नवजात शिशु के लिए आसान बेबी मसाज गाइड - स्टेप बाय स्टेप तरीके और सुरक्षा

नवजात बेबी मसाज गाइड - आसान तरीके, फायदे और समय

पहले कुछ हफ्ते नवजात के साथ ऐसे गुजरते हैं जैसे सब कुछ खाने, नैपी बदलने और थोड़ी‑सी नींद जोड़ने में ही निकल गया हो। इस भाग‑दौड़ के बीच बेबी मसाज एक छोटी‑सी शांत रस्म बन सकती है, जिसमें आप दोनों थोड़ा ठहरते हैं, सांस लेते हैं और फिर से जुड़ते हैं।

आपको कोई विशेषज्ञ, नर्स या योग शिक्षक होने की ज़रूरत नहीं है। घर पर नवजात शिशु मसाज शुरू करने के लिए बस आपके हाथ, थोड़ा तेल और इतना धैर्य चाहिए कि आप बच्चे के इशारों को समझें और बहुत हल्के हाथ से चलें।

यह गाइड आपको बताएगा: शिशु मसाज के तरीके, बच्चे की मालिश के फायदे, बेबी मसाज कब करें, कैसे तैयारी करें, और शरीर के हर हिस्से के लिए आसान‑से नवजात शिशु मसाज स्टेप्स

क्यों फ़ायदेमंद है बेबी मसाज: बच्चे और आपके लिए

नियमित बच्चे की मालिश केवल प्यार जताने का प्यारा तरीका नहीं है, इसके पीछे अच्छी खासी रिसर्च भी है। भारत में भी कई बाल रोग विशेषज्ञ और आंगनवाड़ी / हेल्थ वर्कर नए माता‑पिता को शिशु मसाज शुरू करने की सलाह देते हैं।

आइए देखते हैं, बेबी मसाज के फायदे क्या‑क्या हो सकते हैं।

1. गैस, कोलिक और पेट की तकलीफ में आराम

अक्सर माता‑पिता पहली बार बच्चे की गैस और कोलिक के लिए मसाज ढूंढते हैं, जब कई शामें रोने, टांगें मोड़ने और बेचैनी में बीत चुकी होती हैं।

पेट और टांगों पर हल्का दबाव और मुलायम मूवमेंट:

  • फंसी हुई गैस को आँतों के रास्ते आगे बढ़ने में मदद कर सकता है
  • बच्चे की प्राकृतिक पाचन प्रक्रिया को सहारा देता है
  • पेट की जकड़न और असहजता कम कर सकता है

घड़ी की दिशा में पेट पर गोलाई में मालिश और साइकिल की तरह पैरों को चलाना (नीचे विस्तार से है) खास तौर पर तब मददगार होते हैं, जब बच्चा दूध पीने के बाद गैस से परेशान रहता है।

2. बेहतर नींद और गहरी रिलैक्सेशन

स्पर्श के दौरान शरीर से ऑक्सीटोसिन निकलता है, जिसे कई बार «लव हार्मोन» भी कहा जाता है। यह हार्मोन आपके और बच्चे दोनों के लिए सुकून भरा होता है, जो इन चीज़ों में मदद कर सकता है:

  • सोने से पहले बच्चे को शांत करने में
  • नींद के समय को थोड़ा लंबा करने में
  • रात की रोना‑धोना और चिड़चिड़ापन कम करने में

कई परिवार बाथ के बाद 5‑10 मिनट की बाथ के बाद बेबी मसाज को रोज़ की रात की दिनचर्या का हिस्सा बना लेते हैं - नहाना, मालिश, दूध और कहानी। धीरे‑धीरे ये सारे संकेत मिलकर बच्चे को समझाते हैं कि «अब सोने का समय आ रहा है»।

इसलिए अगर आप बच्चे की नींद के लिए मसाज आज़माना चाहते हैं, तो बेझिझक शुरू कर सकते हैं।

