नवजात शिशु की आँख और नाक की देखभाल: आसान स्टेप, घरेलू उपचार और कब डॉक्टर दिखाएँ

नवजात बच्चे की आँख और नाक साफ करते माता‑पिता

घर नया हो, बच्चा नया हो, तो सब कुछ जादुई भी लगता है और थोड़ा डरावना भी। नन्ही‑सी आँखें, छोटी‑सी नाक, लगता है बस छूने से कुछ हो न जाए।

यह डर आम है।

यह गाइड खास तौर पर नवजात शिशु आंख की देखभाल और नवजात शिशु नाक की देखभाल के लिए लिखा गया है, ताकि शुरुआती हफ्तों की घबराहट कम हो सके। आसानी से समझ आने वाली भाषा, छोटे‑छोटे स्टेप, बिना बेवजह की टेंशन। क्या करना है, क्या सामान्य है, और कब डॉक्टर या बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाना ज़रूरी है, बस वही सब।


आपके नवजात की आँखों की देखभाल

नवजात की आँखें बेहद नाज़ुक दिखती हैं, लेकिन थोड़ा अभ्यास हो जाए तो बच्चे की आँखों की देखभाल रोज़मर्रा की साधारण चीज़ लगने लगती है।

रोज़ाना आँख साफ करने की आसान दिनचर्या

ज़्यादातर बच्चों के लिए शिशु आंखें कैसे साफ करें का मतलब बस ठंडा किया हुआ उबला पानी या सलाइन से हल्की सफाई है, कोई महंगे प्रोडक्ट की ज़रूरत नहीं।

आपको क्या चाहिए:

  • ताज़ा उबाला हुआ पानी, जो कमरे के तापमान पर ठंडा हो चुका हो, या बाजार से मिला स्टेराइल सलाइन सॉल्यूशन
  • साफ कॉटन वूल पैड (कॉटन बड / कान साफ करने वाली छड़ी नहीं)
  • साफ तौलिया या मुलमल का कपड़ा

कैसे करें (दिन में 1 बार या ज़रूरत के अनुसार):

  1. सबसे पहले हाथ धोएँ
    साबुन और पानी से अच्छी तरह धोकर अच्छी तरह सुखा लें। बच्चे की आँखों की देखभाल में यही सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

  2. पानी या सलाइन तैयार करें

    • अगर उबला हुआ पानी ले रहे हैं तो केतली या पैन में पानी उबाल लें, फिर पूरी तरह ठंडा होने दें।
    • थोड़ा सा पानी एकदम साफ कटोरी या गिलास में निकालें।
    • सलाइन सॉल्यूशन (दवा की दुकान से) सीधे बोतल से इस्तेमाल किया जा सकता है।
  3. हर आँख के लिए अलग पैड

    • कॉटन पैड को पानी या सलाइन में भिगोएँ।
    • हल्के से निचोड़ लें ताकि वह बस गीला रहे, टपकता हुआ नहीं।
  4. भीतर के कोने से बाहर की ओर पोंछें

    • बहुत हल्के हाथ से आँख के भीतरी कोने (नाक की तरफ वाला हिस्सा) से कान की तरफ बाहर की ओर एक बार पोंछें।
    • यही एक स्ट्रोक में करें, फिर पैड फेंक दें।
    • दूसरी आँख के लिए हमेशा नया पैड लें, भले पहली आँख बिल्कुल साफ दिख रही हो।
  5. ज़रूरत हो तो दोहराएँ
    अगर नवजात आंख से पपड़ी या गंदगी ज़्यादा जमी हो, तो 1‑2 बार दोहरा सकते हैं, लेकिन हर बार नया पैड लें और हर बार अंदर से बाहर की तरफ ही पोंछें।

  6. इलाके को सुखाएँ
    साफ, नरम कपड़े से हल्के‑हल्के थपथपा कर सुखा दें या अपने आप सूखने दें।

