घर पहला दिन, गोद में नन्हा बच्चा, चारों तरफ साजोसामान, फीडिंग का टाइम, नेपी बदलना, खुद नहाने की बारी कब आएगी, पता ही नहीं चलता। इसी बीच कोई कह देता है – «टमी टाइम शुरू कर दो!» और आपको लगता है, अरे, ये भी लिस्ट में जोड़ना था?
थोड़ा रुकिए, सांस लीजिए।
टमी टाइम न बहुत टेक्निकल है, न डराने वाला। सही तरीके से किया जाए तो यह दिन का सबसे प्यारा हिस्सा बन सकता है।
इस गाइड में हम आसान भाषा में समझेंगे कि टमी टाइम क्या है, क्यों जरूरी है, कब शुरू करें, टमी टाइम कितनी देर करें, और इसे मजेदार कैसे बनाएं, खासकर तब, जब आपका बच्चा शुरुआत में पेट के बल रहना बिल्कुल पसंद न करे।
सीधी बात, टमी टाइम मतलब वह हर समय जब आपका बच्चा जागते हुए, आपकी निगरानी में, पेट के बल होता है।
बस इतना ही।
कोई महँगा मैट जरूरी नहीं, कोई स्पेशल खिलौना भी नहीं।
अगर आपका नवजात शिशु पेट के बल आपकी छाती पर लेटा है, आप हल्के से पीछे की तरफ टेक लगाए हैं और बच्चा जाग रहा है, तो यह भी नवजात के लिए टमी टाइम ही है। अगर बच्चा जमीन पर चादर या मैट पर पेट के बल है और आप उसके पास बैठे हैं, वो भी टमी टाइम है।
बस तीन बातें ध्यान रखें:
यह नींद से बिल्कुल अलग है। भारत में डॉक्टर और नेशनल हेल्थ प्रोग्राम्स सलाह देते हैं कि बच्चा हमेशा पीठ के बल सोए, ताकि अचानक शिशु मृत्यु (SIDS) का खतरा कम हो।
इसी लिए याद रखिए - सोने के लिए पीठ, खेलने के लिए पेट।
अक्सर आप सुनते होंगे कि टमी टाइम के फायदे बहुत हैं, लेकिन क्या और कैसे, यह कोई ढंग से नहीं बताता। चलिए आसान तरह से समझते हैं।
जब बच्चा पेट के बल होता है तो स्वाभाविक रूप से वह:
इससे कई तरह की मांसपेशियाँ मजबूत होती हैं:
यही मसल्स आगे चलकर बच्चे को मदद करते हैं:
यानी टमी टाइम बच्चे का हल्का-सा वर्कआउट है। पेट के बल रखने के फायदे में सबसे बड़ा फायदा यही है कि यह बच्चे की मोटर विकास की नींव मजबूत करता है।
आजकल बच्चे बहुत समय पीठ के बल बिताते हैं - सोते समय, कार सीट में, स्ट्रोलर में, झूले में। लगातार एक ही ओर दबाव पड़ने से सिर के पीछे या साइड में चपटी जगह बन सकती है, जिसे प्लाजियोसेफली कहा जाता है।
जब आप बच्चे को दिन में कई बार पेट के बल रखते हैं तो:
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और कई बाल रोग विशेषज्ञ भी नियमित टमी टाइम को प्लाजियोसेफली रोकने के उपाय में शामिल मानते हैं।
पेट के बल रहने पर बच्चा:
इससे धीरे-धीरे:
ऊपर से, बच्चा हमेशा छत की तरफ देखने के बजाय, नई एंगल से दुनिया देखता है - आपका चेहरा, सामने रखे खिलौने, नीचे की चादर या मैट की डिजाइन, टेक्सचर आदि। ये छोटी-छोटी चीजें उसकी सीखने की प्रक्रिया के लिए काफी मायने रखती हैं।
आप टमी टाइम जन्म के कुछ ही दिनों में शुरू कर सकते हैं।
सुनने में जल्दी लगेगा, लेकिन शुरुआती दिनों में टमी टाइम बेहद हल्का और आरामदायक होता है - इसे ऐसे समझिए जैसे कि «प्यार भरी गोद», न कि कोई एक्सरसाइज़।
पहले 1-2 हफ्तों में छाती पर टमी टाइम सबसे आसान तरीका है:
ये भी पूरा का पूरा टमी टाइम ही है। शुरुआत में आपका नवजात शायद सिर ज्यादा न उठाए, बस गले लगे-लगे सा लगेगा। बिल्कुल ठीक है।