3. स्पर्श से मजबूत बंधन

आपके बच्चे की पहली भाषा स्पर्श है। शब्दों को समझने से पहले वह आपके हाथों से «सुनता» है।

शिशु मसाज से बंधन के फायदे कुछ ऐसे हो सकते हैं:

  • आप बच्चे के छोटे‑छोटे इशारों और संकेतों को बेहतर समझने लगते हैं
  • जब आप उनके «रुक जाओ» वाले संकेत पहचान कर रुकते हैं, तो बच्चे का भरोसा बढ़ता है
  • जो माता‑पिता जन्म नहीं दे पाए, दादा‑दादी, नाना‑नानी या बड़े भाई‑बहन - सभी के लिए जुड़ाव का एक नरम‑सा तरीका मिल जाता है

अगर प्रसव मुश्किल रहा हो, बच्चा प्रीमैच्योर हो या कुछ दिन NICU में रहे हों, तो घर पर बेबी मसाज धीरे‑धीरे नज़दीकी और आत्मविश्वास वापस दिलाने का अच्छा जरिया बन सकती है।

4. रक्तसंचार और पाचन को सपोर्ट

नरम लेकिन लयबद्ध बेबी मसाज तकनीकें:

  • रक्त संचार को हल्का स्टिम्यूलेट करती हैं, जिससे बढ़ते मसल्स तक खून का बहाव बेहतर हो सकता है
  • पाचन तंत्र का सपोर्ट करती हैं, खासकर जब आप पेट की मालिश पाचन की दिशा में करते हैं
  • हल्की कब्ज या सुस्त पेट में, अच्छे फीड और पानी (बड़े शिशुओं के लिए) के साथ मिलकर राहत दे सकती हैं

यह कोई दवा नहीं है, पर रोज़मर्रा की देखभाल में मददगार टूल ज़रूर बन सकती है।

5. बॉडी अवेयरनेस और मसल टोन में मदद

हर स्ट्रोक के साथ बच्चे का दिमाग अपने शरीर का नक्शा बनाता है:

  • «ये मेरे पैर हैं»
  • «मेरा हाथ ऐसे घूम सकता है»
  • «जब मम्मी या पापा मेरे कंधे को छूते हैं, तो मैं सुरक्षित महसूस करता हूँ»

यह शुरुआती बॉडी अवेयरनेस आगे चलकर मोटर डेवलपमेंट में मदद करती है। बच्चा धीरे‑धीरे समझने लगता है कि उसका शरीर स्पेस में कहाँ है - यही आगे चलकर रेंगने, बैठने और चलने की नींव बनता है।

6. तनाव कम, बच्चे का भी और आपका भी

हम अक्सर सोचते हैं कि बेबी मसाज केवल बच्चे के लिए फायदेमंद है, जबकि कई स्टडीज़ बताती हैं कि इससे:

  • बच्चों में स्ट्रेस हार्मोन के स्तर कम हो सकते हैं
  • माता‑पिता में भी तनाव के स्तर घट सकते हैं
  • बच्चे को संभालने और शांत करने का आत्मविश्वास बढ़ सकता है

ये 10‑15 मिनट ऐसे हो सकते हैं जब फोन दूर हो, टीवी बंद हो और बस आप और आपका बच्चा हों। थके दिन पर यह बहुत सुकून देने वाला अनुभव हो सकता है।

बेबी मसाज कब करें: सही समय चुनना

टाइमिंग बहुत मायने रखती है। अगर आप ऐसे समय बच्चे की मालिश करेंगे जब वह बहुत भूखा, बहुत थका या ओवरस्टिम्युलेटेड हो, तो न आप आनंद लेंगे न बच्चा।

मालिश के लिए समय चुनें जब बच्चा:

  • शांत और सतर्क हो
  • ज़ोर‑ज़ोर से न रो रहा हो या बहुत चिड़चिड़ा न हो
  • इधर‑उधर देख रहा हो, हल्की आवाज़ें निकाल रहा हो, थोड़ा हाथ‑पैर चला रहा हो