इसे आप रोज़ एक बार, आमतौर पर सुबह की नहलाने / पोछने की रूटीन में, और जितनी बार ज़रूरत हो कर सकते हैं अगर आँखें चिपचिपी लगें।

नवजात की आँखों में क्या सामान्य माना जाए

ज़रा‑सा नवजात आँख से स्राव दिखते ही कई माता‑पिता घबरा जाते हैं। लेकिन हल्का स्राव अक्सर सामान्य होता है।

आपको दिख सकता है:

  • नींद से उठने के बाद आँखों के कोनों पर हल्के स्राव या पपड़ी
  • शुरुआती कुछ दिनों में आँखों के आस‑पास हल्की सूजन या फूला‑फूला दिखना, खासकर अगर प्रसव लंबा चला हो या फोर्सेप/वैक्यूम की मदद ली गई हो

आमतौर पर:

  • यह हल्का स्राव साफ या थोड़ा सफेद होता है।
  • नवजात आंखें सूजी होना प्रसव के बाद के पहले कुछ दिनों में सामान्य हो सकता है और खुद‑ब‑खुद कम हो जाता है।

जब तक बच्चा ठीक से दूध पी रहा हो, बाकी सेहत ठीक हो, और आँख की सफेदी साफ दिखे (लाल न हो), तब तक ऐसे हल्के स्राव को सामान्य नवजात शिशु आंख की देखभाल का हिस्सा माना जाता है।


चिपचिपी या लगातार आँसू वाली आँख: आँसू की नली बंद होना

पहले कुछ हफ्तों में माता‑पिता की बड़ी चिंता होती है शिशु की आँख बार‑बार चिपकना या पानी आना। आप साफ करते हैं, थोड़ी देर बाद फिर वही।

ज़्यादातर मामलों में वजह होती है नवजात आँसू की नली बंद होना, जिसे मेडिकल भाषा में dacryostenosis कहते हैं।

Dacryostenosis क्या है?

आँसू की नलियाँ आँख से नाक के अंदर तक जाती छोटी‑सी सुरंगें होती हैं, जिनसे आँसू बह कर नाक तक चले जाते हैं। कई बच्चों में जन्म के समय ये नलियाँ पूरी तरह नहीं खुली होतीं। यही dacryostenosis है।

  • यह बहुत आम है, अलग‑अलग रिपोर्ट के मुताबिक लगभग हर 5 में से 1 नवजात में किसी न किसी हद तक देखा जाता है।
  • एक आँख में भी हो सकता है, दोनों में भी।
  • ज़्यादातर मामलों में यह अपने‑आप ठीक हो जाता है, और नुकसानदायक नहीं होता।

नवजात में आँसू नली बंद लक्षण

आपको ये बातें नज़र आ सकती हैं:

  • आँख में हमेशा पानी भरा या बहता हुआ दिखे, जबकि बच्चा रो नहीं रहा हो
  • खासकर झपकी के बाद पीला या हल्का चिपचिपा स्राव, यानी नवजात आंख से पपड़ी
  • पलक की पलकों का आपस में चिपक जाना या “गोंद” जैसा दिखना
  • एक आँख दूसरी के मुकाबले हमेशा ज़्यादा गीली या चिपचिपी लगे

यह ध्यान रखने जैसी बात है कि ऐसे समय आँख की सफेदी आमतौर पर लाल नहीं होती, सामान्य दिखती है। यही फर्क है, साधारण ब्लॉक्ड टियर डक्ट और असली इन्फेक्शन के बीच।

घर पर उपचार: बच्चे की बंद आँसू नली कैसे खोलें

अधिकतर मामलों में हल्के‑फुल्के उपायों से आप घर पर ही मदद कर सकते हैं - साफ‑सफाई और हल्की मालिश से।

स्टेप 1: आँख को साफ रखें

ऊपर बताई गई रोज़ाना आँख साफ करने की दिनचर्या अपनाएँ:

