घर नया हो, बच्चा नया हो, तो सब कुछ जादुई भी लगता है और थोड़ा डरावना भी। नन्ही‑सी आँखें, छोटी‑सी नाक, लगता है बस छूने से कुछ हो न जाए।
यह डर आम है।
यह गाइड खास तौर पर नवजात शिशु आंख की देखभाल और नवजात शिशु नाक की देखभाल के लिए लिखा गया है, ताकि शुरुआती हफ्तों की घबराहट कम हो सके। आसानी से समझ आने वाली भाषा, छोटे‑छोटे स्टेप, बिना बेवजह की टेंशन। क्या करना है, क्या सामान्य है, और कब डॉक्टर या बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाना ज़रूरी है, बस वही सब।
नवजात की आँखें बेहद नाज़ुक दिखती हैं, लेकिन थोड़ा अभ्यास हो जाए तो बच्चे की आँखों की देखभाल रोज़मर्रा की साधारण चीज़ लगने लगती है।
ज़्यादातर बच्चों के लिए शिशु आंखें कैसे साफ करें का मतलब बस ठंडा किया हुआ उबला पानी या सलाइन से हल्की सफाई है, कोई महंगे प्रोडक्ट की ज़रूरत नहीं।
आपको क्या चाहिए:
कैसे करें (दिन में 1 बार या ज़रूरत के अनुसार):
सबसे पहले हाथ धोएँ
साबुन और पानी से अच्छी तरह धोकर अच्छी तरह सुखा लें। बच्चे की आँखों की देखभाल में यही सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।
पानी या सलाइन तैयार करें
हर आँख के लिए अलग पैड
भीतर के कोने से बाहर की ओर पोंछें
ज़रूरत हो तो दोहराएँ
अगर नवजात आंख से पपड़ी या गंदगी ज़्यादा जमी हो, तो 1‑2 बार दोहरा सकते हैं, लेकिन हर बार नया पैड लें और हर बार अंदर से बाहर की तरफ ही पोंछें।
इलाके को सुखाएँ
साफ, नरम कपड़े से हल्के‑हल्के थपथपा कर सुखा दें या अपने आप सूखने दें।
इसे आप रोज़ एक बार, आमतौर पर सुबह की नहलाने / पोछने की रूटीन में, और जितनी बार ज़रूरत हो कर सकते हैं अगर आँखें चिपचिपी लगें।
ज़रा‑सा नवजात आँख से स्राव दिखते ही कई माता‑पिता घबरा जाते हैं। लेकिन हल्का स्राव अक्सर सामान्य होता है।
आपको दिख सकता है:
आमतौर पर:
जब तक बच्चा ठीक से दूध पी रहा हो, बाकी सेहत ठीक हो, और आँख की सफेदी साफ दिखे (लाल न हो), तब तक ऐसे हल्के स्राव को सामान्य नवजात शिशु आंख की देखभाल का हिस्सा माना जाता है।
पहले कुछ हफ्तों में माता‑पिता की बड़ी चिंता होती है शिशु की आँख बार‑बार चिपकना या पानी आना। आप साफ करते हैं, थोड़ी देर बाद फिर वही।
ज़्यादातर मामलों में वजह होती है नवजात आँसू की नली बंद होना, जिसे मेडिकल भाषा में dacryostenosis कहते हैं।
आँसू की नलियाँ आँख से नाक के अंदर तक जाती छोटी‑सी सुरंगें होती हैं, जिनसे आँसू बह कर नाक तक चले जाते हैं। कई बच्चों में जन्म के समय ये नलियाँ पूरी तरह नहीं खुली होतीं। यही dacryostenosis है।
आपको ये बातें नज़र आ सकती हैं:
यह ध्यान रखने जैसी बात है कि ऐसे समय आँख की सफेदी आमतौर पर लाल नहीं होती, सामान्य दिखती है। यही फर्क है, साधारण ब्लॉक्ड टियर डक्ट और असली इन्फेक्शन के बीच।
अधिकतर मामलों में हल्के‑फुल्के उपायों से आप घर पर ही मदद कर सकते हैं - साफ‑सफाई और हल्की मालिश से।
ऊपर बताई गई रोज़ाना आँख साफ करने की दिनचर्या अपनाएँ:
यही वह हिस्सा है जिससे ज्यादातर लोग घबराते हैं, लेकिन सही तरीका जान लें तो आसान है। यहाँ जानिए नवजात आँसू की नली बंद होने पर मालिश कैसे करें:
हथेली साफ करें, नाखून छोटे रखें
हाथ अच्छे से धोएँ, नाखून अगर बड़े हों तो काट लें।
सही जगह पहचानें
हल्का दबाव, नीचे की ओर स्ट्रोक
दिन में 2–3 बार दोहराएँ
सुबह‑शाम एक बार, और अगर आँख बहुत चिपचिपी हो तो दिन में एक बार और कर सकते हैं।
