आपने अभी‑अभी नवजात शिशु की नैपी बदली, उसे गोद में उठाकर प्यार से चूमने ही वाले थे कि नज़र गई... उसकी नन्ही पलकें पीले, चिपचिपे स्राव से चिपकी हुई हैं। दिल घबरा जाता है।
ये इन्फेक्शन तो नहीं? कंजंक्टिवाइटिस तो नहीं? तुरंत इमरजेंसी भागना पड़ेगा क्या?
थोड़ा रुकिए, गहरी साँस लीजिए।
नवजात शिशु की आँख से पपड़ी या पीला स्राव शुरुआती महीनों में बहुत आम है, और ज़्यादातर मामलों में जितना डरावना दिखता है, उतना खतरनाक नहीं होता। फर्क बस इतना है कि आपको समझ हो कि कब यह सामान्य है, कब घर पर देखभाल से ठीक हो सकता है, और कब डॉक्टर को तुरंत दिखाना ज़रूरी है।
यह गाइड आपको बताएगा:
नवजात शिशु की आँख से पीला स्राव या पपड़ी कई वजहों से हो सकता है। मुख्य 3 कारण आमतौर पर ये होते हैं:
सबसे पहले एक जरूरी बात याद रखिए:
अगर आँख का सफेद हिस्सा लाल नहीं है और बच्चा आराम से दिख रहा है, तो ज़्यादातर मामलों में यह आँसू की नली बंद होने की वजह से होता है, कोई खतरनाक इन्फेक्शन नहीं।
जब आँख से नाक की तरफ जाने वाली बारीक नली (लैक्रिमल डक्ट) पूरी तरह नहीं खुली होती या बहुत पतली होती है, तो आँसू ठीक से नीचे नहीं जा पाते। इसे ही आँसू की नली बंद या मेडिकल भाषा में डैक्रीयोस्टेनोसिस (dacryostenosis) कहते हैं।
यह नवजातों में बेहद आम है - माना जाता है कि लगभग हर 5 में से 1 बच्चा किसी न किसी हद तक इससे प्रभावित होता है।
अक्सर आप दूसरे माता‑पिता से सुनेंगे कि उन्हें «बच्चे की आँसू नली खोलने के लिए मसाज» करनी पड़ी थी। यही आँसू की नली मसाज आप आगे सीखेंगे।
यदि नवजात शिशु की आँख से पपड़ी या पीला स्राव आँसू की नली बंद होने की वजह से है, तो आम तौर पर ये लक्षण दिखाई देते हैं:
माता‑पिता अक्सर पूछते हैं: «नवजात शिशु की आँख से पीला स्राव क्या सामान्य है?»
अगर आँख का सफेद हिस्सा साफ और शांत दिख रहा है, बच्चा आराम से है और लक्षण ऊपर बताए गए जैसे हैं, तो अधिकतर मामलों में यह सामान्य, हल्की समस्या होती है जो आँसू की नली बंद होने से आती है।
ज़्यादातर बच्चों में आँसू की नली बंद:
बहुत कम मामलों में, अगर एक साल की उम्र तक भी सुधार न हो, तो आँख के डॉक्टर द्वारा एक छोटा‑सा प्रोबिंग प्रोसीजर (बारीक तार से नली खोलना) करवाने की सलाह दी जा सकती है।
अगर आँख का सफेद हिस्सा लाल नहीं है और बच्चा बाकी सेहत में ठीक है, तो आँसू की नली बंद होने की वजह से होने वाला स्राव आप घर पर ही संभाल सकते हैं।
मुख्य तौर पर दो काम करने होते हैं:
यह मसाज आँसू की थैली पर हल्का दबाव डालकर जमे हुए म्यूकस को नीचे की ओर धकेलने में मदद करती है, जिससे नली खुलने की संभावना बढ़ जाती है।
इसे दिन में 2 से 3 बार करना फायदेमंद रहता है।
सबसे पहले हाथ अच्छी तरह धोएँ
साधारण साबुन और साफ पानी से हाथ धोकर अच्छी तरह सुखाएँ। यह बहुत ज़रूरी है, ताकि नए कीटाणु आँख तक न पहुँचें।