  • ठंडा किया हुआ उबला पानी या सलाइन
  • हर आँख के लिए अलग पैड
  • अंदर के कोने से बाहर की तरफ पोंछें
  • स्राव जितना जमा हो, उसके हिसाब से दिन में कई बार भी कर सकते हैं

स्टेप 2: आँसू की थैली की हल्की मालिश (दिन में 2–3 बार)

यही वह हिस्सा है जिससे ज्यादातर लोग घबराते हैं, लेकिन सही तरीका जान लें तो आसान है। यहाँ जानिए नवजात आँसू की नली बंद होने पर मालिश कैसे करें:

  1. हथेली साफ करें, नाखून छोटे रखें
    हाथ अच्छे से धोएँ, नाखून अगर बड़े हों तो काट लें।

  2. सही जगह पहचानें

    • अपनी छोटी उंगली या अनामिका की नोक बहुत हल्के से आँख के भीतरी कोने और नाक के मिलन बिंदु पर रखें।
    • आपको एक छोटा‑सा उभार महसूस होगा, वहीं आँसू की थैली होती है।
  3. हल्का दबाव, नीचे की ओर स्ट्रोक

    • बहुत हल्के दबाव से चेहरे की तरफ थोड़ा दबाएँ और उंगली को नाक की हड्डी के साथ‑साथ लगभग 1 से 1.5 सेमी नीचे की तरफ स्लाइड करें।
    • एक बार में 4–5 स्ट्रोक करें।
    • बच्चे को दर्द नहीं होना चाहिए। हल्की बेचैनी या रोना सिर्फ छूने की वजह से हो सकता है, लेकिन तीखा दर्द जैसा रिएक्शन नहीं होना चाहिए।
  4. दिन में 2–3 बार दोहराएँ
    सुबह‑शाम एक बार, और अगर आँख बहुत चिपचिपी हो तो दिन में एक बार और कर सकते हैं।

आप इसे ऐसे समझें जैसे आप झिल्ली की पतली परत पर हल्का प्रेशर देकर रास्ता बनाने में मदद कर रहे हों। समय के साथ इससे नली खुलने में मदद मिलती है।

कितने समय में ठीक होता है?

ज़्यादातर बच्चों में नवजात आँसू की नली बंद होने की समस्या धीरे‑धीरे कम होती जाती है और:

  • आमतौर पर 6 महीने के आसपास तक काफी हद तक ठीक हो जाती है
  • लगभग सभी में 1 साल की उम्र तक अपने‑आप ठीक हो जाती है

अगर एक साल की उम्र के बाद भी दिक्कत बनी रहे या बार‑बार संक्रमण हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ आपको आँख के स्पेशलिस्ट (पेडियाट्रिक ऑफ़्थैल्मोलॉजिस्ट) के पास भेज सकते हैं।

कब डॉक्टर को ज़रूर दिखाएँ - नवजात आंख से स्राव

भले ही dacryostenosis ज़्यादातर समय हल्की समस्या होती है, लेकिन कुछ हालात में तुरंत सलाह लेना ज़रूरी है:

  • आँख की सफेदी या पलकों में तेज लालिमा फैलना
  • आँख के आस‑पास ज़्यादा सूजन, गर्माहट, या चमड़ी तनी हुई लगना
  • गाढ़ा हरा या पीला, बदबूदार स्राव
  • बच्चा आँख को कस कर बंद रखे, या आप जैसे ही आँख के पास जाएँ वह तेज़ रोने लगे, जैसे दर्द हो
  • तेज बुखार, बच्चा बहुत चिड़चिड़ा या सुस्त लगे, या आपको अंदर से लगे कि कुछ ठीक नहीं है

भारत में ऐसे समय:

  • नज़दीकी बाल रोग विशेषज्ञ या परिवार के डॉक्टर को तुरंत दिखाएँ
  • अगर आसपास सरकारी अस्पताल या चिकित्सा महाविद्यालय (जैसे AIIMS, PGI, KEM आदि) की इमरजेंसी उपलब्ध हो तो सीधे वहाँ जाएँ
  • आप 108 या 102 जैसे स्थानीय आपातकालीन नंबर का भी प्रयोग कर सकते हैं, शहर के हिसाब से

