नवजात मुंहासे (बेबी एक्ने) क्या होते हैं - कारण, घरेलू देखभाल और कब डॉक्टर को दिखाएँ
आपके बच्चे के गालों पर दिखने वाले वे छोटे-छोटे लाल दाने आपके मन में बहुत बड़े लग सकते हैं। आप नैपी बदलते हैं, ऊपर देखते हैं और अचानक लगता है कि पूरे चेहरे पर छोटे शिशु पिम्पल निकल आए हैं। ज़्यादातर मम्मी-पापा तुरंत सोचने लगते हैं, «मैंने कुछ ग़लत कर दिया क्या? कहीं एलर्जी तो नहीं? कहीं किसी से लग तो नहीं गया?»
अमूमन ऐसा कुछ भी नहीं होता। ज्यादातर मामलों में यह नवजात मुंहासे होते हैं, जो आमतौर पर बिल्कुल साधारण, हानिरहित और कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाते हैं।
आइए आराम से समझते हैं कि आपके बच्चे की त्वचा पर क्या हो रहा है, नवजात मुंहासे क्यों होते हैं, क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए, और कब डॉक्टर या आशा/आंगनवाड़ी वर्कर से संपर्क करना ठीक रहता है।
नवजात मुंहासे क्या होते हैं?
नवजात मुंहासे (जिन्हें अक्सर बेबी एक्ने, इन्फैंट एक्ने या शिशु पिम्पल भी कहा जाता है) एक बहुत आम तरह का बेबी रैश है, जो इन रूपों में दिखता है:
- छोटे लाल दाने
- लाल दाने जिनके बीच में सफेद बिंदु हों, जो छोटे-छोटे पिम्पल जैसे दिखें
- कभी-कभी त्वचा छूने पर हल्की-सी दानेदार, खुरदरी लग सकती है
ये ज़्यादातर इन जगहों पर दिखते हैं:
- गाल
- नाक
- माथा
कभी-कभी आप कुछ दाने इन जगहों पर भी देख सकते हैं:
- ठुड्डी पर
- ऊपरी सीने या पीठ पर (नवजात शिशु पीठ पर दाने)
अगर आपके मन में बार-बार सवाल आ रहा है, «आख़िर नवजात मुंहासे क्या होते हैं?» तो इसे ऐसे सोचिए, जैसे टीनेज में होने वाले पिम्पल का बहुत हल्का, छोटा सा वर्ज़न, पर बहुत नाज़ुक नवजात त्वचा पर।
नवजात मुंहासे:
- हानिरहित होते हैं
- संक्रामक नहीं होते, यानी «क्या नवजात मुंहासे लगते हैं?» का जवाब साफ़ तौर पर नहीं है
- अन्यथा बिल्कुल स्वस्थ बच्चों में भी बहुत आम हैं
यह आपकी किसी गलती से नहीं होता, और ज़्यादातर बच्चों को इससे कोई तकलीफ़ भी नहीं होती।
नवजात मुंहासे कब आते हैं?
अधिकतर नए माता-पिता को लगता है कि जन्म के समय तो बच्चे की त्वचा एकदम साफ़ थी, फिर कुछ हफ्तों बाद अचानक दाने क्यों निकल आए।
सामान्य समय-सीमा कुछ ऐसी रहती है:
- अकसर शुरुआत: जन्म के लगभग 2 से 4 हफ्ते बाद
- अकसर ज़्यादा दिखने लगते हैं: करीब 6 से 8 हफ्ते की उम्र में
- इसके बाद धीरे-धीरे कम होते हैं: अगले कुछ हफ्तों में
शुरुआत में गालों पर 2-4 छोटे दाने दिखते हैं, फिर 2-3 दिन में थोड़ा और बढ़ जाते हैं। कई बार कुछ दिन तक थोड़ा ज़्यादा भड़क कर दिखते हैं, फिर धीरे-धीरे हल्के पड़ने लगते हैं, जिससे बिना जानकारी के माता-पिता घबरा जाते हैं।
अगर आप सोच रहे हैं, «नवजात मुंहासे कब आते हैं और नवजात मुंहासे कब जाते हैं?», तो आसान भाषा में यूं समझिए:
पहले महीने में शुरू, दूसरे महीने में ज़्यादा दिखते हैं, और आमतौर पर तीसरे या चौथे महीने तक काफ़ी हद तक गायब हो जाते हैं।
नवजात मुंहासे क्यों होते हैं?