आप इसे ऐसे समझें जैसे आप झिल्ली की पतली परत पर हल्का प्रेशर देकर रास्ता बनाने में मदद कर रहे हों। समय के साथ इससे नली खुलने में मदद मिलती है।
ज़्यादातर बच्चों में नवजात आँसू की नली बंद होने की समस्या धीरे‑धीरे कम होती जाती है और:
अगर एक साल की उम्र के बाद भी दिक्कत बनी रहे या बार‑बार संक्रमण हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ आपको आँख के स्पेशलिस्ट (पेडियाट्रिक ऑफ़्थैल्मोलॉजिस्ट) के पास भेज सकते हैं।
भले ही dacryostenosis ज़्यादातर समय हल्की समस्या होती है, लेकिन कुछ हालात में तुरंत सलाह लेना ज़रूरी है:
भारत में ऐसे समय:
आँखों का इंफ़ेक्शन तेज़ी से बढ़ सकता है, इसलिए संदेह होने पर चेक करवा लेना बेहतर है।
छोटे बच्चे खासकर शुरुआती महीनों में लगभग पूरी तरह नाक से साँस लेने वाले (obligate nose breathers) होते हैं। मतलब:
वे ज़्यादातर साँस नाक से ही लेते हैं, मुँह से बहुत कम और उतनी कुशलता से नहीं।
इसलिए हल्की‑सी नवजात शिशु नाक बंद या नवजात नाक बहना भी बहुत परेशान करने वाला लग सकता है।
कई वजहों से शिशु नाक की आवाज़, हल्का जाम होना या नाक बहना बहुत आम है:
नाक के अंदर की जगह बहुत पतली होती है
जितनी छोटी नाक, उतनी ही पतली हवा की नलियाँ। ज़रा‑सा म्यूकस भी तेज़ आवाज़ कर सकता है।
हवा में सूखापन
गर्मियों में तेज़ कूलर या AC, सर्दियों में हीटर, इन सब से कमरे की हवा सूखी हो जाती है, जिससे म्यूकस गाढ़ा हो जाता है।
धूल और दूसरे इरिटेंट
धूल, धुआँ, अगरबत्ती या तेज़ परफ्यूम, कमरे में कीटनाशक स्प्रे, पालतू जानवरों के बाल - यह सब नन्हे बच्चे की नाक को चिढ़ा सकते हैं।
इस वजह से आपको अक्सर ये सब सुनाई दे सकता है:
इन सबका मतलब यह नहीं कि हर बार सर्दी या गंभीर बीमारी है।
शिशु नाक सफाई कैसे करें यह जानना माता‑पिता के लिए बहुत काम की चीज़ है। इससे बच्चे को दूध पीने और सोने में आसानी होती है, और आपको भी यह भरोसा रहता है कि वह आराम से सांस ले पा रहा है।
सलाइन यानी हल्का नमक मिला सादा पानी, जो शरीर के तरल की ही तरह की मात्रा में नमक रखता है। दवा की दुकानों पर बच्चों के लिए अलग से बना हुआ नवजात नाक के लिए सलाइन ड्रॉप या छोटे वायल में मिल जाता है।
सलाइन ड्रॉप कैसे डालें (हर नथुने में 1–2 ड्रॉप):
बच्चे की पोज़िशन ठीक करें
सलाइन डालें
करीब 30 सेकंड रुकें
अब म्यूकस साफ करें
अब आप किसी नैज़ल एस्पिरेटर या बल्ब सिरिंज का इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि नरमी से म्यूकस बाहर निकले।
पहली बार ज़्यादातर माता‑पिता हिचकिचाते हैं, लेकिन दो‑तीन बार करने पर यह भी रूटीन बन जाता है।
यहाँ जानें बल्ब सिरिंज से शिशु नाक सफाई कैसे करें:
सबसे पहले बल्ब को दबाकर हवा निकालें
नथुने के मुहाने पर हल्के से रखें
धीरे‑धीरे पकड़ छोड़ें
निकालें और खाली करें
ज़रूरत पड़े तो दोहराएँ
प्रयोग के बाद साफ रखें
मार्केट में पाइप से खींचने वाले नैज़ल एस्पिरेटर भी मिलते हैं। सिद्धांत वही है - बहुत हल्का सक्षन, ज़बरदस्ती नहीं।
कुछ चीज़ों से बचना ज़रूरी है:
कॉटन बड नाक के अंदर न डालें
इससे नाक की मुलायम परत कट सकती है या म्यूकस और अंदर धकेल सकता है।
बड़ों के लिए बने डीकंजेस्टेंट स्प्रे या ड्रॉप न लगाएँ
ये नवजात के लिए सुरक्षित नहीं हैं, जब तक डॉक्टर ने खास तौर पर न लिखा हो।
एस्पिरेटर का ज़्यादा इस्तेमाल न करें
दिन भर बार‑बार करने से नाक की परत सूज सकती है और तकलीफ बढ़ सकती है।
आमतौर पर सिर्फ फीड से पहले और रात की नींद से पहले इस्तेमाल काफी होता है।