आँखों का इंफ़ेक्शन तेज़ी से बढ़ सकता है, इसलिए संदेह होने पर चेक करवा लेना बेहतर है।


आपके नवजात की नाक की देखभाल

छोटे बच्चे खासकर शुरुआती महीनों में लगभग पूरी तरह नाक से साँस लेने वाले (obligate nose breathers) होते हैं। मतलब:

वे ज़्यादातर साँस नाक से ही लेते हैं, मुँह से बहुत कम और उतनी कुशलता से नहीं।

इसलिए हल्की‑सी नवजात शिशु नाक बंद या नवजात नाक बहना भी बहुत परेशान करने वाला लग सकता है।

नवजात में नाक बंद या आवाज़दार साँस सामान्य क्यों है

कई वजहों से शिशु नाक की आवाज़, हल्का जाम होना या नाक बहना बहुत आम है:

  • नाक के अंदर की जगह बहुत पतली होती है
    जितनी छोटी नाक, उतनी ही पतली हवा की नलियाँ। ज़रा‑सा म्यूकस भी तेज़ आवाज़ कर सकता है।

  • हवा में सूखापन
    गर्मियों में तेज़ कूलर या AC, सर्दियों में हीटर, इन सब से कमरे की हवा सूखी हो जाती है, जिससे म्यूकस गाढ़ा हो जाता है।

  • धूल और दूसरे इरिटेंट
    धूल, धुआँ, अगरबत्ती या तेज़ परफ्यूम, कमरे में कीटनाशक स्प्रे, पालतू जानवरों के बाल - यह सब नन्हे बच्चे की नाक को चिढ़ा सकते हैं।

इस वजह से आपको अक्सर ये सब सुनाई दे सकता है:

  • सुड़कने या सूँघने जैसी आवाज़ें
  • छोटे‑छोटे खर्राटे जैसे स्नोर्ट
  • बार‑बार छींक आना (छोटे बच्चों को छींक बहुत आती है, यह सामान्य है)

इन सबका मतलब यह नहीं कि हर बार सर्दी या गंभीर बीमारी है।


बच्चे की नाक साफ कैसे करें, सुरक्षित तरीका

शिशु नाक सफाई कैसे करें यह जानना माता‑पिता के लिए बहुत काम की चीज़ है। इससे बच्चे को दूध पीने और सोने में आसानी होती है, और आपको भी यह भरोसा रहता है कि वह आराम से सांस ले पा रहा है।

नवजात नाक के लिए सलाइन का उपयोग

सलाइन यानी हल्का नमक मिला सादा पानी, जो शरीर के तरल की ही तरह की मात्रा में नमक रखता है। दवा की दुकानों पर बच्चों के लिए अलग से बना हुआ नवजात नाक के लिए सलाइन ड्रॉप या छोटे वायल में मिल जाता है।

सलाइन ड्रॉप कैसे डालें (हर नथुने में 1–2 ड्रॉप):

  1. बच्चे की पोज़िशन ठीक करें

    • बच्चे को पीठ के बल लिटाएँ, सिर हल्का‑सा पीछे की तरफ झुका हो।
    • चाहें तो कंधों के नीचे छोटा‑सा तौलिया मोड़कर रख सकते हैं या गोद में लेकर हल्का सिर पीछे कर सकते हैं।
  2. सलाइन डालें

    • ड्रॉपर या वायल से 1–2 बूंद सलाइन एक नथुने में डालें।
    • फिर ऐसा ही दूसरे नथुने में।
      नन्ही‑सी नाक के लिए यह मात्रा पर्याप्त होती है, ज़्यादा डालने की ज़रूरत नहीं।
  3. करीब 30 सेकंड रुकें