जैसे-जैसे आपका आत्मविश्वास बढ़े, आप दिन में कभी-कभार बच्चे को चादर या प्ले मैट पर, जमीन पर, कुछ सेकंड के लिए पेट के बल रख कर देख सकते हैं - हमेशा बिल्कुल पास रहकर।
अगर आपके मन में सवाल है कि बच्चे कब पेट के बल रखें, तो आसान जवाब है -
जैसे ही आप और बच्चा थोड़े कमज़ोर नहीं, तैयार महसूस करें, छोटे-छोटे समय से शुरुआत करें।
ज्यादातर नए माता-पिता पूछते हैं:
यह एक सामान्य गाइड है, आप इसे अपने बच्चे के हिसाब से एडजस्ट कर सकते हैं।
अगर शुरू में बच्चा सिर्फ 30 सेकंड ही सह लेता है, तब भी ठीक है।
मकसद है - रोज़ थोड़ा-थोड़ा अभ्यास।
काफी बच्चे धीरे-धीरे दिन भर में कुल मिलाकर 15 से 20 मिनट टमी टाइम तक पहुँच जाते हैं।
ध्यान रहे, यह एक साथ नहीं, बल्कि टुकड़ों में बँटा होता है।
इसे ऐसे सोचिए:
जैसे-जैसे बच्चा मजबूत होता जाए और पेट के बल रहने में सहज महसूस करे, आप हर सेशन की अवधि थोड़ी-थोड़ी बढ़ा सकते हैं।
सबसे ज़रूरी बात - बच्चे का मूड देखें।
अगर वह जोर-जोर से रोने लगे, घबराया हुआ लगे, तो तुरंत उठा लें, गोद में लें। आराम पहले, टमी टाइम बाद में। फिर किसी और वक्त दोबारा कोशिश कर सकते हैं।
कई माता-पिता को टमी टाइम का मतलब लगता है कि नन्हा सा बच्चा फर्श पर सीधा पेट के बल और खुद परेशान।
ऐसा सोचकर ही टेंशन होना स्वाभाविक है।
इन टमी टाइम टिप्स से आप इसे ज्यादा आसान और फ्लेक्सिबल बना सकते हैं।
शुरुआत के लिए यह तरीका सबसे अपनेपन भरा रहता है, खासकर नवजात शिशु पेट के बल रखने के लिए:
आपका शरीर गर्म है, दिल की धड़कन परिचित है, चेहरा पास है - ज्यादातर बच्चों को यह पोज़िशन बहुत सुकून देती है।
यह भी बेहद आसान तरीका है:
नेपी बदलने के बाद या बच्चे को कैरियर में डालने से पहले 1-2 मिनट के छोटे सेशन के लिए यह तरीका बहुत काम आता है।
जब आप फर्श पर टमी टाइम के लिए तैयार हों:
तौलिया हल्का-सा ऊँचाई देता है, जिससे बच्चे के लिए सिर उठाना और चारों तरफ देखना आसान हो जाता है।
इसके अलावा आप ये भी ट्राई कर सकते हैं:
ध्यान रहे, कोई भी पोज़िशन चुनें, टमी टाइम के दौरान बच्चे को कभी अकेला न छोड़ें।
अगर हर बार टमी टाइम पर बच्चा रोने लगे और आप भी तनाव में आ जाएँ, तो न आपके लिए मजा, न बच्चे के लिए।
कुछ छोटे से बदलाव इसे काफ़ी सुखद बना सकते हैं।
ऊपर से झाँकने के बजाय खुद भी चादर पर लेट जाइए, ताकि आपका चेहरा बच्चे के बिल्कुल सामने हो।
बच्चों को सबसे ज़्यादा मजा चेहरों में आता है, किसी भी खिलौने से ज़्यादा।
बहुत सारा सामान फैलाने की जरूरत नहीं, बस थोड़ी सी तैयारी:
खिलौने बहुत दूर न रखें।
इतने पास हों कि बच्चा देख सके, और थोड़ा-थोड़ा हाथ बढ़ाकर कोशिश करना चाहे। आप खिलौने को धीरे-धीरे दाएँ-बाएँ हिलाकर उसे ट्रैक करने में मदद कर सकते हैं।
आपकी आवाज़ बच्चे के लिए सबसे परिचित और सुकून देने वाली होती है:
आप यूँ ही समय नहीं काट रहे, साथ ही आप उसके भाषा विकास में भी मदद कर रहे हैं।
खासतौर पर शुरुआती हफ्तों में कम समय लेकिन अच्छा अनुभव ज्यादा जरूरी है।
2 मिनट का खुश टमी टाइम,
10 मिनट के रोते हुए टमी टाइम से कहीं ज्यादा फायदेमंद है।
जब भी लगे कि बच्चा थोड़ा थक या चिड़चिड़ा हो रहा है, उससे पहले सेशन खत्म कर दें। गोद में लेकर एक छोटा-सा आलिंगन दे दें, ताकि उसे लगे, «मम्मी-पापा मुझे सुनते हैं»।