ज़्यादातर बच्चों के लिए बस नवजात नाक के लिए सलाइन और हल्का सक्षन ही काफी होता है, इससे दूध पीना और सांस लेना दोनों आसान हो जाता है।
छोटे बच्चे स्वभाव से ही थोड़ा शोर मचाकर साँस लेते हैं। आप सुन सकते हैं:
ज़्यादातर बार यह सब नाक की पतली नलियों और हल्की म्यूकस परत की वजह से होता है, कोई गंभीर नवजात शिशु नाक बंद ज़रूरी नहीं।
आमतौर पर इसे सामान्य मान सकते हैं, अगर:
अगर आप परेशान हों तो बच्चे को सोते समय ध्यान से देखें। अगर वह गुलाबी दिख रहा है, आराम से लेटा हुआ है, और साँस सामान्य रफ्तार से चल रही है, सिर्फ थोड़ी सूँघने‑सी आवाज़ है, तो यह आमतौर पर ठीक है।
कभी‑कभी नाक की जकड़न सिर्फ शोर नहीं बल्कि असल परेशानी का संकेत होती है। ऐसे समय में डॉक्टर की सलाह जल्दी लेनी चाहिए:
जकड़न की वजह से दूध न पी पाना
बच्चा बमुश्किल कुछ घूँट ही पी पाता हो, फिर सांस लेने के लिए रुकना पड़े, और यह बार‑बार हो।
साँस बहुत तेज़ चलना
आराम की हालत में भी प्रति मिनट लगभग 60 से ज़्यादा साँसें, और यह तेजी देर तक बनी रहे।
नथुनों का बार‑बार फूलना
हर साँस के साथ नथुने साफ‑साफ फैलते‑सिकुड़ते दिखें।
चेस्ट रिट्रैक्शन
साँस लेते समय पसलियों के बीच, नीचे या गर्दन के ऊपर की त्वचा अंदर की तरफ गहराई तक खिंचती दिखे।
जकड़न के साथ बुखार
अगर 3 महीने से छोटे बच्चे में तापमान 38°C या उससे ज़्यादा हो और साथ में नवजात नाक बहना या नाक बंद भी हो।
बहुत सुस्ती या दूध कम पीना
बच्चा उठाने पर भी मुश्किल से जागे, बहुत ढीला‑सा लगे, या रोज़ के मुकाबले बहुत कम फीड ले रहा हो।
ऐसी स्थिति में भारत में:
अपनी अंदरूनी भावना पर भरोसा रखें। आप अपने बच्चे को सबसे बेहतर महसूस कर सकते हैं।
थोड़ा‑सा वातावरण बदलकर भी बच्चे की नाक की जकड़न में काफी आराम मिल सकता है।
कूल मिस्ट ह्यूमिडिफायर कमरे की हवा में नमी बढ़ा देता है। इससे:
सुरक्षित इस्तेमाल के लिए ध्यान रखें:
अगर ह्यूमिडिफायर न हो तो एक साधारण उपाय है कि बच्चे के कमरे में हल्के कपड़े सुखाएँ। जैसे रात में रूम में छोटे तौलिये टाँग दें (लेकिन बच्चे के बिलकुल पास या हीटर/रॉड के ऊपर नहीं), इससे हवा में थोड़ी नमी बढ़ती है।
कमरे की हवा धुआँमुक्त रखें
सिगरेट, अगरबत्ती या रसोई का ज़्यादा धुआँ नन्हे बच्चे की नाक और फेफड़ों दोनों के लिए परेशान करने वाला हो सकता है।
तेज़ खुशबूओं से बचें
बच्चे के कमरे में तेज़ परफ्यूम, रूम फ्रेशनर, सुगंधित मोमबत्ती, फ्लोर क्लीनर या कीटनाशक स्प्रे का कम से कम उपयोग करें।
सिर ऊँचा करने के बारे में सावधानी
बड़े बच्चों में कभी‑कभी गद्दे का सिर वाला हिस्सा थोड़ा ऊँचा कर देते हैं, पर नवजात के लिए हमेशा सुरक्षित नींद के नियम मानें - बच्चा पीठ के बल, सपाट और कड़ा गद्दा, बिना तकिये के। गद्दा ऊँचा करने से पहले अपने बाल रोग विशेषज्ञ या आशा/एएनएम/नर्स से राय ले लें।
नवजात की देखभाल में शुरुआत में सब कुछ लिस्ट जैसा लगता है। लेकिन नवजात शिशु आंख की देखभाल और नवजात शिशु नाक की देखभाल की बात करें तो बात सिमट जाती है:
चिपचिपी आँखें, नवजात आँसू की नली बंद, हल्की‑सी नवजात नाक बहना या नवजात शिशु नाक बंद - ये सब शुरुआती महीनों का आम हिस्सा हैं। थोड़ी जानकारी, थोड़ा अभ्यास और साफ रूटीन से आप इन्हें आराम से संभाल सकते हैं।
और अगर कभी भी मन में सवाल उठे कि यह सामान्य है या नहीं, तो अपने बाल रोग विशेषज्ञ, नज़दीकी सरकारी अस्पताल या विश्वसनीय डॉक्टर से बात करें। जब बात बच्चे की आँखों और नाक की हो, तो कोई भी सवाल छोटा नहीं होता।