सही जगह पहचानें
उँगली सही तरह से रखें
हल्का लेकिन टिका हुआ दबाव देते हुए नीचे की तरफ मसाज करें
इसे नियमित रूप से दोहराएँ
अगर आपको दबाव को लेकर संदेह हो, तो अपने बाल रोग विशेषज्ञ, आशा वर्कर, ANM, या नज़दीकी सरकारी/प्राइवेट अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ से एक बार लाइव डेमो ज़रूर लें।
आँसू की नली बंद होने पर भी आँख के आसपास का हिस्सा साफ रखना ज़रूरी है। इससे ऊपर से कोई नया नवजात शिशु आँख का संक्रमण चढ़ने का खतरा कम होता है।
घर पर सफाई के लिए ये तरीका अपनाएँ:
सामान पहले से तैयार रखिए
फिर से हाथ धोएँ
हर बार बच्चे की आँख को छूने से पहले और बाद में हाथ साफ रखें।
कॉटन पैड को सलाइन से गीला करें
पैड बस नम हो, टपकना नहीं चाहिए।
भीतरी कोने से बाहरी कोने की तरफ पोंछें
हर बार नया कॉटन पैड इस्तेमाल करें
आँसू के आसपास की त्वचा हल्के से सुखाएँ
दिन में ज़रूरत पड़ने पर कई बार यह सफाई की जा सकती है, खासकर जब बच्चा नींद से उठे तो।
हर चिपचिपी आँख आँसू की नली बंद होने से नहीं होती। कभी‑कभी यह कंजंक्टिवाइटिस (conjunctivitis) यानी पिंक आई भी हो सकता है।
कंजंक्टिवाइटिस का मतलब है उस पतली झिल्ली में सूजन, जो आँख के सफेद हिस्से और पलकों की अंदरूनी सतह को ढकती है। जब यह सूजन जीवन के पहले 1 महीने में हो, तो उसे नियोनेटल कंजंक्टिवाइटिस कहते हैं।
यह तीन तरह का हो सकता है:
भारत के कई सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में अब हर नवजात को रूटीन में एंटीबायोटिक आई ड्रॉप नहीं दी जाती, लेकिन कुछ जगहों या खास परिस्थितियों में अभी भी दी जाती हैं।
इन ड्रॉप या एंटीसेप्टिक ड्रॉप से हल्की रासायनिक जलन हो सकती है।
इसके लक्षण:
यह तरह का कंजंक्टिवाइटिस आम तौर पर:
यह नवजात शिशु आंख में पस का वह कारण है, जिसे थोड़ा गंभीरता से लेना ज़रूरी है, क्योंकि कभी‑कभी इन्फेक्शन तेज़ भी हो सकता है।
संभावित लक्षण:
यह इन्फेक्शन हो सकता है:
नवजात के शुरुआती दिनों में यह कम दिखता है, लेकिन कुछ हफ्तों बाद सर्दी‑जुकाम के साथ हो सकता है।
लक्षण हो सकते हैं:
नवजात में अगर आँख का सफेद हिस्सा भी लाल हो और साथ में स्राव या पपड़ी हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
खुद से कोई पुरानी आई ड्रॉप या घरेलू नुस्खा लगाने से बचें।
बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस में डॉक्टर आम तौर पर:
वायरल कंजंक्टिवाइटिस अक्सर अपने आप ठीक हो जाता है, लेकिन इतनी छोटी उम्र के बच्चे में डॉक्टर आम तौर पर एक बार देखना पसंद करते हैं, ताकि कोई गंभीर कारण छूट न जाए।
डॉक्टर के पास जाते समय तक आप:
ज़्यादातर मामलों में नवजात शिशु की आँख से पपड़ी और चिपचिपा स्राव साधारण कारणों से होता है।
लेकिन कुछ लक्षण ऐसे हैं जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए।
