शिशुओं में एक्जिमा (एटोपिक डर्मेटाइटिस): लक्षण, कारण और पूरा देखभाल गाइड
एटोपिक डर्मेटाइटिस, जिसे आमतौर पर एक्जिमा कहा जाता है, शिशुओं में होने वाली त्वचा की सबसे आम समस्याओं में से एक है। लगभग 15 से 20% बच्चों में इसके लक्षण दिखाई दे सकते हैं और कई बार शुरुआत जीवन के पहले छह महीनों में ही हो जाती है। अगर आपके बच्चे की त्वचा पर लाल, सूखे और खुजली वाले चकत्ते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं कि आपकी देखभाल में कोई कमी है। बेबी एक्जिमा गंदगी या खराब साफ-सफाई के कारण नहीं होता। सही दिनचर्या अपनाने से अधिकतर परिवार बच्चे की त्वचा को काफी आराम दे पाते हैं।
एटोपिक डर्मेटाइटिस क्या है?
एटोपिक डर्मेटाइटिस त्वचा में होने वाली लंबे समय की सूजन है। इसके लक्षण कभी बढ़ जाते हैं और कभी कम हो जाते हैं। शांत अवधि के बाद अचानक फ्लेयर यानी समस्या बढ़ने का दौर आ सकता है। इसकी शुरुआत अक्सर त्वचा की बाहरी परत, जिसे त्वचा अवरोध या स्किन बैरियर कहते हैं, की कमजोरी से जुड़ी होती है। यह परत त्वचा में नमी बनाए रखती है और साबुन, एलर्जेन तथा जलन पैदा करने वाली चीजों को अंदर जाने से रोकती है।
कई बच्चों की त्वचा में फिलाग्रिन नामक प्रोटीन कम बनता है या ठीक से काम नहीं करता। फिलाग्रिन और एक्जिमा के बीच संबंध अच्छी तरह स्थापित है। इस प्रोटीन की कमी होने पर त्वचा से पानी जल्दी निकल जाता है। साबुन, एलर्जेन, बैक्टीरिया और अन्य परेशान करने वाले पदार्थ भी त्वचा में आसानी से प्रवेश कर सकते हैं। इसके जवाब में प्रतिरक्षा तंत्र सूजन, रूखापन और खुजली पैदा करता है।
इसका यह अर्थ नहीं है कि बच्चे को संक्रमण है या उसकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है। एटोपिक डर्मेटाइटिस आमतौर पर आनुवंशिक रूप से संवेदनशील त्वचा और प्रतिरक्षा तंत्र की प्रतिक्रिया का मिला-जुला परिणाम होता है। परिवार में एक्जिमा, दमा या हे फीवर होने पर जोखिम बढ़ सकता है, लेकिन पारिवारिक इतिहास न होने पर भी बच्चे को यह समस्या हो सकती है।
शिशुओं में एक्जिमा कैसा दिखाई देता है?
छोटे शिशु में एक्जिमा के लक्षण बड़े बच्चों या वयस्कों से अलग दिख सकते हैं। शिशु में एक्जिमा के लक्षण आमतौर पर इस तरह दिखाई देते हैं:
- त्वचा का लाल, खुरदुरा या परतदार होना
- सूखे चकत्ते, जिन्हें छूने पर खुरदरापन महसूस हो
- त्वचा में छोटी दरारें या छूने पर दर्द
- तेज खुजली
- फ्लेयर के दौरान त्वचा से पानी निकलना या पीली पपड़ी बनना
- बेचैनी, नींद में खलल और बार-बार त्वचा रगड़ना या खुजलाना
जीवन के शुरुआती महीनों में शिशु के गालों पर एक्जिमा होना बहुत आम है। लाल या सूखे चकत्ते माथे और सिर की त्वचा पर भी दिखाई दे सकते हैं। कुछ बच्चे ठीक से खुजा नहीं पाते, इसलिए चादर या तकिए से चेहरा रगड़ते हैं। कुछ बच्चे हाथों से त्वचा खुजलाने लगते हैं, खासकर जब उनके हाथों से मिट्टन्स उतर जाते हैं।
बच्चा बड़ा होकर अधिक हिलने-डुलने लगे तो एक्जिमा का पैटर्न बदल सकता है। बड़े शिशुओं में घुटनों के पीछे और कोहनी के अंदरूनी हिस्से में चकत्ते उभर सकते हैं। गर्दन, कलाई, टखने और धड़ भी प्रभावित हो सकते हैं।
मुंह के आसपास होने वाले चकत्ते कभी-कभी लार के कारण होते हैं। लगातार लार बहना, चूसनी का इस्तेमाल या खाने के अवशेष संवेदनशील त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं। इसे कभी-कभी लार से होने वाला डर्मेटाइटिस कहा जाता है। हालांकि, बच्चे को लार से हुई जलन और एटोपिक डर्मेटाइटिस दोनों एक साथ हो सकते हैं।
शिशु में एक्जिमा क्यों होता है?