यहीं पर ज़्यादातर माता-पिता सबसे ज़्यादा परेशान होते हैं।
«कहीं मैंने कुछ ऐसा तो नहीं खा लिया? साबुन-तेल ग़लत तो नहीं लगा दिया? धोने का पाउडर तो सही है न?»
सामान्य नवजात शिशु मुंहासे के लिए जवाब आमतौर पर नहीं होता।
नवजात मुंहासे के मुख्य कारण ये होते हैं:
1. माँ के हार्मोन का असर
प्रेग्नेंसी के दौरान आपके हार्मोन प्लेसेंटा के ज़रिए बच्चे तक पहुँचते हैं और उसके विकास में मदद करते हैं। डिलीवरी के बाद भी कुछ समय तक वे माँ के हार्मोन बच्चे के शरीर में सर्कुलेट करते रहते हैं।
ये हार्मोन बच्चे की त्वचा में मौजूद ऑयल ग्लैंड्स (तेल बनाने वाली ग्रंथियां) को थोड़ा ज़्यादा एक्टिव कर देते हैं। यही अतिरिक्त तेल उन छोटे-छोटे पिम्पल जैसे दानों का कारण बन सकता है।
इसे आप रोक नहीं सकते, और यह आपकी किसी गलती से नहीं होता।
न नॉर्मल स्तनपान से, न खाना-पीना बदलने से। यह बस शरीर की एक सामान्य प्रक्रिया है जो जन्म के बाद के शुरुआती महीनों में चलती है।
2. त्वचा की ऑयल ग्लैंड्स का अभी परिपक्व न होना
नवजात की त्वचा गर्भ के सुरक्षित वातावरण से निकल कर अचानक बाहरी वातावरण में आती है। इस समय उसकी sebaceous glands (तेल बनाने वाली ग्रंथियां):
- शुरुआत में काफी एक्टिव रहती हैं
- अभी तक तेल की मात्रा को संतुलित करना अच्छे से नहीं सीख पाई होतीं
माँ के हार्मोन और इन अपरिपक्व ऑयल ग्लैंड्स का कॉम्बिनेशन नवजात मुंहासे की संभावना बढ़ा देता है।
नवजात मुंहासे इन वजहों से नहीं होते:
- गंदगी या साफ़-सफाई की कमी से
- मैली चादर, तकिए या कपड़ों से
- माँ के चॉकलेट, मसालेदार खाना या दूध-दही खाने से
- आम एलर्जी से, क्योंकि वे आमतौर पर अलग तरह से दिखती हैं और अकसर बहुत खुजलीदार होती हैं
यह जानना ज़रूरी है कि यह आपकी गलती नहीं है। खुद को कोसने के बजाय आप सिर्फ़ हल्की, कोमल देखभाल पर ध्यान दें।
दिन-प्रतिदिन नवजात मुंहासे कैसे दिखते हैं?
बहुत से माता-पिता कहते हैं, «सुबह तो ठीक-ठाक था, फीड के बाद अचानक गाल बिल्कुल लाल-लाल दिखने लगे»।
ऐसा होना बहुत आम है।
नवजात मुंहासे कैसे दिखते हैं, आमतौर पर कुछ ऐसे:
- छोटे लाल या गुलाबी दाने
- कुछ में ऊपर हल्का-सा सफेद बिंदु
- कहीं-कहीं त्वचा थोड़ी ज़्यादा लाल, कहीं कम, यानी एकदम बराबर नहीं दिखती
अक्सर आप देखेंगे कि दाने इन स्थितियों में थोड़े ज़्यादा भड़क जाते हैं:
- जब बच्चा ज़्यादा गर्म हो जाए या ज्यादा पसीना आ जाए
- जब बच्चा बहुत देर तक ज़ोर-ज़ोर से रोए
- जब दूध या उल्टी (स्पिट-अप) बार-बार गालों और ठुड्डी पर लगे रहे
- जब ऊनी कपड़ा, कंबल या तकिया बार-बार चेहरे से रगड़ खाए
रैश कभी-कभी कुछ घंटों के लिए ज्यादा लाल दिखेगा, फिर खुद ही हल्का पड़ जाएगा। यह ऊपर-नीचे होता रहना बहुत साधारण बात है, और इसका मतलब यह नहीं कि इंफेक्शन हो गया है या कुछ खतरनाक है।
नवजात मुंहासे में क्या नहीं करना चाहिए
माता-पिता के मन में स्वाभाविक इच्छा रहती है कि बच्चे की त्वचा पर कुछ भी दाग दिखे तो तुरंत उसे «ठीक» किया जाए।
पर नवजात मुंहासे के मामले में ज़्यादातर उपाय उल्टा नुकसान ही पहुंचा देते हैं।