निम्न में से कुछ भी दिखे तो उसी दिन बाल रोग विशेषज्ञ या आँख के डॉक्टर से संपर्क करें, और जरूरत पड़े तो नज़दीकी अस्पताल की आपातकालीन सेवा (ER) जाएँ:
ऐसे संकेत कभी‑कभी ज्यादा गंभीर नवजात शिशु आँख का संक्रमण या आँख के आस‑पास की कोशिकाओं में फैलते इन्फेक्शन की ओर इशारा कर सकते हैं, जिनमें जल्दी इलाज और अक्सर एंटीबायोटिक की ज़रूरत होती है।
अपने मन की आवाज़ को भी महत्व दें। अगर आप आँख देखकर खुद से सोच रहे हैं कि «ये तो कुछ ज़्यादा बुरा लग रहा है», तो इंतज़ार न करें, तुरंत सलाह लें।
चाहे वजह आँसू की नली बंद होना हो या हल्का कंजंक्टिवाइटिस, साफ‑सफाई के कुछ बुनियादी उपाय बहुत मदद करते हैं।
इन बातों का ध्यान रखें:
हमेशा भीतरी से बाहरी कोने की तरफ पोंछें
नाक की तरफ से शुरू करके कान की तरफ जाएँ, उल्टा नहीं।
हर पोंछ के लिए नया कॉटन पैड लें
जो पैड एक बार आँख छू चुका है, उसे दोबारा पानी में न डुबाएँ और न ही अगली बार इस्तेमाल करें।
हर आँख के लिए अलग पैड इस्तेमाल करें
अगर एक आँख में इन्फेक्शन हो, तो दूसरी आँख तक फैलने की संभावना कम होगी।
हर बार हाथ अच्छी तरह धोएँ
आँख की सफाई या आई ड्रॉप लगाने से पहले और बाद में साबुन और पानी से हाथ साफ रखें, बाहर हों तो अल्कोहल बेस्ड सेनिटाइज़र भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
आई ड्रॉप या मरहम की नोज़ल/टिप आँख से न लगने दें
अगर डॉक्टर ने नवजात शिशु आँख की एंटीबायोटिक ड्रॉप या कोई और ड्रॉप दी है:
तौलिये और रूमाल साझा न करें
बच्चे के चेहरे और आँखों के लिए एक अलग, साफ तौलिया रखें, जिसे बाकी घर वाले इस्तेमाल न करें।
निर्णय लेना कभी‑कभी मुश्किल हो सकता है। इस चेकलिस्ट से मदद मिल सकती है।
इतनी छोटी उम्र में एहतियात रखना हमेशा बेहतर है।
जब भी आपको लगे कि नवजात शिशु की आँख से पपड़ी या नवजात शिशु की आँख से पीला स्राव आ रहा है, तो मन में यह छोटा‑सा चेकलिस्ट दोहरा लें:
आँख का सफेद हिस्सा साफ, बच्चा खुश और आराम में, बस पीला चिपचिपा स्राव, खासकर नींद के बाद?
ज़्यादातर मामलों में यह आँसू की नली बंद (डैक्रीयोस्टेनोसिस) से जुड़ा होता है। ऐसे में:
आँख लाल, पलकों में सूजन, पस बहुत ज़्यादा और बार‑बार आ रही है?
यह कंजंक्टिवाइटिस या कोई और नवजात शिशु आँख का संक्रमण हो सकता है। ऐसे में बच्चे को:
पलकों में बहुत तेज सूजन, आँख बहुत लाल, बच्चा सुस्त या बुखार के साथ बीमार लग रहा है?
इसे तत्काल स्थिति मानें। नज़दीकी अस्पताल, इमरजेंसी या अपने विश्वसनीय डॉक्टर से फौरन संपर्क करें।
शुरुआती महीनों में आपको सच में लगेगा कि पूरा दिन बस छोटी‑छोटी आँखें और नन्हे‑नन्हे डायपर ही संभाल रहे हैं। यह पूरी तरह सामान्य है।
सही मसाज तकनीक, नियमित सफाई और यह समझ कि कब घर पर देखभाल काफी है और कब डॉक्टर ज़रूरी हैं, आपको काफी भरोसा और सुकून दे सकती है।