बच्चों में एक्जिमा कारण केवल एक नहीं होता। आमतौर पर कई चीजें मिलकर इस समस्या को जन्म देती हैं:
- कमजोर त्वचा अवरोध की आनुवंशिक प्रवृत्ति
- प्रतिरक्षा तंत्र की प्रतिक्रिया में अंतर
- त्वचा का रूखा होना और नमी कम होना
- साबुन, डिटर्जेंट और लार जैसी जलन पैदा करने वाली चीजें
- गर्मी, पसीना और कपड़ों का रगड़ना
- कुछ बच्चों में वातावरण में मौजूद एलर्जेन
हर बार फ्लेयर होने का मतलब यह नहीं कि आपने इसका एक खास कारण खोज लिया है। सर्दी-जुकाम, दांत निकलने या मौसम बदलने के दौरान भी एक्जिमा बढ़ सकता है।
रोजमर्रा में दिखने वाले सामान्य ट्रिगर
घर के अंदर की सूखी हवा परेशानी बढ़ा सकती है। सर्दियों में हीटर या गर्म हवा चलने पर यह समस्या अधिक महसूस होती है। बाहर की ठंडी हवा से गर्म और सूखे कमरे में आने-जाने से त्वचा में खिंचाव और दरारें पड़ सकती हैं।
तेज या कठोर उत्पाद भी आम कारण हैं। साबुन, बबल बाथ और तेज खुशबू वाले बेबी प्रोडक्ट से बचें। सोडियम लॉरिल सल्फेट, जिसे अक्सर SLS कहा जाता है, और परफ्यूम जैसे तत्व नाजुक त्वचा में जलन पैदा कर सकते हैं। कपड़े धोने वाले डिटर्जेंट और फैब्रिक सॉफ्टनर के अवशेष भी त्वचा को परेशान कर सकते हैं, खासकर जब बहुत तेज खुशबू वाले उत्पाद इस्तेमाल किए जाएं।
बहुत गर्मी और पसीना खुजली बढ़ा सकते हैं। घर के अंदर बच्चे को जरूरत से ज्यादा कपड़े न पहनाएं। आमतौर पर बच्चे को उतनी ही परतें पहनाना ठीक रहता है जितनी किसी वयस्क ने पहनी हों, या जरूरत हो तो केवल एक हल्की अतिरिक्त परत।
ऊन और कुछ सिंथेटिक कपड़े त्वचा से रगड़ खा सकते हैं। मुलायम सूती या हवा आने-जाने वाले चिकने कपड़े अधिक आरामदायक रहते हैं। कपड़ों की सिलाई, टैग और तंग या खुरदुरे किनारों को भी जांचें।
कुछ माता-पिता को लगता है कि स्तनपान के दौरान मां के कुछ खाद्य पदार्थ खाने से बच्चे का एक्जिमा बढ़ जाता है। दूध, अंडा और गेहूं अक्सर संदेह के घेरे में रहते हैं। लेकिन विशेषज्ञ की सलाह के बिना अपने भोजन से चीजें हटाने पर पोषण की कमी हो सकती है और इससे एक्जिमा में निश्चित रूप से सुधार हो, यह जरूरी नहीं। डॉक्टर ही यह जांच सकते हैं कि वास्तव में किसी खाद्य पदार्थ से प्रतिक्रिया हो रही है या नहीं।
धूल के कण और पालतू जानवरों की रूसी कुछ बच्चों में एक्जिमा बढ़ा सकती है, खासकर तब जब परिवार में एलर्जी की समस्या रही हो। फिर भी हर फ्लेयर का कारण पालतू जानवर या घर की धूल मान लेना सही नहीं है। बहुत अधिक सफाई करना या तेज रासायनिक स्प्रे इस्तेमाल करना भी त्वचा में जलन पैदा कर सकता है।
शिशु में एक्जिमा की रोजाना देखभाल
अच्छी दैनिक देखभाल एक्जिमा इलाज की बुनियाद है। इससे बच्चे की त्वचा की आनुवंशिक संवेदनशीलता खत्म नहीं होती, लेकिन त्वचा अवरोध को संभालने, नमी बनाए रखने और कई फ्लेयर रोकने में मदद मिलती है।
दिन में दो या तीन बार मॉइस्चराइज़र लगाएं
दिन में कम से कम दो बार गाढ़ा, बिना खुशबू वाला मॉइस्चराइज़र या इमोलिएंट लगाएं। त्वचा बहुत सूखी हो तो इसे अधिक बार भी लगाया जा सकता है। लोशन की तुलना में क्रीम और मरहम अधिक प्रभावी होते हैं, क्योंकि उनमें तेल की मात्रा ज्यादा होती है और वे त्वचा पर बेहतर सुरक्षात्मक परत बनाते हैं।
बच्चों के लिए एक्जिमा मॉइस्चराइज़र चुनते समय इन बातों पर ध्यान दें:
- बिना खुशबू वाला फॉर्मूला