इन बातों से बचें:
-
मुंहासों या दानों को न निचोड़ें, न फोड़ें
- इससे त्वचा को नुकसान हो सकता है
- बैक्टीरिया अंदर चला जा सकता है, जिससे इंफेक्शन या दाग पड़ने की आशंका बढ़ती है
-
बड़ों के लिए बने एक्ने प्रोडक्ट्स बिल्कुल न लगाएं
- जैसे salicylic acid, benzoyl peroxide, retinoids या तेज़ टोनर
- ये सब नवजात की नाज़ुक त्वचा के लिए बहुत तेज़ और नुकसानदेह हो सकते हैं
-
चेहरा ज़ोर से न रगड़ें, न स्क्रब करें
- खुरदुरे तौलिए, स्क्रबिंग स्पॉन्ज, या रगड़-रगड़ कर धोना
- इससे त्वचा और ज़्यादा चिढ़ जाती है और लाल हो सकती है
-
चेहरे पर भारी, चिपचिपे तेल या क्रीम न लगाएं
- जैसे बहुत गाढ़ी क्रीम, नारियल तेल, ऑलिव ऑयल, मलहम टाइप ऑइंटमेंट
- ये पोर्स को और बंद कर सकते हैं और दाने ज़्यादा दिखने लगते हैं
-
इधर-उधर से सुने हुए घरेलू नुस्खे चेहरे पर ट्राई न करें
- जैसे नींबू का रस, टूथपेस्ट, बेकिंग सोडा, तेज़ essential oils आदि, ये शिशु की त्वचा के लिए सुरक्षित नहीं हैं
अगर किसी प्रोडक्ट को लेकर मन में ज़रा-सा भी संदेह हो, तो एक आसान नियम याद रखें:
जो चीज़ बड़ों के मुंहासे के लिए बनी हो, उसे बच्चे के चेहरे से दूर ही रखें।
क्या करना चाहिए: हल्की देखभाल और धैर्य
अच्छी बात यह है कि नवजात मुंहासे का इलाज घर पर अक्सर बहुत सरल होता है। ज्यादातर बच्चों को किसी दवा या क्रीम की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।
देखभाल के लिए ये कदम मददगार रहते हैं:
1. चेहरे की हल्की सफाई
- हल्के गुनगुने पानी से चेहरा साफ करें, बहुत गर्म पानी न लें
- दिन में एक या दो बार साफ करना पर्याप्त है
- चाहें तो बहुत हल्का, खुशबू रहित बेबी क्लींजर इस्तेमाल कर सकते हैं, नहीं तो सिर्फ साफ पानी भी ठीक है
- साफ हाथों से या बहुत मुलायम कपड़े से हल्के हाथ से पोछें, रगड़ें नहीं
2. पोंछते समय थपथपा कर सुखाएं, रगड़ें नहीं
- चेहरा धोने के बाद नरम तौलिए से हल्के-हल्के थपथपा कर सुखाएं
- घिसने या रगड़ने से दाने और लाल हो सकते हैं
3. चेहरे को भारी प्रोडक्ट्स से दूर रखें
- चेहरे पर तैलीय, बहुत गाढ़ी क्रीम या वैसलीन जैसी वस्तुएं लगाने से बचें
- अगर बच्चे की त्वचा कुछ जगहों पर बहुत सूखी दिख रही हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ या नज़दीकी सरकारी अस्पताल/स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर से पूछ कर ही कोई मॉइस्चराइज़र चुनें
4. दूध और लार से होने वाली गीलापन से बचाव
दूध या लार (ड्रूल) का बार-बार गालों और ठुड्डी पर रहना, बच्चे के चेहरे के लाल दाने और ज़्यादा भड़का सकता है।
- दूध गिरने पर या उल्टी होने पर गुनगुने पानी से हल्के हाथ से साफ कर दें
- उसके बाद थोड़ी देर हवा लगने दें और हल्के से थपथपा कर सुखा लें
- मुलायम सूती कपड़े या मुलमल के रुमाल, बिब का इस्तेमाल करें ताकि चेहरा लगातार गीला न रहे
5. बस इंतज़ार करें और समय दें
यही हिस्सा सबसे मुश्किल लगता है, क्योंकि मन करता है कि कोई तुरन्त उपाय मिल जाए, «नवजात मुंहासे रातों-रात कैसे ठीक करें?»