अक्सर ये समय ठीक रहते हैं:

  • बाथ के बाद
    नहाने के बाद शरीर गरम रहता है और पानी से भी रिलैक्सेशन मिलता है। ऐसे में बाथ के बाद बेबी मसाज खासकर रात के लिए एक अच्छा कॉम्बो बनती है।

  • दो फीड के बीच
    न ज्यादा भूखा, न बिल्कुल भरा हुआ। कोशिश करें कि फीड के कम से कम 30 मिनट बाद मसाज करें, ताकि उल्टी या पेट भारी होने की दिक्कत कम हो।

  • दिन के शांत हिस्से में
    कई परिवारों के लिए देर सुबह या शाम का समय आरामदायक होता है, पर असली गाइड आपका खुद का बच्चा होगा।

अगर बच्चा:

  • बहुत भूखा हो
  • अभी‑अभी भर पेट दूध पीकर लेटा हो
  • ज़ोर‑ज़ोर से रो रहा हो और शांत न हो पा रहा हो
  • बहुत सुस्त, ढीला या बीमार लगे

तो उस समय मसाज छोड़ देना ही बेहतर होता है। किसी और दिन, किसी और समय फिर कोशिश करें।

कितनी बार करें बेबी मसाज?

कोई तय नियम नहीं है। ज़्यादातर माता‑पिता अनुभव से यह पाते हैं:

  • रोज़ाना एक बार छोटी‑सी मालिश, खासकर शाम या रात को, अच्छा काम करती है
  • कुछ लोग हफ्ते में 3‑4 बार करते हैं, जब सबका मूड और समय सही हो

अपने बच्चे को देखें। अगर वह आराम महसूस करता दिखे, तो शिशु मसाज को रोज़मर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बनाइए। अगर उसे ज्यादा स्टिम्युलेशन लगे या उसके बाद चिड़चिड़ा हो जाए, तो समय कम कर दीजिए या टाइमिंग बदल कर देखिए।

बेबी मसाज की तैयारी कैसे करें

थोड़ी‑सी तैयारी से आपके और बच्चे दोनों के लिए पूरा अनुभव और आरामदायक हो जाता है।

कमरे की सेटिंग

  • कमरा गरम रखें
    छोटे बच्चे का शरीर जल्दी ठंडा हो जाता है। लगभग 26° C के आसपास आरामदायक गरमी रखें, ताकि बच्चा बिना कपड़ों के भी सुकून में रहे।

  • हल्की रोशनी
    बहुत तेज ट्यूबलाइट या सीधा तेज बल्ब आँखों पर चुभ सकता है। चाहें तो नर्म लैंप, नाइट लाइट या खिड़की से आती प्राकृतिक रोशनी का इस्तेमाल करें।

  • डिस्ट्रैक्शन कम करें
    टीवी बंद कर दें, मोबाइल साइलेंट कर दें, चाहें तो हल्की सुरीली धुन या व्हाइट नॉइज़ चला सकते हैं, अगर बच्चे को पसंद हो।

सतह की तैयारी

बच्चे को लिटाएँ:

  • एक सख्त, समतल और आपके लिए आरामदायक ऊँचाई वाली जगह पर
  • ऊपर से एक मोटा तौलिया या मैट बिछाकर
  • उसके ऊपर एक मुलायम कपड़ा या मलमल, जिसे गंदा या तेलीय होने पर आसानी से बदल सकें

अगर बच्चा बहुत छोटा है या ज्यादा हिलता‑डुलता है, तो हमेशा एक हाथ उसके ऊपर रखें और इतनी नज़दीक रहें कि वह लुढ़क कर नीचे न गिर सके।

बेबी मसाज के लिए तेल कैसे चुनें

मालिश के लिए थोड़ा‑सा बेबी मसाज के लिए तेल ज़रूर रखें, ताकि आपके हाथ आसानी से फिसलें और बच्चे की नाज़ुक त्वचा न खिंचे।

