फॉर्मूला शुरू होने के बाद आते हैं। आप इसे अपने निजी «नवजात मल चार्ट» की तरह सेव करके रख सकते हैं और ज़रूरत पड़ने पर देख सकते हैं।
स्वस्थ नवजात शिशु का मल पहले कुछ दिन और हफ्तों में काफ़ी तेज़ी से बदलता है। ज़्यादातर बच्चों में मोटा-मोटी यह पैटर्न दिखता है:
हर स्टेज में बच्चे का मल रंग, बनावट और गंध के हिसाब से अलग दिखता है।
कब: जन्म से लेकर लगभग 24–48 घंटे तक
कैसा दिखता है:
यह सब पूरी तरह सामान्य है।
मेकोनियम दरअसल गर्भ में रहते समय बच्चे ने जो भी निगला होता है, उसका मिश्रण होता है - एमनियोटिक फ्लूइड, मृत त्वचा की कोशिकाएँ, म्यूकस, पित्त इत्यादि। इसका मतलब कब्ज़ नहीं है और यह अपने आप में कोई बीमारी का संकेत नहीं है।
अक्सर आप देखेंगे कि:
भारत में आम तौर पर डॉक्टर या नर्सें जन्म के पहले 24 घंटों में बेबी का पहला पखाना आने का इंतज़ार करती हैं। अगर इस समय तक आपका बच्चा एक भी बार मेकोनियम पास नहीं करता, तो तुरंत नर्स, डॉक्टर या अस्पताल में बताना चाहिए, क्योंकि कभी-कभी यह आंत में रुकावट या किसी मेडिकल समस्या का संकेत हो सकता है।
कब: आम तौर पर तीसरे–चौथे दिन के बीच (कभी थोड़ा पहले या बाद में भी)
कैसा दिखता है:
ज़्यादातर माता-पिता यह बदलाव देखते ही राहत महसूस करते हैं। नवजात में ट्रांज़िशनल मल आना इस बात का अच्छा संकेत है कि दूध अंदर जा रहा है और मेकोनियम धीरे-धीरे निकल रहा है।
क्यों ज़रूरी है:
अगर आप स्तनपान करा रही हैं और तीसरे दिन भी बच्चे का पखाना पूरा काला, मेकोनियम जैसा ही आ रहा है, तो किसी लेक्टेशन कंसल्टेंट, डॉक्टर या नर्स से latch और दूध ट्रांसफ़र जाँचने को कहें। हो सकता है दूध थोड़ा देर से उतर रहा हो, लेकिन फिर भी चेक करवाना अच्छा रहता है।
शुरुआती कुछ दिन निकल जाने के बाद बच्चे का पखाना इस बात पर काफ़ी निर्भर करता है कि वह क्या पी रहा है। स्तनपान वाले बच्चे का मल और फॉर्मूला पीने वाले बच्चे का मल अक्सर काफ़ी अलग दिखता है।
कब: आम तौर पर पाँचवे दिन से, जब आपका दूध अच्छे से उतर जाता है
आम लुक:
यह क्लासिक «सरसों जैसा» स्तनपान वाला शिशु मल अक्सर पहली बार देखने पर माता-पिता को लगता है कि बच्चे को दस्त है। ज़्यादातर मामलों में यह बिलकुल सामान्य स्तनपान वाला मल होता है।
ध्यान रखने वाली बातें:
क्या नॉर्मल नहीं माना जाता:
नवजात में दस्त कैसे पहचानें, इस पर हम आगे अलग से बात करेंगे।
कब: अगर शुरू से फॉर्मूला दिया जा रहा हो तो पहले दिनों से ही, या जब फॉर्मूला फीडिंग ज़्यादा हो जाए
आम लुक:
फॉर्मूला माँ के दूध से अलग तरह से पचता है, इसलिए फॉर्मूला शिशु मल आम तौर पर:
अगर आप मिक्स फीडिंग कर रही हैं (माँ का दूध + फॉर्मूला), तो बच्चे का मल कभी स्तनपान जैसा, कभी फॉर्मूला जैसा, या दोनों के बीच जैसा दिख सकता है। जब तक बच्चा ठीक है और मल नरम है, यह सामान्य माना जाता है।