हकीकत यह है कि ऐसा कोई जादुई उपाय नहीं है।
ज्यादातर मामलों में:
- मुंहासे समय के साथ अपने आप कम होते जाते हैं
- किसी ख़ास दवा या क्रीम की ज़रूरत नहीं पड़ती
- आमतौर पर माँ को अपना खाना-पीना बदलने की ज़रूरत नहीं होती, जब तक डॉक्टर किसी और कारण से कुछ अलग न कहे
आपकी भूमिका बस इतनी है कि आप बच्चे की त्वचा को ज़्यादा चिढ़ाने वाली चीज़ों से बचाएं और बाकी काम प्रकृति को करने दें।
नवजात मुंहासे कब जाते हैं?
अगर आप टाइमलाइन जानना चाहते हैं कि नवजात मुंहासे कितने दिन रहते हैं, तो आम तौर पर क्रम कुछ ऐसा होता है:
- शुरुआत लगभग 2 से 4 हफ्ते की उम्र में
- 6 से 8 हफ्तों के बीच ज़्यादा दिख सकते हैं
- फिर अगले कई हफ्तों में धीरे-धीरे हल्के होते जाते हैं
- ज़्यादातर बच्चों में 3 से 4 महीने की उम्र तक काफी हद तक चले जाते हैं
कुछ बच्चों के दाने 6 से 8 हफ्ते तक ही लगभग गायब हो जाते हैं,
जबकि कुछ में हल्के-फुल्के दाने थोड़ा ज़्यादा समय तक टिके रह सकते हैं।
जब तक:
- बच्चा सामान्य रूप से एक्टिव और स्वस्थ दिख रहा हो
- दाने से पीप न निकल रही हो
- त्वचा बहुत ज़्यादा सूजी हुई, फटी हुई या छिलने जैसी न लगे
…तब तक अक्सर केवल इंतज़ार और हल्की देखभाल ही काफ़ी होती है।
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
ज़्यादातर नवजात शिशु मुंहासे बिल्कुल हानिरहित होते हैं, पर कुछ स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर रहता है।
आप अपने नज़दीकी बाल रोग विशेषज्ञ, सरकारी अस्पताल, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर, या 104 / 102 स्वास्थ्य हेल्पलाइन आदि से संपर्क कर सकती हैं, अगर:
- रैश सामान्य गाल, नाक और माथे से बहुत ज़्यादा फैल कर पूरे शरीर पर जा रहा हो
- दाने बहुत लाल, सूजे हुए या छूने पर गरम लगें
- दानों में से पीली पीप, पपड़ी या खुले ज़ख्म जैसे दिखने लगें
- बच्चा दाने वाले हिस्से को बार-बार रगड़ने की कोशिश करे, बहुत असहज लगे या दर्द में रोता हो
- 3 से 4 महीने के बाद भी दाने में कोई सुधार न दिखे, बल्कि उल्टा ज़्यादा बढ़ते लगें
- मुंहासों के साथ सफेद हेड, ब्लैकहेड या गहरे, कड़े गाठ जैसे दाने दिखें, जो बड़े बच्चों या टीनेज एक्ने जैसे लगें
ऐसी स्थिति में यह हो सकता है:
- इंफैंटाइल एक्ने, जो उम्र में थोड़ा बाद में आता है और कुछ बच्चों में ज़्यादा समय तक रह सकता है
- एक्ज़िमा या कोई दूसरा त्वचा रोग, जिसके लिए अलग तरह का इलाज चाहिए
- कोई स्किन इंफेक्शन, जिसके लिए डॉक्टर की दवा ज़रूरी हो सकती है
डॉक्टर या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी देखकर बता सकते हैं कि अभी भी यह साधारण नवजात मुंहासे ही हैं या कुछ और है जिसके लिए अलग ध्यान चाहिए।
सवाल पूछने में झिझकिए मत, बच्चों के दाने और रैश तो डॉक्टर रोज़ देखते हैं।
नवजात मिलिया बनाम नवजात मुंहासे: फर्क क्या है?