भारत में आमतौर पर ये विकल्प इस्तेमाल होते हैं:

  • कोल्ड‑प्रेस्ड नारियल तेल
    हल्की सुगंध, गर्म हाथों में तुरंत पिघल जाता है। गर्मियों में खास पसंद किया जाता है।
    (कई परिवारों के लिए यह सबसे पसंदीदा बेबी मसाज के लिए नारियल तेल है।)

  • सरसों का तेल (ठंडे मौसम में)
    दादी‑नानी का पुराना नुस्खा, लेकिन हमेशा 100% शुद्ध लें और इस्तेमाल से पहले थोड़ी‑सी त्वचा पर टेस्ट ज़रूर करें। कुछ बच्चों को इससे जलन हो सकती है।

  • तिल का तेल या बादाम का तेल
    हल्का और अक्सर बच्चों की त्वचा को सूट करता है। पर अगर परिवार में नट एलर्जी का इतिहास हो या बच्चे को एक्ज़िमा हो, तो मीठा बादाम तेल इस्तेमाल करने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ या त्वचा रोग विशेषज्ञ से बात कर लें।

अच्छा बेबी मसाज ऑयल चुनते समय:

  • जितना हो सके प्राकृतिक, खाने योग्य क्वालिटी का, बिना तेज़ केमिकल फ्रेगरेंस वाला तेल लें
  • पहले बच्चे के पैर या हाथ पर थोड़ा‑सा लगाकर 24 घंटे देखें, कोई लालिमा, खुजली या दाने तो नहीं आते
  • ज़रूरत न हो तो तेज़ महक वाले एसेंशियल ऑयल से बचें, खासकर बिना किसी एक्सपर्ट की सलाह के

तेल लगाने से पहले उसे हथेलियों में लेकर हल्का गरम कर लें। ठंडे हाथ या ठंडा तेल, बच्चे की गरम त्वचा पर अच्छा नहीं लगता।

बच्चे को कैसे तैयार करें

  • बच्चे के कपड़े उतार दें, केवल नैपी रहने दें, या अगर कमरा पर्याप्त गरम है और आप तैयार हैं छोटे‑मोटे «एक्सिडेंट» के लिए, तो नैपी भी हटा सकते हैं
  • शुरुआत में बच्चे को पीठ के बल लिटाएँ, ताकि चेहरा दिखता रहे और आप उसके भाव आसानी से पढ़ सकें
  • पास में एक छोटा तौलिया या मलमल रखें, जिससे जरूरत पड़ने पर किसी हिस्से को ढक सकें या ठंड लगने पर तुरंत ओढ़ा सकें

आपका अपना मन‑मिजाज

एक गहरी सांस लें। थोड़ा धीरे चलें।

आपको «परफेक्ट» करना ज़रूरी नहीं। बच्चा किसी किताब के मॉडल नहीं, बस अपने माता‑पिता के प्यार भरे हाथ चाहता है, भले ही स्टेप सौ प्रतिशत याद न हों।

ज़रूरी बातें: बच्चे की मसाज सुरक्षित तरीके से कैसे करें

नवजात शिशु मसाज के तरीके शुरू करने से पहले कुछ सुनहरे नियम याद रखें।

  • हमेशा आँखों से संपर्क बनाए रखें
    मालिश के दौरान बार‑बार बच्चे की तरफ देखें। चेहरा, आंखें, हाथ‑पैर सब ध्यान से देखें कि वह आराम में है या बेचैन हो रहा है।

  • बच्चे से बात करें
    हल्की, मुलायम आवाज़ में बात करें। आप जो कर रहे हैं, उसे बयान कर सकते हैं, गुनगुना सकते हैं या बस कह सकते हैं:
    «मम्मी अभी तुम्हारी टाँगें दबा रही है, अच्छा लग रहा है न…»
    असली बात शब्द नहीं, आपका टोन और कनेक्शन है।

  • रुकने के संकेत पहचानें
    अगर बच्चा:

    • बहुत रोने लगे और शांत न हो
    • बार‑बार चेहरा दूसरी तरफ घुमा ले
    • शरीर सख्त कर ले या हाथ‑पैर बहुत तेज़ी से फेंकने लगे
    • कमर मोड़ कर पीछे की तरफ झुकाए, चेहरा बेचैन लगे

    तो रुक जाएँ। उसे गोद में लेकर शांत करें, दूध दें या किसी और वक्त कोशिश करें। कभी ज़बरदस्ती न करें।

  • दबाव कितना रखें
    न बहुत हल्का, कि सिर्फ गुदगुदी लगे, न बहुत ज़्यादा। ऐसा समझिए, जितने दबाव से आप अपनी पलकों पर क्रीम मलते, वैसा कोमल लेकिन कॉन्फिडेंट प्रेशर ठीक रहता है।

  • कुल समय कितना रखें
    शुरुआत में छोटा रखें। कुल मिलाकर 10 से 15 मिनट काफी होते हैं। बच्चा पहले ही थक जाए तो यहीं खत्म कर देना बेहतर है।

स्टेप‑बाय‑स्टेप बेबी मसाज तकनीकें

आप इस पूरे क्रम को फॉलो कर सकते हैं, या बच्चे की पसंद और समय के हिसाब से छोटा‑बड़ा कर सकते हैं। ज़्यादातर लोग टांगों से शुरुआत करना पसंद करते हैं, क्योंकि बच्चे अक्सर उसे सबसे ज्यादा सहन कर लेते हैं।

1. टाँगें और पैर

बेबी मसाज कैसे करें सीखने के लिए यह सबसे आसान हिस्सा है।

  1. कूल्हे से टखने तक लंबे स्ट्रोक

    • हाथों में थोड़ा तेल लें
    • दोनों हाथों से बच्चे की जाँघ पकड़ें और मुलायम दबाव के साथ कूल्हे से टखने की तरफ फिसलाते हुए नीचे आएँ
    • लय बनाते हुए एक हाथ के बाद दूसरा हाथ इस तरह चलाएँ कि टांग पर नरम‑सा दबाव महसूस हो
    • हर टांग पर यह मूवमेंट कई बार दोहराएँ
  2. पैर पर हल्का प्रेशर

    • बच्चे का पैर अपनी हथेली में लें
    • अपने अंगूठे से एड़ी से उँगलियों की तरफ बहुत हल्का दबाव बनाते हुए ऊपर जाएँ
    • चाहें तो पूरे तलवे को अपने हाथ की हथेली में हल्के‑से दबा सकते हैं, जैसे बहुत नर्म‑सा हैंडशेक
  3. उंगलियों पर हल्की गोलाई

    • हर छोटी उँगली को अंगूठे और उँगली के बीच पकड़ें
    • बेहद हल्की गोलाई बनाते हुए या हल्का‑सा खींचते हुए ऊपर की तरफ जाएँ
    • इसे खेल की तरह रखें, बच्चे से बात करें, चाहें तो उँगलियाँ गिनते जाएँ

अगर आप बच्चे की गैस और कोलिक के लिए मसाज पर फोकस करना चाहते हैं, तो टाँगों की मसाज पेट की मसाज के साथ बहुत अच्छा कॉम्बिनेशन बनती है।

2. पेट की मसाज

पेट पर मसाज केवल तब करें जब:

  • पिछली फीड को कम से कम 30 मिनट हो चुके हों
  • इस समय बच्चे को रिफ्लक्स या उल्टी जैसे लक्षण न हों
  • नाभि की रस्सी का हिस्सा पूरी तरह से सूख कर गिर चुका हो और ठीक हो चुका हो