यह सबसे कॉमन सवालों में से एक है। कुछ बच्चे तो लगभग हर फीड के बाद पखाना कर देते हैं, और कुछ कई दिन तक नहीं करते। दोनों ही पैटर्न नॉर्मल हो सकते हैं, उम्र और फीडिंग पर निर्भर करता है।
पहले कुछ हफ्तों में सिर्फ माँ का दूध पीने वाले बहुत से बच्चों का पखाना काफ़ी बार आता है।
आम पैटर्न:
इस तरह के बार-बार, नरम और पीले पखाने आम तौर पर यह दिखाते हैं कि स्तनपान अच्छे से चल रहा है।
लगभग 6 हफ्ते के बाद तस्वीर बदल सकती है:
अगर:
...तो दोनों तरह के पैटर्न स्तनपान वाले शिशु मल के लिए सामान्य माने जाते हैं। भारतीय शिशु रोग विशेषज्ञ और WHO की गाइडलाइन भी यही कहती हैं।
अगर आपका स्तनपान वाला बच्चा पखाने से पहले बहुत ज़ोर लगाता है, लाल पड़ जाता है, रोता है, लेकिन जो मल निकलता है वह नरम है, तो ज़्यादातर मामलों में यह कब्ज़ नहीं है। छोटे बच्चे अपने पेट और गुदा की मांसपेशियों को कॉर्डिनेट करना सीख रहे होते हैं, इसलिए ऐसा दिखता है।
फॉर्मूला शिशु मल का पैटर्न आम तौर पर थोड़ा स्थिर रहता है।
सामान्य रेंज:
अगर फॉर्मूला पीने वाले बच्चे का:
...तो यह कब्ज़ की तरफ़ इशारा कर सकता है, खासकर अगर बच्चा परेशान दिखे। ऐसे में अपने बाल रोग विशेषज्ञ से मिलें, नज़दीकी हेल्थ सेंटर जाएँ या किसी योग्य डॉक्टर की सलाह लिए बिना देसी नुस्खे या दवाइयाँ न आज़माएँ।
नवजात शिशु का मल रंग काफ़ी बदल सकता है और ज़्यादातर रंग बिल्कुल हानिरहित होते हैं। कुछ रंग ऐसे हैं जिन पर तुरंत डॉक्टरी सलाह ज़रूरी हो जाती है।
यह एक साधारण बच्चे का मल रंग गाइड है।
अगर बच्चा बाकी सब मामलों में ठीक है, तो पीला या सरसों रंग का बच्चे का पखाना नॉर्मल माना जाता है।
जब तक मल नरम है और बच्चा स्वस्थ लग रहा है, यह भी सामान्य है।
बच्चे का हरा पखाना देखकर अक्सर घरवाले घबरा जाते हैं, लेकिन ज़्यादातर मामलों में यह बिल्कुल सामान्य होता है, खासकर अगर:
नवजात शिशु का हरा पखाना आने के सामान्य कारण:
नवजात मल के रंग चार्ट में हरा रंग भी सामान्य की श्रेणी में आता है। फिर भी डॉक्टर को दिखाएँ अगर हरा पखाना:
लाल रंग का बच्चे का मल या खून दिखना ऐसी बात है जिसे कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
संभावित कारण:
कभी-कभी जो हमें खून लगता है वह बड़े बच्चों में खाया हुआ कुछ लाल रंग का खाना भी हो सकता है, लेकिन नवजात शिशु के मामले में रिस्क लेना सही नहीं है।
अगर आप देखें:
तो उसी दिन बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें या नज़दीकी अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में जाएँ।
अगर बच्चा बहुत ज़्यादा सुस्त, बदन ढीला या बहुत पीला लगे और साथ में खून वाला मल हो, तो 108 या स्थानीय इमरजेंसी हेल्पलाइन पर कॉल करके तुरंत अस्पताल जाएँ।