बहुत से बच्चे शुरुआत में टमी टाइम पर रो देते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ गलत कर रहे हैं।
अगर आपका बच्चा टमी टाइम से परेशान लगता है:
छाती से शुरुआत करें
लगभग हर बच्चा छाती पर पेट के बल रहना, फर्श के मुकाबले ज्यादा पसंद करता है। वहाँ उसे आपकी खुशबू, धड़कन, गर्माहट और सुरक्षा मिलती है।
बहुत छोटे-छोटे सेशन रखें
शुरुआत में 30 सेकंड से 1 मिनट भी काफी है।
फिर धीरे-धीरे हर 1-2 दिन में कुछ सेकंड बढ़ाते जाएँ।
सही टाइम चुनें
बेहतर रहेगा अगर आप टमी टाइम तब करें जब:
हल्की मूवमेंट का सहारा लें
गोद में जाँघों पर पेट के बल रखते हुए हल्का झूलना, या
बैठे-बैठे धीरे-धीरे पैर हिलाना, कई बच्चों को शांत रखता है।
कुछ पैरेंट्स फिजियो की सलाह से जिम बॉल पर सुरक्षित पकड़ के साथ हल्का-हल्का झुलाते हैं, लेकिन यह हमेशा बहुत सुरक्षित तरीके से और मजबूती से पकड़ कर ही करें।
सतह बदल कर देखिए
कुछ बच्चों को सख्त सतह आरामदायक लगती है, कुछ को मुलायम।
आप ट्राई कर सकते हैं:
सबसे जरूरी - जबरदस्ती न करें।
अगर बच्चा लगातार जोर से रो रहा है, चेहरा लाल हो रहा है, तो उसे उठा लें, गले लगाएँ, थोड़ा शांत होने दें। फिर कभी और समय पर, किसी और पोज़िशन में, थोड़ी देर से दोबारा कोशिश करें।
अगर टमी टाइम के दौरान बच्चा रोता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप असफल माता-पिता हैं।
आप दोनों साथ में सीख रहे हैं, बस इतना याद रखिए।
कुछ स्थितियाँ ऐसी हैं जब टमी टाइम से बचना बेहतर है:
फीड के तुरंत बाद
पूरा फीड होने के तुरंत बाद पेट के बल लिटाने से बच्चा असहज महसूस कर सकता है, उल्टी या दूध वापस आने की संभावना बढ़ सकती है।
फीड के बाद थोड़ा समय रुककर ही टमी टाइम कीजिए।
जब बच्चा बहुत थका हो या बहुत भूखा हो
उस समय उसके पास न ऊर्जा होगी न धैर्य। पहले उसकी बुनियादी ज़रूरत पूरी करें, फिर खेल-वेल।
यदि बच्चा बीमार हो, बुखार हो या बहुत सुस्त लगे
ऐसे में प्राथमिकता सिर्फ आराम और डॉक्टरी सलाह होनी चाहिए। टमी टाइम बाद में जब वह ठीक हो जाए, तब से शुरू कीजिए।
अगर आपके बच्चे को कोई विशेष मेडिकल कंडिशन है, जैसे:
तो बेहतर होगा कि आप अपने बाल रोग विशेषज्ञ, सरकारी स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर या पेडियाट्रिक फिजियो से पूछकर टमी टाइम कैसे करें इसकी पर्सनलाइज्ड सलाह लें।
टमी टाइम फायदेमंद है।
यह बच्चे की मोटर विकास, मसल्स की मजबूती और सिर चपटा होने से बचाव में मदद करता है। साथ-साथ यह आपके और आपके बच्चे के बीच एक प्यारा, कनेक्टेड समय भी बन सकता है।
लेकिन यह कोई एग्जाम नहीं है जिसमें आपको फुल मार्क्स लाने हैं।
कभी दिन में आप 2-3 अच्छे सेशन कर पाएँगे,
कभी पूरा दिन फीड, डकार, नेपी, नींद में निकल जाएगा और रात को याद आएगा कि आज तो टमी टाइम रह ही गया।
ऐसा लगभग हर घर में होता है।
जरूरी क्या है?
आप धीरे-धीरे, थोड़ा-थोड़ा करके मौका देते रहेंगे तो बच्चा खुद मजबूत होता जाएगा।
एक दिन अचानक आप देखेंगे, आपका नन्हा बच्चा पेट के बल से खुद ही कोहनी के बल उठ रहा है, या फिर टमी से पीठ पर पलट गया है, और आप सोचेंगे -
«अरे, ये कब सीख लिया तुमने?»
यही है टमी टाइम का शांत, लेकिन कमाल का जादू।