यह हिस्सा खास तौर पर बेबी मसाज गैस के लिए उपयोगी माना जाता है।

  1. घड़ी की दिशा में गोलाई

    • अपनी उँगलियाँ सीधी रख कर बच्चे की पसलियों के ठीक नीचे रखें
    • बहुत हल्के लेकिन लगातार प्रेशर के साथ घड़ी की दिशा में गोल‑गोल घुमाएँ (आपको सामने से देखने पर दाएँ से बाएँ की तरफ)
    • यही दिशा आँतों की दिशा होती है, इससे गैस आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है
  2. «आई लव यू» स्ट्रोक फॉर गैस
    कई शिशु मसाज क्लास में यह सिखाया जाता है:

    • पहले बच्चे की बाईं तरफ (आपके सामने होने पर आपकी दाईं तरफ) ऊपर से नीचे की तरफ एक सीधी लाइन बनाइए - यही «I» है
    • फिर उल्टा «L» बनाइए - पेट के ऊपरी हिस्से में दाईं से बाईं तरफ जाएँ, फिर बाईं तरफ से नीचे की तरफ आएँ
    • आखिर में उल्टा «U» - बच्चे की दाईं तरफ नीचे से ऊपर, फिर ऊपर से बाईं तरफ, फिर बाईं तरफ से नीचे
      ये सारे स्ट्रोक भी कोलन की दिशा में ही चलते हैं, जिससे गैस और मल आगे बढ़ने में मदद मिल सकती है।
  3. साइकिल वाली टाँगें

    • दोनों टखनों को हल्के से पकड़ें
    • एक पैर को पेट की तरफ मोड़ें, दूसरा सीधा रखें, फिर बदल लें - जैसे बच्चा साइकिल चला रहा हो
    • चाहें तो दोनों घुटनों को एक साथ धीरे से पेट की तरफ मोड़ें, एक पल रखें, फिर सीधा कर दें
    • पूरा मूवमेंट बहुत हल्का और खेल की तरह रखें

अगर आप खास तौर पर नवजात शिशु मसाज पेट के दर्द या कब्ज के लिए कर रहे हैं, तो ये क्लासिक तकनीकें काफी लोकप्रिय हैं।

3. हाथ और हथेलियाँ

तरीका टाँगों जैसा ही है, बस साइज छोटा और और भी नाज़ुक।

  1. कंधे से कलाई तक लंबे स्ट्रोक

    • एक हाथ से बच्चे का ऊपरी बाजू सँभालें
    • दूसरे हाथ से कंधे से कलाई की तरफ कोमल स्ट्रोक देते हुए आएँ
    • अब हाथ बदलें और हल्की लय में यह मूवमेंट दोहराएँ
    • हर हाथ पर कुछ बार ऐसा करें
  2. हथेली खोलना

    • छोटे बच्चे अक्सर मुट्ठी बंद रखते हैं
    • अपनी उँगली को बच्चे की हथेली में हल्का‑सा दबाएँ, ताकि उसकी उँगलियाँ आपके उँगली के चारों तरफ खुल जाएँ
    • जबरदस्ती न करें, अगर बच्चा बहुत कस कर पकड़े रहे तो अगली बार ट्राई करें
  3. उँगली‑उँगली मसाज

    • हर उँगली को अपने अंगूठे और उँगली के बीच में लें
    • बेस से टिप की तरफ हल्का रोल करें या बहुत छोटे गोल‑गोल घुमाएँ
    • साथ‑साथ बच्चे से मुलायम आवाज़ में बात करते रहें

यह हिस्सा शिशु मसाज के तरीके में इसलिए भी अच्छा है, क्योंकि इससे बच्चा अपने हाथों पर टच का आदी हो जाता है। आगे चलकर नाखून काटना या हाथ धोना थोड़ा आसान लग सकता है।

4. सीने की मसाज

छाती का हिस्सा ज्यादा सेंसिटिव होता है, इसलिए यहाँ हमेशा मूवमेंट बहुत नरम और धीमे रखें।