    • इस समय में सलाइन जम चुके म्यूकस को ढीला कर देती है।
    • बच्चा थोड़ी सुड़क‑सुड़क या छींक कर सकता है, यह सामान्य है।
  4. अब म्यूकस साफ करें
    अब आप किसी नैज़ल एस्पिरेटर या बल्ब सिरिंज का इस्तेमाल कर सकते हैं ताकि नरमी से म्यूकस बाहर निकले।

बच्चे पर बल्ब सिरिंज कैसे इस्तेमाल करें

पहली बार ज़्यादातर माता‑पिता हिचकिचाते हैं, लेकिन दो‑तीन बार करने पर यह भी रूटीन बन जाता है।

यहाँ जानें बल्ब सिरिंज से शिशु नाक सफाई कैसे करें:

  1. सबसे पहले बल्ब को दबाकर हवा निकालें

    • नथुने के पास ले जाने से पहले बल्ब को हाथ से दबाएँ और उसके अंदर की हवा बाहर निकाल दें।
    • दबाए हुए हालत में ही नाक के पास ले जाएँ।
  2. नथुने के मुहाने पर हल्के से रखें

    • इसे नथुने के अंदर गहरा न डालें।
    • बस नथुने के खुले हिस्से पर हल्के से टिकाएँ, अंदर गुम न हो।
  3. धीरे‑धीरे पकड़ छोड़ें

    • जैसे ही आप बल्ब को छोड़ेंगे, वह हल्का‑सा वैक्यूम बनाकर म्यूकस खींच लेगा।
    • यह बहुत हल्का सक्षन होना चाहिए, अधिक जोर नहीं।
  4. निकालें और खाली करें

    • नथुने से दूर करें।
    • किसी टिश्यू या कपड़े पर बल्ब दबाकर अंदर का म्यूकस बाहर निकाल दें।
    • टिप को पोंछ लें।
  5. ज़रूरत पड़े तो दोहराएँ

    • हर नथुने में 1–2 बार दोहरा सकते हैं।
    • बार‑बार लगातार करने से अंदर की झिल्ली में जलन हो सकती है, इसलिए हद से ज़्यादा न करें।
  6. प्रयोग के बाद साफ रखें

    • गुनगुने साबुन वाले पानी से कई बार अंदर‑बाहर भर कर और निकाल कर धोएँ।
    • साफ पानी से दुबारा रिंस कर के हवा में सूखने दें।

मार्केट में पाइप से खींचने वाले नैज़ल एस्पिरेटर भी मिलते हैं। सिद्धांत वही है - बहुत हल्का सक्षन, ज़बरदस्ती नहीं।

नवजात शिशु नाक की देखभाल में क्या नहीं करना चाहिए

कुछ चीज़ों से बचना ज़रूरी है:

  • कॉटन बड नाक के अंदर न डालें
    इससे नाक की मुलायम परत कट सकती है या म्यूकस और अंदर धकेल सकता है।

  • बड़ों के लिए बने डीकंजेस्टेंट स्प्रे या ड्रॉप न लगाएँ
    ये नवजात के लिए सुरक्षित नहीं हैं, जब तक डॉक्टर ने खास तौर पर न लिखा हो।

  • एस्पिरेटर का ज़्यादा इस्तेमाल न करें
    दिन भर बार‑बार करने से नाक की परत सूज सकती है और तकलीफ बढ़ सकती है।
    आमतौर पर सिर्फ फीड से पहले और रात की नींद से पहले इस्तेमाल काफी होता है।

ज़्यादातर बच्चों के लिए बस नवजात नाक के लिए सलाइन और हल्का सक्षन ही काफी होता है, इससे दूध पीना और सांस लेना दोनों आसान हो जाता है।


शोर भरी साँस: जब जाम कम हो, आवाज़ ज़्यादा हो

छोटे बच्चे स्वभाव से ही थोड़ा शोर मचाकर साँस लेते हैं। आप सुन सकते हैं:

  • हल्के खर्राटे या स्नोर्ट
  • सीटी जैसी हल्की आवाज़
  • कूँ‑कूँ या गुनगुनाहट
  • नींद में छोटे‑छोटे खर्राटे जैसे

ज़्यादातर बार यह सब नाक की पतली नलियों और हल्की म्यूकस परत की वजह से होता है, कोई गंभीर नवजात शिशु नाक बंद ज़रूरी नहीं।

आमतौर पर इसे सामान्य मान सकते हैं, अगर:

  • बच्चा अच्छे से दूध पी रहा हो
  • छाती और पेट सहज तरीके से ऊपर‑नीचे हो रहे हों, साँस एक समान आ‑जा रही हो
  • साँस लेने में ज़ोर लगाने के लक्षण न हों (जैसे नथुने फूलना या पसलियों के बीच त्वचा बहुत अंदर धँसना)
  • बच्चा फीड के बीच में आराम से सो भी पा रहा हो

अगर आप परेशान हों तो बच्चे को सोते समय ध्यान से देखें। अगर वह गुलाबी दिख रहा है, आराम से लेटा हुआ है, और साँस सामान्य रफ्तार से चल रही है, सिर्फ थोड़ी सूँघने‑सी आवाज़ है, तो यह आमतौर पर ठीक है।


कब नाक की तकलीफ को लेकर चिंता करनी चाहिए

कभी‑कभी नाक की जकड़न सिर्फ शोर नहीं बल्कि असल परेशानी का संकेत होती है। ऐसे समय में डॉक्टर की सलाह जल्दी लेनी चाहिए:

  • जकड़न की वजह से दूध न पी पाना
    बच्चा बमुश्किल कुछ घूँट ही पी पाता हो, फिर सांस लेने के लिए रुकना पड़े, और यह बार‑बार हो।

  • साँस बहुत तेज़ चलना
    आराम की हालत में भी प्रति मिनट लगभग 60 से ज़्यादा साँसें, और यह तेजी देर तक बनी रहे।

  • नथुनों का बार‑बार फूलना
    हर साँस के साथ नथुने साफ‑साफ फैलते‑सिकुड़ते दिखें।

  • चेस्ट रिट्रैक्शन
    साँस लेते समय पसलियों के बीच, नीचे या गर्दन के ऊपर की त्वचा अंदर की तरफ गहराई तक खिंचती दिखे।

  • जकड़न के साथ बुखार
    अगर 3 महीने से छोटे बच्चे में तापमान 38°C या उससे ज़्यादा हो और साथ में नवजात नाक बहना या नाक बंद भी हो।

  • बहुत सुस्ती या दूध कम पीना
    बच्चा उठाने पर भी मुश्किल से जागे, बहुत ढीला‑सा लगे, या रोज़ के मुकाबले बहुत कम फीड ले रहा हो।

ऐसी स्थिति में भारत में:

  • तुरंत किसी बाल रोग विशेषज्ञ के पास जाएँ
  • नज़दीकी बड़े अस्पताल की इमरजेंसी / आपातकालीन कक्ष में दिखाएँ
  • जरूरत लगे तो 108 या अपने राज्य के इमरजेंसी नंबर पर संपर्क करें

अपनी अंदरूनी भावना पर भरोसा रखें। आप अपने बच्चे को सबसे बेहतर महसूस कर सकते हैं।


ह्यूमिडिफायर और दूसरे छोटे‑छोटे आरामदेह उपाय

थोड़ा‑सा वातावरण बदलकर भी बच्चे की नाक की जकड़न में काफी आराम मिल सकता है।

कूल मिस्ट ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल

कूल मिस्ट ह्यूमिडिफायर कमरे की हवा में नमी बढ़ा देता है। इससे:

  • गाढ़ा म्यूकस थोड़ी नरमी से निकल पाता है
  • नाक के अंदर की झिल्ली कम सूखती और कम जलन होती
  • रात में सूँघने‑सूँघने की आवाज़ कुछ हल्की हो सकती है