बहुत से नए माता-पिता नवजात मिलिया और नवजात मुंहासे के बीच कन्फ्यूज़ हो जाते हैं, क्योंकि दोनों में ही छोटे-छोटे सफेद दाने दिख सकते हैं।
फर्क समझना आसान है:
मिलिया
- बिल्कुल नन्हे-नन्हे सफेद बिंदुओं जैसे दिखते हैं
- ज़्यादातर नाक, गाल या आँखों के आसपास दिखते हैं
- यह तब बनते हैं जब त्वचा के बहुत छोटे रोमछिद्रों में keratin (त्वचा का प्रोटीन) फँस जाता है
- इनके आस-पास की त्वचा आमतौर पर लाल या सूजी हुई नहीं होती
- ये लाल पिम्पल में नहीं बदलते, बस वैसे ही छोटे सफेद बिंदु बने रहते हैं
- पूरी तरह हानिरहित होते हैं और किसी को लगते नहीं हैं
नवजात मुंहासे
- लाल या गुलाबी दाने, जिनके बीच में सफेद सिरा हो सकता है
- आस-पास की त्वचा थोड़ी-बहुत लाल या चित्तीदार दिख सकती है
- ज़्यादातर थोड़ा फैले रहते हैं, कुछ जगहों पर ज़्यादा भड़के हुए, कुछ जगह कम
- बच्चा गरम होने पर, ज़्यादा रोने पर या दूध-लार रहने पर दाने अक्सर ज्यादा लाल दिखने लगते हैं
दोनों ही स्थितियाँ सामान्य हैं, ज़्यादातर बच्चों में खुद ही ठीक हो जाती हैं और किसी तेज़ इलाज की आवश्यकता नहीं होती। दोनों में ही सिद्धांत एक जैसा है: हल्की सफाई, दानों को न छेड़ना, और धैर्य।
आख़िर में एक छोटी-सी तसल्ली
अगर आप बार-बार बच्चे के चेहरे को देख कर परेशान हो रहे हैं, तो याद रखिए आप अकेले नहीं हैं। लगभग हर नए माता-पिता कभी न कभी बच्चे के चेहरे पर दाने देख कर घबरा जाते हैं, और फिर डॉक्टर से पूछने पर राहत महसूस करते हैं कि यह बिल्कुल सामान्य नवजात मुंहासे हैं।
झटपट दोहराते हैं:
- नवजात मुंहासे बहुत आम हैं, आपकी गलती नहीं हैं, और किसी को लगते नहीं
- ये आमतौर पर 2 से 4 हफ्ते में शुरू, 6 से 8 हफ्ते में ज़्यादा दिखते हैं और 3 से 4 महीने तक अक्सर काफी हद तक चले जाते हैं
- इनका मुख्य कारण माँ के हार्मोन और बच्चे की ऑयल ग्लैंड्स का अपरिपक्व होना है, न कि गंदगी या आपका खाना
- सबसे अच्छा «नवजात मुंहासे का इलाज घर पर» अक्सर यही है: हल्का गुनगुना पानी, बहुत कोमल सफाई, चेहरे पर भारी चीज़ों से परहेज़ और बस थोड़ा धैर्य
- अगर दाने बहुत ज़्यादा सूजे, दर्दनाक, पीप वाले लगें या 4 महीने के बाद भी बेहतर न हों, तो बाल रोग विशेषज्ञ या स्वास्थ्यकर्मी को ज़रूर दिखाएँ
पहले साल में आपके बच्चे की त्वचा कई बार बदलेगी - कभी रूखी, कभी मुलायम, कभी दानेदार। नवजात चेहरे पर छोटे दाने बस उसी सफ़र का एक छोटा-सा हिस्सा हैं। इस समय वे जितने बड़े लग रहे हैं, वास्तव में उतनी जल्दी बीत भी जाते हैं, और दानों के साथ भी आपका बच्चा उतना ही स्वस्थ और प्यारा है, जितना इनके बिना रहेगा।
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