  1. दिल के आकार जैसी स्ट्रोक
    • दोनों हाथों को बच्चे की छाती के बीच में हल्के से रखें
    • अब हाथों को बाहर की तरफ और नीचे की तरफ ऐसे फिसलाएँ जैसे आप दिल का ऊपरी हिस्सा बना रहे हों, और फिर पसलियों के किनारों तक ले जाएँ
    • हाथ उठा कर फिर बीच में लाकर दोहराएँ
    • इस दौरान बच्चे के चेहरे पर नज़र रखें कि सब कुछ आरामदायक लग रहा है या नहीं

छाती की मसाज बच्चे की सांस को शांत रखने में मदद कर सकती है और पूरे शरीर को रिलैक्स कर सकती है।

5. पीठ की मसाज

पीठ की मसाज आप बच्चे को गोद में पेट के बल रखकर भी कर सकते हैं या नीचे चटाई पर भी।

हमेशा याद रखें: रीढ़ की हड्डी पर सीधा दबाव नहीं, हमेशा दोनों तरफ काम करें।

  1. पोज़िशन सेट करें

    • बच्चे को बहुत हल्के से करवट देकर या गोद में उठाकर पेट के बल सुलाएँ
    • या उसे अपने पैरों पर पेट के बल लिटाएँ, सिर साइड में हो ताकि सांस आराम से चलती रहे
    • ध्यान रहे कि चेहरा किसी भी हालत में नीचे दबा न हो
  2. गर्दन से कूल्हे तक लंबे स्ट्रोक

    • हाथों में थोड़ा तेल लें
    • गर्दन के पीछे से (रीढ़ पर नहीं, दोनों तरफ) शुरू करके, मुलायम दबाव के साथ हाथों को कूल्हों की तरफ फिसलाएँ
    • एक हाथ के बाद दूसरा हाथ, जैसे नर्म‑सा झरना बह रहा हो
    • कुछ बार इन स्ट्रोक को दोहराएँ
  3. रीढ़ के दोनों किनारों पर छोटी गोलाई

    • अपनी उँगलियों के पोर रीढ़ से हल्का हटाकर दोनों तरफ रखें
    • बहुत छोटे‑छोटे गोले बनाते हुए ऊपर से नीचे की तरफ आएँ
    • पूरा समय बच्चे के हावभाव पर नज़र रखें

थोड़ा बड़ा होने पर कई बच्चों को बाथ के बाद बेबी मसाज में ये बैक मसाज वाले स्टेप्स सबसे अधिक पसंद आते हैं, खासकर जो बच्चे टमी टाइम पहले से एन्जॉय करते हों।

6. चेहरे की मसाज

अंत में चेहरे की मसाज छोटी‑सी «स्पा ट्रीटमेंट» जैसी महसूस हो सकती है।

यहाँ तेल बहुत कम या बिल्कुल न इस्तेमाल करें, खासकर आँखों के आसपास।

  1. माथे पर स्ट्रोक

    • बच्चे को पीठ के बल लिटाकर, दोनों अंगूठों को माथे के बीच में रखें
    • हल्के दबाव के साथ बाहर की तरफ कनपटियों की दिशा में ले जाएँ
    • कुछ बार दोहराएँ - रोने या दांत निकलने के समय यह काफी सुकून दे सकता है
  2. गालों पर छोटे गोल‑गोल मूवमेंट

    • उँगलियों के पोर से नर्म‑सी गोलाई बनाते हुए नाक के पास से गालों के बाहर की तरफ जाएँ
    • मूवमेंट बहुत छोटा और धीमा रखें
  3. जबड़े की लाइन

    • ठुड्डी से कान की तरफ, जबड़े की लाइन के साथ‑साथ उँगलियों को हल्के से घुमाएँ
    • दांत निकलने के समय ये टच कई बार बच्चों को आराम देता है

चेहरे की मसाज करते समय आप आँखों में आँखें डाल कर बात भी कर सकते हैं, इससे आपका और बच्चे का कनेक्शन और मजबूत महसूस होता है।

कब न करें बच्चे की मसाज

कभी‑कभी नवजात शिशु मसाज कैसे करें से ज्यादा ज़रूरी होता है जानना कि «आज नहीं करना है»। यही संवेदनशीलता अच्छी पैरेंटिंग का हिस्सा है।