- सेरामाइड्स, जो त्वचा अवरोध को सहारा देते हैं
- पेट्रोलाटम या पैराफिन आधारित मरहम
- कम और सरल सामग्री वाली सूची
- संवेदनशील या एक्जिमा-प्रवण त्वचा के लिए बनाया गया उत्पाद
बहुत सूखी और फटी त्वचा के लिए, खासकर रात में, मरहम अधिक उपयोगी हो सकता है। दिन में क्रीम लगाना आसान महसूस हो सकता है। लोशन हल्का होता है और जल्दी सूख सकता है, इसलिए एक्जिमा-प्रवण त्वचा फिर से जल्द सूखी महसूस हो सकती है।
मॉइस्चराइज़र पर्याप्त मात्रा में लगाएं और उसे त्वचा पर धीरे-धीरे फैलाएं, जोर से रगड़ें नहीं। डिब्बे में उंगली डालने के बजाय साफ चम्मच या पंप का इस्तेमाल करें, ताकि उत्पाद में गंदगी और संक्रमण का जोखिम कम रहे। अगर किसी उत्पाद से बार-बार जलन हो, नया चकत्ता निकले या बच्चा असहज लगे, तो उसे बंद कर दें और डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।
“भिगोएं और नमी बंद करें” तरीके से नहलाएं
नहलाने से एक्जिमा नहीं होता, लेकिन बहुत देर तक गर्म पानी में नहलाने और बार-बार साबुन लगाने से त्वचा के प्राकृतिक तेल कम हो सकते हैं। नहलाते समय ये बातें अपनाएं:
- टब या बाल्टी में गुनगुना पानी भरें, जिसका तापमान लगभग 36 से 37°C हो। पानी को कलाई से जांचें या बाथ थर्मामीटर इस्तेमाल करें।
- नहलाने का समय पांच से दस मिनट तक सीमित रखें।
- साबुन की जगह बिना खुशबू वाला, साबुन-मुक्त क्लेंजर केवल उन हिस्सों पर लगाएं जो वास्तव में गंदे हों।
- बबल बाथ, खुशबू वाले बाथ ऑयल और रगड़ने वाले कपड़े से बचें।
- बच्चे को सावधानी से बाहर निकालें और त्वचा को थपथपाकर सुखाएं। रगड़ें नहीं।
- त्वचा हल्की नम रहते हुए तीन मिनट के भीतर इमोलिएंट लगा दें।
इसे “भिगोएं और नमी बंद करें” तरीका कहा जा सकता है। पानी त्वचा की ऊपरी परत को थोड़ी देर के लिए नम करता है और इमोलिएंट उस नमी को बनाए रखने में मदद करता है। गालों, त्वचा की सिलवटों और खुरदुरे हिस्सों पर खास ध्यान दें, लेकिन गाढ़े उत्पाद को आंखों में जाने से बचाएं।
हर दिन बच्चे को पूरी तरह नहलाना जरूरी नहीं होता। दो स्नान के बीच चेहरे, गर्दन, हाथ और डायपर वाले हिस्से को साफ करना पर्याप्त हो सकता है। आपके परिवार की दिनचर्या और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इसमें बदलाव किया जा सकता है।
कपड़े और कमरे का तापमान आरामदायक रखें
बच्चे को मुलायम सूती कपड़ों की हल्की परतें पहनाएं। अगर गर्दन या पीठ गर्म और नम लगे, तो एक परत कम कर दें। नए कपड़े पहनाने से पहले उन्हें धो लें। हल्के, बिना खुशबू वाले डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें और फैब्रिक सॉफ्टनर न डालें। अगर डिटर्जेंट से प्रतिक्रिया होने का संदेह हो, तो कपड़ों को एक अतिरिक्त बार धोना उपयोगी हो सकता है।
बच्चे के नाखून छोटे और चिकने रखें। रात में सूती स्लीपसूट अनजाने में होने वाली खरोंच को कम कर सकता है। कुछ बच्चों को मिट्टन्स से फायदा होता है, लेकिन वे न तो बहुत तंग हों और न इतने ढीले कि सुरक्षा का खतरा बन जाएं।
सर्दियों में हवा सूखी हो तो नियमित रूप से मॉइस्चराइज़र लगाना आमतौर पर किसी खास उपकरण से अधिक मददगार होता है। अगर ह्यूमिडिफायर इस्तेमाल करते हैं, तो उसे नियमित रूप से और अच्छी तरह साफ करें। गंदे उपकरण में फफूंद और बैक्टीरिया पनप सकते हैं।
प्रिस्क्रिप्शन इलाज की जरूरत कब पड़ती है?