सफेद या बहुत फीका बच्चे का मल बहुत कम देखा जाता है, लेकिन यह कभी-कभी लीवर या पित्त नली की गंभीर बीमारी (जैसे बिलियरी एट्रेसिया) की तरफ़ इशारा कर सकता है।
ऐसा मल कुछ इस तरह दिख सकता है:
इसे इमरजेंसी माना जाता है।
अगर आपको नवजात शिशु में सफेद, चॉक जैसा या बहुत फीका पखाना दिखे, खासकर अगर बच्चे को पीलिया (जॉन्डिस) भी हो जो ठीक नहीं हो रहा, तो देर न करें:
«देखते हैं, शायद बाद में नॉर्मल हो जाए» कहकर इंतज़ार न करें।
याद रखिए, जन्म के तुरंत बाद पहले 1–2 दिन तक काला मेकोनियम नॉर्मल है।
लेकिन मेकोनियम के पीरियड के बाद काला पखाना आने का मतलब हो सकता है:
एक बार हल्का गहरा मल आना आमतौर पर इमरजेंसी नहीं होता, लेकिन बार-बार तारकोल जैसा काला मल आना ज़रूर चेक करवाना चाहिए।
डॉक्टर से मिलें या तुरंत किसी योग्य स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लें अगर:
यही जगह ज़्यादातर लोगों को कन्फ़्यूज़ कर देती है। खासकर स्तनपान वाले बच्चों का पखाना नैचुरली बहुत नरम और पतला होता है। फिर हम कैसे समझें कि यह सामान्य शिशु मल है या सच में दस्त है?
सामान्य ढीला बच्चे का मल:
संभावित नवजात दस्त:
अगर आपको लगे कि बच्चे को दस्त हो सकता है, तो:
डॉक्टर से उसी दिन संपर्क करें या अस्पताल दिखाएँ अगर:
बच्चे का पखाना कई बार अजीब दिख सकता है, लेकिन ज़्यादातर बार वह हानिरहित होता है। कुछ संकेत ऐसे हैं जिन पर तुरंत ध्यान देना चाहिए।
और अगर आपको अंदर से लगे कि «कुछ ठीक नहीं है», तो अपने मन की बात अनदेखी न करें। किसी सरकारी अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग, निजी बाल रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी हेल्थ सेंटर पर दिखाना हमेशा बेहतर है, बजाय इसके कि देर से पहुँचा जाए।
थोड़ी सी तैयारी आपके लिए भी आसान रहेगी और डॉक्टर के लिए भी जानकारी जुटाना सरल होगा।
पहले दो हफ्तों के लिए छोटा सा लॉग रखें
रैश से बचने के लिए बैरियर क्रीम का उपयोग करें
अगर रंग या बनावट पर शक हो तो फोटो ले लें
रूटीन चेकअप पर पखाने की बात ज़रूर करें
नवजात शिशु का पखाना गंदा भी है, कभी गंधहीन तो कभी बदबूदार, और अक्सर कन्फ़्यूज़ करने वाला। लेकिन एक बार आप समझ जाएँ कि क्या नॉर्मल है, तो यही बच्चे का मल रोज़ाना यह बताने का सबसे आसान संकेत बन जाता है कि आपका शिशु कितना अच्छा दूध पी रहा है और कैसे बढ़ रहा है।
अगर कभी आप नैपी या कपड़े की लंगोट को घूरते हुए सोचें कि «अभी जो दिख रहा है, यह ठीक है या किसी गड़बड़ी का संकेत?», तो इस गाइड को याद कीजिए, जो देख रहे हैं उससे तुलना कीजिए, और अगर तब भी मन आश्वस्त न हो, तो बिना झिझक किसी योग्य डॉक्टर या हेल्थ वर्कर से बात कीजिए। आपकी सजगता और सही जानकारी, दोनों मिलकर आम तौर पर सबसे अच्छा फैसला करवाती हैं।