इन स्थितियों में मसाज से बचें:

  • बच्चे को तेज बुखार हो या वह सामान्य से बहुत अलग, सुस्त या बीमार लगे
  • जिस जगह मसाज करनी है वहाँ दाने, रैश, कट या कोई और त्वचा की दिक्कत दिखे
  • हाल ही में टीका लगा हो और इंजेक्शन वाली जगह लाल, सूजी या दर्दनाक लगे
  • बच्चा साफ‑साफ «ना» कह रहा हो - लगातार रोकर, शरीर सख्त करके, मुंह दूसरी तरफ घुमाकर

शक हो तो अपने बाल रोग विशेषज्ञ, नज़दीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर या किसी प्रशिक्षित शिशु मसाज प्रशिक्षक से सलाह ले सकते हैं।

सबको एक साथ जोड़कर देखें

कुछ ही दिनों की प्रैक्टिस के बाद बेबी मसाज किसी रटे‑रटाए स्क्रिप्ट जैसी नहीं लगती, बल्कि बच्चे के शरीर से बातचीत जैसी महसूस होती है।

आप चाहें तो:

  • जब शाम शांत हो और आपके पास 10‑15 मिनट हों, तब पूरा सीक्वेंस कर सकते हैं
  • जिस दिन गैस ज्यादा हो, सिर्फ पैरों और पेट तक सीमित रहकर बच्चे की गैस और कोलिक के लिए मसाज पर फोकस कर सकते हैं
  • रात को सोने से पहले 5‑7 मिनट की छोटी‑सी बच्चे की नींद के लिए मसाज कर सकते हैं - सीना, बाहें और चेहरा

समय के साथ आप खुद समझने लगेंगे कि आपके बच्चे को कितना प्रेशर पसंद है, कौन‑सा स्टेप वह ज्यादा एन्जॉय करता है और किस समय मसाज उसके लिए सबसे अच्छा काम करती है। यही असली कला है बेबी मसाज कैसे करें की - सामने वाले बच्चे को देखना, किताब की परफेक्ट तस्वीर को नहीं।

अगर कभी बहुत कन्फ्यूज़ महसूस करें, तो कई शहरों में अस्पताल, मातृ एवं शिशु कल्याण केंद्र, और प्राइवेट प्रैक्टिशनर छोटे‑छोटे शिशु मसाज कोर्स करवाते हैं। किसी एक्सपर्ट से लाइव डेमो देखकर और खुद ट्राय करके कॉन्फिडेंस और बढ़ जाता है।

फिलहाल आपके पास अच्छी शुरुआत के लिए सब कुछ है - गरम कमरा, गरम हाथ, थोड़ा‑सा तेल और 10 मिनट की पूरी मौजूदगी।

इतना‑सा रोज़ का रुटीन पाचन को सपोर्ट कर सकता है, कोलिक और गैस में थोड़ी राहत दे सकता है, नींद बेहतर कर सकता है, माँ और बच्चे के बीच बंधन गहरा कर सकता है और बेबी मसाज से तनाव कम करने में भी मदद कर सकता है। लगभग बिना किसी खर्च के, आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में आसानी से फिट हो जाने वाला ये छोटा‑सा कदम, लंबे समय तक खूबसूरत असर छोड़ सकता है।


यह सामग्री केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और इसका उपयोग आपके डॉक्टर, बाल रोग विशेषज्ञ या अन्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर की सलाह के विकल्प के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। यदि आपके कोई प्रश्न या चिंताएँ हैं, तो आपको स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।
हम, Erby ऐप के डेवलपर्स, इस जानकारी के आधार पर आपके द्वारा लिए गए किसी भी निर्णय के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं लेते हैं, जो केवल सामान्य सूचना के उद्देश्यों के लिए प्रदान की गई है और व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है।

Erby — नवजात शिशुओं और स्तनपान कराने वाली माँओं के लिए बेबी ट्रैकर

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