मॉइस्चराइज़र त्वचा की रक्षा करता है, लेकिन सक्रिय सूजन वाले फ्लेयर को हमेशा नियंत्रित नहीं कर पाता। अगर त्वचा बहुत लाल, मोटी, बेहद खुजली वाली या तेजी से फैल रही है, तो डॉक्टर त्वचा पर लगाने वाली कॉर्टिकोस्टेरॉइड दवा लिख सकते हैं।
हल्के फ्लेयर में शरीर के लिए हाइड्रोकॉर्टिसोन 1% की सलाह दी जा सकती है। इसे केवल डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्यकर्मी के निर्देश के अनुसार ही लगाएं। दवा की पतली परत केवल सूजे हुए हिस्से पर लगाएं, सामान्य त्वचा पर नहीं। इसे रोजाना के मॉइस्चराइज़र की तरह इस्तेमाल न करें। इमोलिएंट और स्टेरॉइड एक ही दिनचर्या का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन दोनों लगाने का क्रम और अंतराल डॉक्टर की सलाह के अनुसार रखें।
कई माता-पिता टॉपिकल स्टेरॉइड को लेकर चिंतित रहते हैं। सही ताकत, सही मात्रा और सही अवधि में इस्तेमाल करने पर ये एक्जिमा के स्थापित इलाज हैं। समस्या तब हो सकती है जब बिना निगरानी के तेज स्टेरॉइड लगाया जाए, बहुत बार लगाया जाए या लंबे समय तक शरीर के बड़े हिस्से पर इस्तेमाल किया जाए। शिशुओं की त्वचा पतली होती है, इसलिए चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
चेहरे, पलकों, गर्दन या त्वचा की सिलवटों जैसी संवेदनशील जगहों के लिए डॉक्टर टैक्रोलिमस या पिमेक्रोलिमस जैसी कैल्सिन्यूरिन इन्हिबिटर दवाओं पर विचार कर सकते हैं। ये प्रिस्क्रिप्शन दवाएं हैं और कुछ विशेष मामलों में दी जाती हैं, खासकर जब बार-बार स्टेरॉइड लगाना उपयुक्त न हो। किसी दूसरे व्यक्ति की क्रीम अपने बच्चे पर कभी न लगाएं।
एक्जिमा और खाद्य एलर्जी
खाद्य एलर्जी और एटोपिक डर्मेटाइटिस के बीच संबंध है, लेकिन इसे अक्सर गलत समझा जाता है। चिकित्सकीय अनुमान के अनुसार, मध्यम से गंभीर एक्जिमा वाले लगभग 30 से 40% शिशुओं में खाद्य एलर्जी भी हो सकती है। इसका मतलब यह नहीं कि हर बच्चे का एक्जिमा किसी भोजन के कारण होता है।
एक्जिमा मुख्य रूप से त्वचा अवरोध और प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी समस्या है। खाद्य एलर्जी एक अलग तरह की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया है, जो इसके साथ हो सकती है। बच्चे को दोनों समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन केवल एक्जिमा होना खाद्य एलर्जी का प्रमाण नहीं है।
एलर्जी की जांच डॉक्टर की सलाह से ही कराएं, खासकर अगर किसी भोजन के बाद बच्चे को तुरंत पित्ती, सूजन, बार-बार उल्टी, खांसी, सांस में घरघराहट या अचानक बहुत सुस्ती जैसे लक्षण हों। बिना वजह बड़े एलर्जी पैनल कराने से गलत-सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं और भ्रम पैदा हो सकता है। स्तनपान कराने वाली मां को डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह के बिना दूध, अंडा, गेहूं या कोई अन्य भोजन बंद नहीं करना चाहिए। बच्चा ठोस आहार खाने लगा हो, तब भी चिकित्सकीय सलाह के बिना प्रमुख खाद्य पदार्थों को रोकें या देने में देर न करें।
त्वचा विशेषज्ञ या डॉक्टर से कब संपर्क करें?