सुरक्षित इस्तेमाल के लिए ध्यान रखें:

  • कमरे की नमी लगभग 40–60% के बीच रहे, कई ह्यूमिडिफायर में इनबिल्ट मीटर होता है।
  • मशीन को बच्चे के पलंग या पालने से थोड़ी दूरी पर रखें, बिलकुल पास न रखें।
  • हमेशा कूल मिस्ट (ठंडी भाप) वाला ह्यूमिडिफायर लें, गरम भाप जलने का खतरा बढ़ा सकती है।
  • निर्देशानुसार मशीन को नियमित रूप से साफ करते रहें, वरना फफूँद या बैक्टीरिया पनप सकते हैं।

अगर ह्यूमिडिफायर न हो तो एक साधारण उपाय है कि बच्चे के कमरे में हल्के कपड़े सुखाएँ। जैसे रात में रूम में छोटे तौलिये टाँग दें (लेकिन बच्चे के बिलकुल पास या हीटर/रॉड के ऊपर नहीं), इससे हवा में थोड़ी नमी बढ़ती है।

कुछ और उपयोगी टिप्स

  • कमरे की हवा धुआँमुक्त रखें
    सिगरेट, अगरबत्ती या रसोई का ज़्यादा धुआँ नन्हे बच्चे की नाक और फेफड़ों दोनों के लिए परेशान करने वाला हो सकता है।

  • तेज़ खुशबूओं से बचें
    बच्चे के कमरे में तेज़ परफ्यूम, रूम फ्रेशनर, सुगंधित मोमबत्ती, फ्लोर क्लीनर या कीटनाशक स्प्रे का कम से कम उपयोग करें।

  • सिर ऊँचा करने के बारे में सावधानी
    बड़े बच्चों में कभी‑कभी गद्दे का सिर वाला हिस्सा थोड़ा ऊँचा कर देते हैं, पर नवजात के लिए हमेशा सुरक्षित नींद के नियम मानें - बच्चा पीठ के बल, सपाट और कड़ा गद्दा, बिना तकिये के। गद्दा ऊँचा करने से पहले अपने बाल रोग विशेषज्ञ या आशा/एएनएम/नर्स से राय ले लें।


अंतिम बातें

नवजात की देखभाल में शुरुआत में सब कुछ लिस्ट जैसा लगता है। लेकिन नवजात शिशु आंख की देखभाल और नवजात शिशु नाक की देखभाल की बात करें तो बात सिमट जाती है:

  • रोज़ की हल्की, कोमल सफाई
  • सामान्य और चिंता वाली स्थिति में फर्क पहचानना
  • ज़रूरत पर सलाइन और हल्का सक्षन इस्तेमाल करना
  • कुछ अलग लगे तो बिना हिचक डॉक्टर से पूछ लेना

चिपचिपी आँखें, नवजात आँसू की नली बंद, हल्की‑सी नवजात नाक बहना या नवजात शिशु नाक बंद - ये सब शुरुआती महीनों का आम हिस्सा हैं। थोड़ी जानकारी, थोड़ा अभ्यास और साफ रूटीन से आप इन्हें आराम से संभाल सकते हैं।

और अगर कभी भी मन में सवाल उठे कि यह सामान्य है या नहीं, तो अपने बाल रोग विशेषज्ञ, नज़दीकी सरकारी अस्पताल या विश्वसनीय डॉक्टर से बात करें। जब बात बच्चे की आँखों और नाक की हो, तो कोई भी सवाल छोटा नहीं होता।


यह सामग्री केवल सूचना के उद्देश्यों के लिए है और इसका उपयोग आपके डॉक्टर, बाल रोग विशेषज्ञ या अन्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर की सलाह के विकल्प के रूप में नहीं किया जाना चाहिए। यदि आपके कोई प्रश्न या चिंताएँ हैं, तो आपको स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।
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