अगर नियमित मॉइस्चराइज़र और डॉक्टर की सलाह से इस्तेमाल किया गया ओवर-द-काउंटर हाइड्रोकॉर्टिसोन भी चकत्तों को नियंत्रित नहीं कर पा रहा है, तो चिकित्सकीय सलाह लें। बच्चे को अलग ताकत की दवा, किसी अन्य निदान या फ्लेयर के लिए स्पष्ट उपचार योजना की जरूरत हो सकती है।
अगर एक्जिमा में ये लक्षण हों, तो जल्द डॉक्टर से संपर्क करें:
- चकत्ते शरीर के बड़े हिस्से में फैल रहे हों या लगातार बढ़ रहे हों
- नियमित देखभाल के बावजूद सुधार न हो
- खुजली के कारण बच्चे की नींद बुरी तरह प्रभावित हो रही हो
- त्वचा से पानी निकल रहा हो या पीली पपड़ी बन रही हो
- आसपास लालिमा, गर्माहट या सूजन बढ़ रही हो
- बुखार हो या बच्चा सामान्य से अधिक बीमार लगे
ये त्वचा में संक्रमण के संकेत हो सकते हैं। तेजी से फैलने वाले दर्दनाक फफोले, गहरे कटे जैसे घाव या तेज बुखार होने पर तुरंत चिकित्सकीय जांच कराएं।
अगर निदान को लेकर संदेह हो, चेहरे पर बार-बार एक्जिमा हो या समस्या के कारण बच्चे का खाना, सोना और परिवार का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा हो, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना उपयोगी है। चकत्ते बहुत गंभीर होने तक इंतजार करना जरूरी नहीं है।
शिशु में एक्जिमा से जुड़े आम मिथक
“एक्जिमा छूने से फैलता है”
ऐसा नहीं है। आपका बच्चा किसी दूसरे बच्चे से एटोपिक डर्मेटाइटिस नहीं पकड़ सकता। यह छूने, तौलिया या बिस्तर साझा करने से नहीं फैलता।
“बच्चे को ठीक से साफ न रखने के कारण एक्जिमा होता है”
खराब साफ-सफाई एक्जिमा का कारण नहीं है। उलटे, जरूरत से ज्यादा नहलाना, गर्म पानी और तेज साबुन त्वचा अवरोध को नुकसान पहुंचाकर लक्षण बढ़ा सकते हैं। हल्की और सौम्य सफाई पर्याप्त होती है।
“बच्चा बड़ा होगा तो एक्जिमा अपने-आप खत्म हो जाएगा”
उम्र बढ़ने के साथ कई बच्चों में सुधार होता है। लगभग 50% बच्चों में पांच साल की उम्र तक उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। फिर भी, जब तक लक्षण मौजूद हों, नियमित देखभाल जरूरी है। कुछ बच्चों की त्वचा लंबे समय तक सूखी या संवेदनशील रह सकती है और बाद में हाथों का एक्जिमा, हे फीवर या दमा भी हो सकता है। सुधार आम है, लेकिन इसके भरोसे लगातार बने हुए लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
शिशु में एक्जिमा का इलाज और देखभाल कैसे करें
एक्जिमा देखभाल में पूर्णता से ज्यादा नियमितता मायने रखती है। दिन में दो या तीन बार मॉइस्चराइज़र लगाएं, स्नान को छोटा और गुनगुना रखें, खुशबू वाले उत्पादों और अधिक गर्मी से बचें। सक्रिय सूजन के लिए केवल वही दवा लगाएं जो आपके बच्चे के लिए डॉक्टर ने सुझाई हो।
सबसे उपयोगी दिनचर्या अक्सर बहुत सरल होती है: मुलायम कपड़े, हल्की सफाई, भरपूर इमोलिएंट और फ्लेयर शुरू होते ही उचित इलाज। अगर आपको यकीन नहीं है कि चकत्ते एक्जिमा हैं, खुजली के कारण बच्चा सो नहीं पा रहा है या त्वचा संक्रमित जैसी दिख रही है, तो स्वास्थ्यकर्मी, बाल रोग विशेषज्ञ या त्वचा विशेषज्ञ से बात करें। सही समय पर शुरू किया गया एक्जिमा इलाज त्वचा अवरोध को बचाने और बच्चे व पूरे परिवार के रोजमर्रा के जीवन को आसान बनाने में मदद कर सकता है।
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